वाद्य यंत्रों को सीखने से बच्चों को होने वाले 5 लाभ

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संगीत हमारे लिए बहुत लाभदायक है। वाद्य यंत्रों को सीखने से बहुत से फायदे होते हैं। अध्ययन से पता चला है कि यंत्रों को सीखने से बच्चों में संज्ञानात्मक कौशल का विकास होता है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास व स्मृति में वृद्धि होती है। संगीत बच्चों को सामाजिक रूप से अधिक सक्रिय बनाता है। 

माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे के लिए सदैव श्रेष्ठ विकल्प का चुनाव ही करेंगे इसलिए बच्चों को शुरुआती समय में ही किसी माध्यम का प्रयोग सिखाना चाहिए जिससे बच्चे मानसिक व शारीरिक रूप से ठीक रहे ।

 आइए बच्चों को वाद्य यंत्र को सीखने से होने वाले फायदे के बारे में जानते हैं-

(1)संगीत मस्तिष्क की शक्ति को सुधार कर बच्चों को चतुर बनाता है-

बहुत से अध्ययनों से पता चला है कि संगीत बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है। यह उनके मस्तिष्क के कुछ हिस्सों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। बच्चे जो कि संगीत में रुचि रखते हैं वे शैक्षणिक स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं । संगीत बच्चों के मस्तिष्क के उस भाग को तेज करता है जो पढ़ने, गणनाएं करने व भावनाओं के विकास के लिए उत्तरदाई है। संगीत स्मृति को भी बेहतर बनाते हैं।

(2)सामाजिक जीवन में सुधार करता है-

संगीत में केवल बच्चों के मस्तिष्क की शक्ति को नहीं बढ़ाता है बल्कि यह बच्चों के अभिव्यक्ति के रूपों को भी निकालता है। बच्चे बड़े होने के साथ ही कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हैं ।इस समय आप उसे संगीत सीखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं जिससे वह इन कठिनाइयों से आसानी से उभर पाता है।


(3)रचनात्मकता को बढ़ाता है-

हम सब जानते हैं कि संगीत तक युवा कलाकारों की सोचने की योग्यता रचनात्मक होती है। संगीत का अभ्यास करके उसे उत्तम बनाकर रचनात्मकता को बढ़ाया जा सकता है जो कि व्यक्ति में अनंत रूप से रहती है। 

(4)धैर्य शीलता व विश्वास को बढ़ाता है-

जब बच्चे किसी वाले यंत्र को अच्छे से सीखने लगते हैं तो वह आत्म अभिव्यक्ति द्वारा अपने भावों को दर्शाते हैं ।जब भी बच्चे सार्वजनिक रूप से वाद्य यंत्र को बजाते हैं तो इससे उनका आत्मविश्वास बहुत अधिक बढ़ जाता है। किसी वाद्ययंत्र को सीखने में नए रगों को सीखने में समय लगता है जिससे बच्चों में प्रवीणता व कभी ना हार मानने का गुण आता है।

(5)अनुशासित व उत्पादक बनाने में-

संगीत सीखने में समय के साथ ही अनेक प्रयास करने पड़ते हैं। प्रतिदिन अभ्यास करके बच्चे किसी भी वाद्य यंत्र को प्रवीणता के साथ सीख सकते हैं। सबसे श्रेष्ठ बनने के लिए अधिक समय व निष्ठा की आवश्यकता होती है।


 कक्षा व पढ़ाई की नीरस दिनचर्या व शैक्षणिक कार्यों के अलावा संगीत को भी आपको अपने बच्चे के टाइम टेबल में शामिल करना चाहिए इससे ना केवल प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि उनके शक्तिशाली मस्तिष्क की रचनात्मकता का भी विकास होगा जो आप आने वाले समय में देखेंगे।

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