बच्चों को वैदिक गणित से लाभ

वैदिक गणित की खोज व स्थापना भारतीय गणितज्ञ जगतगुरु श्री भारती कृष्ण तीर्थ जी द्वारा की गई। यह विभिन्न प्रकार की  विधियों व प्रक्रियाओं का समूह है जिससे गणितीय समस्याओं को शीघ्र व आसानी से सुलझाया जा सकता है। इसमें अंकगणित ,बीजगणित, ज्यामिति व कैलकुलस आदि को हल करने के लिए 16 मूल सूत्र व 13 उप सूत्र हैं।


वैदिक गणित बच्चों को सूत्रों व तालिकाओ को शीघ्र समझने व याद कराने के लिए सहायक है।यह बच्चों के अतिरिक्त गणना के बोझ को कम करता है व  गणनाओं को तेज व अधिक शुद्ध बनाता है।

 ऐसे बहुत से बच्चे हैं जिनकी रुचि गणित में कम होती है, वैदिक गणित उनके लिए वरदान हो सकता है और उनमें गणित के प्रति आत्मविश्वास की भावना को बढ़ाता है।

 वैदिक गणित को सीखने के कुछ लाभ इस प्रकार हैं :-

1) यह सूत्रों व पहाड़ों को याद करने के अतिरिक्त भार को कम करता है।

2) वैदिक गणित बच्चों में एकाग्रता व आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

3) इससे गणना को पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक शीघ्रता से हल किया जा सकता है। 

4) इसके उपयोग से उंगलियों पर गिनने व रफ कार्य करने की आवश्यकता कम पड़ती है। 

5) वैदिक गणित में अपारंपरिक घटनाओं को शामिल किया जाता है इसलिए यह बच्चों के मानसिक गणित को सुधारना है और उन्हें अधिक सटीक बनाता है।

6) वैदिक गणित से बच्चे की गणनाओ को करने की प्रक्रिया में सहायता मिलती है जो उनकी शुद्धता(accuracy) को बढ़ाता है।

7) वैदिक गणित उन बच्चों के लिए सहायक है जोकि चीजों को देर से सीख पाते हैं यह उन्हें सिद्धांतों को समझाने में सहायता प्रदान करता है।

8) कभी-कभी जब पारंपरिक विधियों के प्रयोग से बच्चों की रुचि गणित में कम होने लगती है तो वैदिक गणित द्वारा उनका interest वापस से लाया जा सकता है।

9) गणनाओं की पारंपरिक विधियां जैसे की वैदिक गणित बच्चों के मन को सतर्क बनाता है व घटनाओं के दौरान उचित निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है और उन्हें बहुआयामी विचारक बनाता है।

 यह बेहतर होगा कि आप अपने बच्चों को 9 या 10 वर्ष की आयु में ही वैदिक गणित सिखाए क्योंकि इस आयु में बच्चे मूल अवधारणाओं को ढंग से समझते हैं और वे गणनाओं के संक्षिप्त रूप(short method) को समझने में सक्षम हो जाते हैं।

 वैदिक गणित में मानसिक गणना व संक्षिप्त रूपों (short method)की अधिकता होने के कारण बच्चों को short method सीखने से पहले long method को सीखना ज्यादा जरूरी होता है।

इसलिए यह निश्चित करें कि वैदिक गणित की ओर बढ़ने से पहले सभी लंबी विधियों की मूल अवधारणा(basic concepts) को स्पष्ट रूप से समझा जाए।

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