बच्चे खाना नहीं खाते तो क्या करें ?

बच्चे पर्याप्त मात्रा में खाना नहीं खाते तो क्या करें

अधिकांश माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनके बच्चे पर्याप्त मात्रा में खाना क्यों नहीं खाते हैं। थोड़ी मात्रा में खाना खाना, खाना खाने में नखरे करना या खाना खाने से मना करना ,अक्सर बच्चे यह सब करते हैं।  बच्चों का यह व्यवहार पूरी तरह से सामान्य है। लेकिन जब आपका बच्चा ऐसा रोज़ - रोज़ करने लगे या जब आपको ऐसा लगे कि आपका बच्चा पेट भरकर भोजन नहीं करता तो ऐसी स्थिति में आपको बच्चे के व्यवहार का कारण जानना आवश्यक हो जाता है। ऐसे कई कारण हो सकते हैं, जिससे आपके बच्चे का खाना खाने का मन नहीं करता है।

 कुछ मुख्य कारण निम्न है-

(1) बच्चों में होने वाली शारीरिक व मानसिक वृद्धि व उसकी गतिविधियों में होने वाले परिवर्तनों के कारण भी बच्चों को भूख नहीं लगती है।

(2) 2 से 3 साल के बच्चों का भार उतनी तेजी से नहीं बढ़ता जितना कि 1 से कम वर्ष के शिशु का बढ़ता है। इस कारण भी उन्हें भूख कम लगती है।

(3) बच्चों को अपने आसपास के वातावरण में बहुत दिलचस्पी होती है, जिसके कारण वह खाने पर बहुत कम ध्यान देते हैं।

(4) बच्चों का स्वाद समय-समय पर बदलता रहता है। इसके कारण उनकी रूचि भोजन के प्रति कम हो जाती है।

(5) जब बच्चे बीमार होते हैं, जैसे- सर्दी, जुखाम पेट साफ ना होना या दांतों की समस्या के कारण भी बच्चे पर्याप्त मात्रा में खाना नहीं खाते हैं।

(6) यदि बच्चों को बाहर का खाना  ज्यादा पसंद होता है, तब भी वह घर पर सही से भोजन नहीं करते हैं और जंक फूड की मांग करते हैं।

(7) अगर आप बच्चों को ज़बरदस्ती भोजन कराती हैं, तो हो सकता है कि वे दबाव में आकर ठीक से भोजन ना करें और भोजन के प्रति उसकी रुचि कम हो जाए।

      बच्चे सामान्य रूप से अक्सर खाना खाने से मना करते हैं या पर्याप्त मात्रा में खाना नहीं खाते हैं। यदिआपको लगता है कि बच्चे अक्सर ऐसा व्यवहार करते हैं तो ऐसे में आपको चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। 1 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों को सामान्यता कम भूख लगती है। अपने बच्चे की भूख बढ़ाने के लिए और उसके शरीर में पर्याप्त मात्रा में पोषण पहुंचाने के लिए कुछ बातें हैं आप को ध्यान में रखनी चाहिए।


बच्चों की दिनचर्या स्थापित करें 

यदि आप बच्चों के प्रत्येक कार्य के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करती हैं, तो उनकी उस समय पर उसी कार्य को करने की आदत पड़ जाती है। ऐसा करने से आपके बच्चे की एक निश्चित समय पर भोजन करने की आदत पड़ जाती है। अगर आप बच्चों को शुरू में केवल एक ही समय भोजन देती हैं, तो उसका भी समय निश्चित करें।

बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण बनाएं

बच्चों पर खाने के लिए दबाव न बनाएं। यदि घर का वातावरण सकारात्मक होगा और बच्चे खुश होंगे तो वे खुशी से खाना खा लेंगे।  हमेशा बच्चों को एक आरामदायक जगह पर बैठाकर ही भोजन खिलाएं ।ऐसा करने से बच्चे आराम से बैठकर खाना खाएंगे और बार-बार उठ कर भागेंगे नहीं। बच्चे सब के साथ बैठकर खाना खाते हैं तो वे टेबल मैनर्स में सीखते हैं और खुशी से खाना भी खा लेते हैं।

सही उम्र पर ही ठोस आहार दें

जब आपको ऐसा लगे कि आपका बच्चा ठोस आहार खा सकता है, तो ही उसको ठोस आहार देना शुरू करें। सामान्यता बच्चों को छह माह के बाद ठोस आहार दिया जा सकता है। इस प्रक्रिया में ज्यादा जल्दबाजी या देरी करना सही नहीं है। जब बच्चे ऐसे संकेत दें कि खाने की तरफ उनकी रुचि है, तब आप अपने डॉक्टर की सलाह से उनको ठोस आहार देना शुरू कर सकती हैं ।बच्चों को ठोस आहार देने का एक सही समय जरूरी है।

