बच्चों का प्री - स्कूल कैसे चुनें ?

🏫 बच्चों का प्री - स्कूल चुनने के 10 टिप्स:-

प्ले स्कूल या नर्सरी स्कूल को ही प्रीस्कूल कहा जाता है।बच्चों के लिए अच्छे प्रीस्कूल का चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन यह एक बहुत जरूरी फैसला है जो माता-पिता अपने बच्चों के लिए लेते हैं क्योंकि वे पहली बार अपने बच्चों को एक बिल्कुल नए वातावरण में भेज रहे होते हैं जहां बच्चे नई चीजों से और नए लोगों    से मिलते हैं। इस पर सभी माता-पिता के अलग-अलग विचार हो सकते हैं जैसे कुछ माता-पिता सामाजीकरण अवसरों (socialization opportunities) के लिए, कुछ अच्छे शिक्षात्मक आधार या बच्चों की देखभाल के लिए बच्चों को प्रीस्कूल भेजते हैं। 


बच्चों के लिए प्री स्कूल चुनने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है-

सुरक्षा -: बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है ।आमतौर पर लोग सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देते हैं लेकिन सभी माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि बहुत छोटे बच्चे अपनी बात को ठीक प्रकार से नहीं बता पाते और नए वातावरण में वह कैसा महसूस कर रहे हैं ये नहीं बता पाते इसलिए उन्हें एक सुरक्षित प्रीस्कूल में ही भेजना चाहिए।

स्वच्छता :- यदि माता-पिता बच्चों को शुरुआती समय से ही स्वच्छता और स्वस्थ आदतों से अवगत कराते हैं तो यह जीवन भर उनके साथ रहती हैं। बच्चे जिस भी स्कूल में जाएं वहां स्वच्छता की जांच करना जरूरी है जिससे बच्चे अनेक तरह की बीमारियों से दूर रहें।


 मित्रवत वातावरण (friendly enviorment) -: शिक्षकों व वहां का स्टाफ आपसे व आपके बच्चे से किस तरह बातचीत करते हैं ?उनका व्यवहार कैसा है? वे बच्चों से किस तरह पेश आते हैं? इन सभी बातों पर ध्यान देना जरूरी है। शिक्षकों का प्रभाव सकारात्मक होना चाहिए व उन्हें सकारात्मक अनुशासन के तरीकों जैसे उचित व्यवहार पर बल देना चाहिए।


शिक्षकों का व स्टाफ का व्यवहार :-इस बात को ध्यान देना चाहिए कि वहां का स्टाफ आपके साथ किस तरह से बातचीत करता है। यह निश्चित करें वे आपके बच्चे से संबंधित जानकारी जैसे उनकी पाठ योजना(learning material), कार्यक्रम(schedule) ,मूल्यांकन(assessment) ,छुट्टियों के बारे में जानकारी, समय की जानकारी व पाठ्यक्रम से जुड़ी अन्य जानकारी आपको दे। यह सभी जानकारी वे स्कूल वेबसाइट या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मदद से दे सकते हैं।

वहां के शिक्षक सकारात्मक ,विश्वसनीय व बच्चों की देखभाल करने वाले होने चाहिए जिससे बच्चों की देखभाल ठीक प्रकार से हो। जिससे बच्चे चीजों को बेहतर ढंग से समझ सकें।

बच्चों का आपस में घुलना मिलना :-बच्चे दूसरे बच्चों के साथ ही नई चीजों को सीखते हैं व समझते हैं। इससे वे नए शब्दों को सीखते हैं जिससे उनकी बातचीत करने की क्षमता में वृद्धि होती है।

 कक्षा की गतिविधियां :- बच्चों के मस्तिष्क के विकास के लिए प्राथमिक स्तर पर भी बेसिक व गतिशील गतिविधियां महत्वपूर्ण होती हैं। इसकी कई विधियां है जिनमें से एक विषयगत शिक्षण है जिसमें वास्तविक जीवन में प्रयोग होने वाली वस्तुओं व अनुभव से बच्चों को उनकी आसपास की चीजों का ज्ञान कराया जाता है जो worksheet व homework के द्वारा बच्चों को नहीं दिया जा सकता।

 मूल्यांकन का स्वरूप :- बच्चों की संपूर्ण वृद्धि व प्रगति का मूल्यांकन करना भी एक आवश्यक भाग है जिसमें बच्चों की शैक्षिक व सामाजिक रूप से होने वाली वृद्धि के साथ ही भावनात्मक वृद्धि और  शारीरिक और विकास को शामिल करना चाहिए। बच्चों के मूल्यांकन के बारे में माता पिता के साथ बातचीत करनी चाहिए। 

बाहरी गतिविधियां : प्री स्कूल में बच्चों के लिए playgroung ,swimming pool आदि होने से इसका बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। केवल इन चीजों का होना ही काफी नहीं है बल्कि बच्चों का इन से परिचय भी कराना चाहिए। 

स्थान या दूरी :- इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों का प्रीस्कूल घर से ज्यादा दूर ना हो। ऐसा होने पर बच्चे ज्यादा यात्रा करने से बहुत थक जाएंगे। इसका विपरीत प्रभाव भी हो सकता है ऐसे ज्यादा दूरी होने के कारण बच्चों का प्रतिदिन स्कूल जाने का मन नहीं करेगा और वे ऊब जाएंगे।

 बजट :- यह हमेशा जरूरी नहीं है कि बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने पर ही आप अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दे सकते हैं। कभी कभी जो स्कूल आपके बजट में होते हैं वहां interaction learning  और उच्च quality education देते हैं।

 माता-पिता को अपने बच्चों को समझना बहुत जरूरी है। कुछ लोग अपने बच्चों 2 से 2.5 साल की आयु में स्कूल भेजने लगते हैं। कुछ बच्चे जल्दी सीख जाते हैं वहीं कुछ बच्चों को बढ़ने में और सीखने में कुछ समय लगता है। इसमें चिंता वाली कोई भी बात नहीं है। आमतौर पर लोगों को यह सलाह दी जाती है कि वह अपने बच्चों को तभी स्कूल भेजना शुरू करें जब वह अच्छे से बातचीत कर सकें और माता पिता को बता सके कि वह कैसा महसूस कर रहे हैं।

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