बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाए ?

बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाए ?

माता पिता बच्चों का ध्यान रखते हैं लेकिन वे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं। उनका 
इस तरह बीमार बार- बार बीमार होने का कारण उनकी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता 
है। प्रतिरोधक क्षमता हमें कई बीमारियों से बचाती है। छोटी-छोटी बीमारियां जैसे 
कोल्ड ,फ्लू, खाँसी आदि से बचाकर रखती है।हमारी इम्यूनिटी के कमजोर होने पर 
हम जल्दी बीमार पड़ते हैं ।














शोध बताते हैं कि वयस्कों की तुलना में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती
है, इसलिए वे जल्दी बीमार हो जाते हैं।जिन बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें 
मौसम बदलने के साथ ही सर्दी, जुखाम, खाँसी, बुख़ार आदि समस्याएं होने लगती हैं।
ऐसे में बच्चे संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि से भी ग्रस्त हो 
सकते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता हमें कई प्रकार के बैक्टीरियल व फंगल इंफेक्शन से सुरक्षा 
प्रदान करती है ।कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले बच्चे अक्सर बैक्टीरिया, वायरस 
संपर्क में आने पर बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए आप 
अपने बच्चे की जीवन शैली और आहार में परिवर्तन लाकर उसकी रोग प्रतिरोधक 
क्षमता को मज़बूत बना सकते हैं।

आइए जानते हैं कि इस समस्या का समाधान किस प्रकार किया जाए और बच्चों की 
रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए-

 मां का दूध है जरूरी 

मां का दूध बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत ही आवश्यक होता 
है।
इसमें उपस्थित प्रोटीन, वसा और चीनी बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी है। मां 
के दूध मे एंटीबॉडीज( प्रतिरक्षी) व श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBC) होती हैं, जो रोग 
प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाती हैं और किसी भी प्रकार के संक्रमण, एलर्जी, 
डायरिया, निमोनिया ,मेनिनजाइटिस,SIDS आदि रोगों से लड़ने में सहायता प्रदान 
करती हैं ।

शोध बताते हैं कि मां का दूध बच्चों की मानसिक शक्ति को भी बढ़ाता है और उन्हें 
जीवन में कई रोगों जैसे क्रोन रोग, कोलाइटिस, कोलोस्ट्रम व कुछ निश्चित प्रकार के 
कैंसर से बचाता है।
बच्चे के जन्म के बाद निकालने वाले पीले गाढे दूध में  प्रचुर मात्रा में रोग प्रतिरोधी 
(एंटीबॉडी) प्रतिरक्षी होती है  इसलिए शिशु को पहले 2 से 3 माह तक मां का दूध 
अवश्य देना चाहिए जिससे उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास हो।

 साफ सफाई से बढ़ेगी बच्चों में इम्यूनिटी

 आप अपने बच्चों के आसपास सफाई रखें और उन्हें स्वच्छ रहने की आदत सिखाएं। 
स्वच्छता रखने से इम्यूनिटी कीटाणुओं से लड़ने व तनाव को कम करके बीमारियों से 
लड़ने में मदद मिलती है ।बच्चे अक्सर बैक्टीरिया, कवक वायरस आदि के संपर्क में 
आते रहते हैं इसलिए साफ सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है।

* अपने बच्चों को अच्छी तरह से हाथों धोना सिखाएं 
उन्हें 20 सेकंड तक साबुन व गुनगुने पानी से हाथ धोने को कहें। इससे सर्दी व फ्लू 
के संक्रमण का खतरा बहुत कम हो जाता है।
 बाहर या स्कूल से आने के बाद, बाथरूम का उपयोग करने के बाद, पालतू जानवरों 
के साथ खेलने के बाद, भोजन खाने से पहले और बाद में बच्चों को हाथ धोना सिखाएं
 * स्वच्छता संबंधित आदतें जैसे दिन में दो बार ब्रश करना, साफ कपड़े पहनना, रोज 
नहाना  आदि बातें सिखाए।

