एक रचनात्मक बच्चे की परवरिश के लिए जानने योग्य आवश्यक बातें:

  बच्चों को रचनात्मक कैसे बनाएँ ?
रचनात्मकता एक ऐसी योग्यता है जिसमें बच्चा ऐसी नई चीजें बनाता है जिनका प्रयोगात्मक व कलात्मक मूल्य अधिक होता है। पुरानी व नई समस्याओं के समाधान ढूंढने का यह एक अच्छा मार्ग है ।जब बच्चों में रचनात्मकता का विकास होता है तो वह हर प्रकार की कठिन समस्याओं का सामना अपनी रचनात्मक सोच के साथ करते हैं।


भविष्य में ऐसे बच्चे अपने रचनात्मक सोच से प्रत्येक कार्य में सफल होते हैं और लोगों द्वारा पसंद किए जाते हैं। उनकी रचनात्मक सोच से अन्य लोगों को भी लाभ होता है जैसे उनका अपने किसी क्रिएटिव प्रोजेक्ट में लोगों के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाना।

प्रयोगात्मक लाभो के साथ ही रचनात्मक व्यक्तियों की हमेशा कुछ नया करने की सोच उन्हें खुशी देती है।वास्तव में ,कई कलाकार धन के लिए नहीं बल्कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए और अपने जीवन को उद्देश्य देने के लिए कार्य करते हैं।


ऐसा भी हो सकता है एक रचनात्मक विचार रखने वाला बालक अपनी पीढ़ी में बहुत कुछ मूल्यवान कार्य करें ।जिन बच्चों में रचनात्मकता का विकास ठीक प्रकार से होता है उनमें धैर्य दृढ़ता व कठिन परिश्रम  करने की योग्यता होती है जिससे वे भविष्य में लैरी पेज, मार्क जुकरबर्ग के जैसे सफल व्यक्ति बन सकते हैं।

अनुवांशिकी रचनात्मकता का मूल आधार है:

रचनात्मक होना अनुवांशिकी का एक महत्वपूर्ण भाग है वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ लोग जन्म से ही दूसरों से अधिक रचनात्मक होते हैं तथा उनमें यह रचनात्मकता अधिक स्वाभाविक रूप से आती है ।रचनात्मकता एक जन्मजात प्रतिभा है और इस प्रतिभा से युक्त व्यक्ति दूसरों की अपेक्षा किसी भी कार्य को कम समय में अच्छी प्रकार से कर सकता है।ऐसे व्यक्ति चीजों को देखने का एक अलग नजरिया रखते हैं व इनकी विभिन्न प्रकार की चीजों में रूचि होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सभी व्यक्तियों में अलग-अलग तरह की रचनात्मक योग्यताएं होती हैं। बच्चे प्राकृतिक रूप से रचनात्मक होते हैं लेकिन सामाजिक दबाव के कारण वह इन चीजों को सीख नहीं पाते हैं और उत्तेजना की कमी के कारण उनमें रचनात्मकता का विकास ठीक प्रकार से नहीं हो पाता।




रचनात्मक बच्चों की विशेषताएं:

*जिन बच्चों में रचनात्मकता का गुण पाया जाता है वे खासकर साधारण चीजों का प्रयोग नए तरीकों से करते हैं जैसे किसी डिब्बे का इस्तेमाल घर ,गाड़ी या गुफा बनाने में करना।

*कभी-कभी सहजता के साथ बिना तर्क के समस्याओं के समाधान के नए तरीके खोजना।

*दिन में सपने देखना।

*वे अपने सभी काम अपने तरीके से, स्वतंत्रता के साथ करते हैं यह सोचे बिना करते हैं कि दूसरे बच्चे क्या कर रहे हैं।

*वे जोखिम (risk) उठाने में घबराते नहीं है और परिस्थितियों से सीख लेते हैं।

*संगीत कला व कहानियों को बनाकर वे अपने विचार व्यक्त करते हैं।

*चीजों को सुधार कर उनमें अपनी तरह से परिवर्तन करते हैं जैसे किसी खिलौने या गेम में कुछ बदलाव करना या स्कूल बैग को अपने तरीके से सजाना।