 सही तरह का खाना चुने


बच्चों को शुरू से मां का दूध दिया जाता है या वे  डिब्बे वाला दूध पीते हैं तथा थोड़ा बड़े होने पर बच्चों को दाल या चावल का पानी दिया जाता है। इसके साथ ही आप बच्चों को फलों व सब्जियों का जूस दे सकती हैं ।जब बच्चों को कुछ मीठा फल केला, सेब देना शुरू करती है तो वह उसे आसानी से पचा पाते हैं ,उन्हें स्वाद भी मिलता है और वे खुशी से खा भी लेते हैं।

सही मात्रा में खाना दे

आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा सही मात्रा में खाना खाए ।यदि आपका बच्चा थोड़ी थोड़ी देर में कुछ खाता है और उसका वजन भी ठीक है तथा व शारीरिक रूप से सक्रिय भी है, तो आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा नहीं है कि वह कम खाना खा रहा है प्रत्येक बच्चा अपनी भूख के हिसाब से ही खाना खाता है।

सही आवृत्ति से खाना दे

जब आप बच्चों को ठोस आहार देना शुरु करती हैं, तो यह उनके शरीर के लिए बहुत बड़ा बदलाव होता है। इसलिए बच्चों को थोड़ा समय दें और आराम आराम से उनकी खुराक बढ़ाएं। 6 से 11 माह के तक आप धीरे-धीरे उनके खाने व स्नैक्स की खुराक बढ़ा सकती हैं।

ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रखें

जब आप बच्चों को खाना खिला रही होतीं हैं, तो उन सब चीजों को दूर रखें जिनसे उनका ध्यान भटकता है ,जैसे- टीवी ,मोबाइल या उनके पसंदीदा खिलौने। यदि यह चीजें बच्चे के सामने रहेंगी, तो उसका मन इन चीजों की ओर आकर्षित होगा और फिर वे खाने पर ध्यान नहीं देंगे।

खाने के बीच सही अंतराल रखना

यह बहुत जरूरी है कि जब बच्चा भूखा हो तभी आप उसे खाना खिलाए ऐसा जरूरी नहीं है कि दो बार के खाने के बीच हमेशा समान अंतराल ही हो। बच्चे उनकी उम्र के हिसाब से गतिविधियां करते हैं इसलिए बच्चों को खुलकर खेलने दें। इससे उनकी भूख बढ़ती है। ध्यान रखें कि दो समय के भोजन के बीच का अंतराल ना कम हो और ना ही ज्यादा।

व्यर्थ के भारी व तैलीय स्नैक्स ना दें

यदि आप बच्चों को खाने के पहले भारी स्नैक्स देती है, तो आपकी बहुत बड़ी गलती करतीं हैं। इससे आपके बच्चे की भूख मिट जाती है और फिर वह खाना नहीं खाता है।आपको यह ध्यान देना चाहिए कि बच्चों को स्नैक्स खिलाने का उद्देश्य बच्चों का पेट भरना नहीं होता बल्कि उन्हें अतिरिक्त भूख से बचाना होता है। चिप्स, पकोड़े या जंक फूड देने की जगह आप अपने बच्चों को फल दे सकती हैं। फलों को बच्चे आसानी से पचा भी लेते हैं और बाद में भोजन करने के लिए उन्हें भूख भी लगती है।

नई चीजों को खिलाना

यदि बच्चे ठीक से खाना नहीं खाते तो उन्हें कुछ नई चीज बनाकर खिलाएं। कई बार बच्चों को स्वाद व अन्य कारणों की वजह से खाना पसंद नहीं आता है। ऐसे में बच्चों को नई चीजें बनाकर खिलाने से उनका पेट भरा रहता है और खाने में उनकी रुचि भी बनी रहती है।

धैर्य और दृढ़ता से काम ले

यदि आपका बच्चा पर्याप्त मात्रा में खाना नहीं खाता है, तो ऐसे में आप चिंता ना करें। ऐसे समय में आपको धैर्य व दृढ़ता से काम लेना चाहिए ।बच्चों के इस व्यवहार का कारण खोजें और इस समस्या का समाधान करें।


अपने बच्चे को स्वास्थ्यवर्धक व पौष्टिक आहार दें। उसे उसकी भूख के अनुसार ही खाना दें ।आपका बच्चा कितना खाता है केवल इस आधार पर अपने बच्चे के स्वास्थ्य को ना देखें। बच्चे का स्वास्थ्य उसके वजन व उसके द्वारा की गई गतिविधियों पर निर्भर करता है। यदि आपका बच्चा सक्रिय है और उसका वजन भी उसके उम्र के हिसाब से ठीक है तो बच्चे के कम खाना खाने पर आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

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