Are you an overprotective parent?

आपका ओवरप्रोटेक्टिव होना बच्चों के लिए सही नहीं


 हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग बढ़ा सकती है बच्चों की परेशानियां

 माता पिता होने के नाते अपने बच्चे की चिंता करना आपकी जिम्मेदारी है और भावनात्मक रूप से भी अत्यंत आवश्यक है। लेकिन इसी भावना की अधिकता आपको अपने बच्चे के प्रति ओवरप्रोटेक्टिव बना देती है।

 ओवरप्रोटेक्टिव पेरेंट्स का अर्थ है, बच्चे पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने वाले पेरेंट्स। बच्चे का खाना, उसकी नींद, उसका स्कूल, उसकी पढ़ाई, उसका विकास और उससे जुड़ी हर छोटी खबर, अगर आपके दिमाग में सिर्फ यही बातें चलती रहती हैं, तो आप भी अपने बच्चों को लेकर और ओवरप्रोटेक्टिव हो सकते हैं। जब मां-बाप बच्चों को हर छोटी बात पर रोकते हैं और क्या करना है ,क्या नहीं करना है यह बताते रहते हैं तो बच्चे ज्यादा कुछ नहीं सीख पाते। इसे हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग भी कहा जाता है। 


आपके इस प्रकार के स्वभाव से बच्चों को किसी प्रकार का लाभ होने की बजाय है, उन्हें हमेशा नुकसान ही होता है।

बच्चे की अपनी सोच

 बच्चे के पालनपोषणमें ओवरप्रोटेक्टिव पेरेंटिंग बहुत ही घातक हो सकती है। ऐसे में बच्चों का अपना स्वभाव विकसित नहीं हो पाता है। जब पेरेंट्स बच्चों को हर बात पर सही गलत बताते हैं और उन्हें अपने मुताबिक चलाने लगते हैं, तो ऐसे में बच्चे स्वयं परेशानियों का सामना करना नहीं सीख पाते हैं। और उनमें निर्णय लेने की क्षमता ही नहीं आ पाती।बच्चे इन परेशानियों को सुलझाने की बजाय हार मान लेते हैं। यह परेशानियां स्कूल कॉलेज में और नौकरी से भी जुड़ी हो सकती हैं।

परिपक्वता की कमी 

बच्चे का जरूरत से ज्यादा ध्यान रखने की माता पिता की आदत बच्चे  में उम्र के साथ परिपक्वता भी नहीं आने देती है। जब बच्चे माता पिता पर अधिक निर्भर रहने लगते हैं, तो वह किसी भी समस्या को स्वयं सुलझाने में कठिनाई महसूस करते हैं। आगे चलकर भी वे घर से बाहर टीचर या बस आदि पर कुछ ज्यादा ही निर्भर रहने लग सकते हैं ।वे हमेशा अपनी परेशानियों के समाधान के लिए दूसरों की मदद पर निर्भर रहने लगते हैं। ऐसे में बच्चों की परिपक्वता में कमी आना लाजमी है।

 अकेले रहने की हिम्मत

ओवरप्रोटेक्टव पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ रहते हैं और उनकी हर पल की खबर रखते हैं। ऐसे में जब भविष्य में किसी दूसरे शहर में पढ़ाई या नौकरी के लिए बच्चों के सामने अकेले रहने का मौका आता है, तो वे इस मौके को अक्सर छोड़ देते हैं क्योंकि उनमें अकेले रहने की हिम्मत नहीं होती है।वे अपने माता-पिता से अलग अपनी क्षमताओं को नहीं पहचान पाते और काबिल होते हुए भी वे भविष्य में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

बच्चे का अच्छा प्रदर्शन

 जब माता-पिता बच्चों को हर बात में सही या गलत यह बताते हैं, तो यह बातें उनकी आदत बन जाती हैं। वह कुछ भी नया करने से डरते हैं और सोचते हैं कि जो भी वह करने जा रहे हैं वह सही है या नहीं। ऐसे में बच्चे पूरी तैयारी के बाद भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं और पीछे रह जाते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए माता-पिता को बच्चों से थोड़ी दूरी बनानी चाहिए और उन्हें आत्मनिर्भर होने   का मौका देना चाहिए।

जो काम सिर्फ उनके होंगे 

जब बच्चे हमेशा अपने माता-पिता के साथ रहते हैं तो वे अपने सारे कामों के लिए उन्हीं पर निर्भर रहते हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए माता-पिता को दिन भर के कई काम खुद करने की बजाय बच्चों को भी इनका हिस्सा बनाना शुरू करना चाहिए। इस तरह बच्चे अपने कामों के प्रति जिम्मेदारी समझेंगे और उनके व्यक्तित्व में भी सुधार होगा। इस काम में वह पूरे परिवार की मदद ले सकते हैं।

      कैसे बचें हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग से 

आपके बच्चे को ऐसी  परवरिश की जरूरत है, जिसमें उनकी भावनाओं और आवश्यकताओं को समझा जा सके। आप भी इसी प्रकार की परवरिश अपने बच्चों को दें और अपने ओवरप्रोटेक्टिव (सुरक्षात्मक) व्यवहार में परिवर्तन लाएं।

 ऐसा करने से बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सही रहता है। अपने बच्चों को खेलने और यात्रा आदि करने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें बांधकर ना रखें और उन्हें खुद निर्णय लेने का मौका दें।

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