किसी व्यक्ति की रचनात्मकता में अनुवांशिकी एक मुख्य कारण हो सकता है पर वैज्ञानिक इस बात से भी इनकार नहीं करते कि किसी व्यक्ति के विकास में उसके आसपास का वातावरण बहुत अहम भूमिका निभाता है। व्यक्ति रचनात्मकता को विकसित करके अपनी क्षमताओं को प्राप्त कर सकता है। रचनात्मकता को पोषण देने के लिए बाल्यवस्था सबसे उत्तम समय है।
बाल्यावस्था एक ऐसा समय है जबआपके बच्चे के शक्तिशाली दिमाग का विकास होता है और इस समय वह सामाजिक सोच से दूर रह कर स्वतंत्र रूप से सोच सकता है और अपनी मनचाही दिशा में खोज कर सकता है।यह वह समय है जब बच्चे में रचनात्मकता की शुरुआत होती है ।वास्तव में ,उसकी रचनात्मकता के विकास को बढ़ाकर आप अपने बच्चे को अच्छे से सपोर्ट कर सकती हैं।

इसका अर्थ है कि उसके ज्ञान को बढ़ाकर आप उसको कुछ ऐसी चीजें भी उपलब्ध करा सकती हैं जिसमें वह अपनी रचनात्मकता दिखाएं।उसे कुछ समय अकेला रहने दें। जिससे वह सोचे और अपनी कल्पना शक्ति का विकास कर सकें।आपका बच्चा जो भी करता है उसमें उसे आपके प्रोत्साहन व स्वीकृति की आवश्यकता होती है इसीलिए उसे ऐसा वातावरण दीजिए जो उसकी रचनात्मकता को दबाए नहीं बल्कि उसका विकास करे। ऐसा करने से आप अपने बच्चे की रचनात्मक सोच की आदत को विकसित कर सकती हैं जो कि जीवन भर उसके साथ रहेगी।


कुछ उपाय:-

*पढ़ने की आदत:
 पढ़ने की आदत आपके बच्चे के बौद्धिक स्तर को भी बढ़ाती है इससे मिलने वाली जानकारी व अनुभव उसकी दिलचस्पी को बढ़ाता है इससे बच्चे में कल्पनाशील सोच का विकास होता है | पढ़ने से बच्चों को ऐसी चीजों के बारे में पता चलता है, जिसमें वे अपनी रचनात्मकता दिखा सकते हैं।

१) संगीत कला व साहित्य में रुचि :
दूसरों के द्वारा बनाई गई रचनात्मक चीजें बच्चों को रचनात्मक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

२)बच्चों की रुचि को बढ़ावा देना :
जितना हो सके बच्चों की दिलचस्पी को समझें और आगे बढ़ने में उनकी मदद करें खुले दिमाग से उसके साथ बात करें और अगर हो सके तो उन्हें ऐसी चीज़ें  उपलब्ध कराएं जिससे उनकी कल्पनाशीलता का विकास हो।

३)बच्चे की रुचियों के जुनून को समझें : 
बच्चे की रुचि जिस किसी भी चीज में हो उसे समझे और अपनाएं क्योंकि उसका यही जुनून और दिलचस्पी उसकी कल्पना को आकार देगा।

४)अपने बच्चे को रचनात्मक होने के लिए शांत स्थान प्रदान करें।

५)अपने बच्चों को खुलकर खेलने दे :
अपने बच्चों को ब्लॉक व गुड़िया जैसे खिलौने दे जिसमें रचनात्मकता की आवश्यकता हो।

६)ऐसे अवरोधों को दूर रखें जो आपके बच्चे का वह समय बर्बाद कर रहे हैं, जिसमें वह कल्पना करते हैं और सोचते हैं | बच्चों को ऐसी जगह पर मत रखें जो उनकी रचनात्मकता में बाधा उत्पन्न करें।

७)बच्चों द्वारा किए गए रचनात्मक कार्यों में दोष ना निकाले, उनकी प्रशंसा करें।

८)अपने बच्चे की प्रेरणा स्रोत बने, उन्हें ऐसे लोगों से मिलवाएं जिनसे उन्हें प्रेरणा मिल सके।

९) बच्चों का मार्गदर्शन करें और उनके साथ समय बिताएं जिससे उनकी रचनात्मक दुनियाँ के बारे में जान सकें और समझ सकें।

१०)बच्चों द्वारा कोई रचनात्मक कार्य करने के बाद उन्हें इनाम दें ।

११)जिस क्षेत्र में बच्चों की रुचि हो उससे संबंधित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें।

१२)असफलता का डर किसी रचनात्मक व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक सकता है ।अतः आप अपने बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाएं और उसे असफलता से उबरने में मदद करें उसे बताएं कि गलतियों से किस प्रकार सीख लेनी चाहिए।

१३)बच्चों को हर चीज सीखने दें उन्हें किसी एक क्षेत्र में सीखने के लिए मजबूर ना करें, फिर चाहे वो पढ़ाई हो या कुछ और |

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