छींकने या खासने के बाद रुमाल का प्रयोग करना आदि के बारे में बताएं ।
बच्चों को बाहर लेकर जाएं तो disposal wipes का इस्तेमाल करें।

बच्चों को फल व हरी सब्जियां खिलाएं

 बच्चों के भोजन में फल और हरी सब्जियों को शामिल करना बहुत ही आवश्यक है 
क्योंकि स्वस्थ आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 
आप बच्चों को सेब, अनार, नाशपाती, चीकू ,पपीता , संतरा, ऐवकाडो आदि मौसमी 
फल व सेम की फली, ब्रोकली बीन्स, फलिया,गाजर ,पालक ,लहसुन ,मटर आदि 
सब्जियां  साबुत अनाज और अन्य खाद्य पदार्थ  जिनमें विटामिन ए, विटामिन B2 ,
विटामिन सी ,सेलेनियम ,आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर होती है ,खिलाएं।
 इन सब से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इन सब में कैरोटीन ऑइट्स 
(carotenoids)नामक न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जोकि रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को 
मज़बूत बनाते हैं। और संक्रमण प्रतिरोधी श्वेत रक्त कणिकाओं का निर्माण करते हैं ।
बच्चों को बाहर का डिब्बाबंद खाना ना दें। बच्चों को पूरे दिन में अलग अलग तरह का 
भोजन वह स्नैक्स दे बच्चों के भोजन में फल व सब्जियों की सही मात्रा निश्चित करें।

चुकंदर गाजर और पालक का सूप बच्चों के लिए फायदेमंद होता है वह उनकी 
इम्यूनिटी को बढ़ाता है ,सूखे मेवे भी रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने में सहायक हैं।


पर्याप्त नींद व आराम है जरूरी 

शोध बताते हैं कि पर्याप्त आराम मिलने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
बढ़ते हुए बच्चे के लिए पर्याप्त नींद और आराम बहुत ही आवश्यक है ।पर्याप्त मात्रा 
में नींद न लेने से बच्चों को कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं ।नींद प्रतिरक्षा 
प्रणाली पर गहरा प्रभाव डालती है। नवजात शिशु को प्रतिदिन 18 घंटे की नींद की 
आवश्यकता होती है, जबकि अन्य बच्चों को उनकी आयु के हिसाब से 10 से 14 घंटे 
की नींद अवश्य लेनी चाहिए।

ध्यान रखें कि जो बच्चे की नींद पूरी हो बच्चों को अंधेरे कमरे में सुलायें। अंधेरे कमरे 
में सोने से मेलाटोनिन नामक हार्मोन के स्राव को बढ़ावा मिलता है ,जो कि अच्छी नींद 
के लिए जरूरी है और शरीर में एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है ।
बच्चों को बाहर खेलने दें , घर में रहने वाले बच्चों की अपेक्षा बाहर खेलने वाले बच्चों 
की इम्यूनिटी ज़्यादा मज़बूत होती है।


विटामिन डी बढ़ाएगा इम्युनिटी

विटामिन डी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में एक औषधि की तरह कार्य करता है। 
विटामिन डी की कमी से किसी भी संक्रमण, अस्थमा, कैंसर और प्रतिरक्षा प्रणाली 
संबंधित कई बीमारियां हो सकती हैं।
अपने बच्चे को 20 मिनट के लिए बाहर ले जाए सुबह की ताज़ी धूप आपके बच्चे के 
शरीर व मन दोनों के लिए ही लाभदायक है।


धूम्रपान करने से बचें 

धूम्रपान करना आपके और आपके बच्चे की सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। यदि 
आप या आपके घर पर कोई भी धूम्रपान करता है ,तो इससे आपके बच्चे का स्वास्थ्य
पर बुरा असर पड़ता है। सिगरेट के धुएं में 7000 से ज्यादा घातक रसायन होते हैं ,जो 
कि शरीर में कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं ।

बच्चों के पास धूम्रपान ना करें और ना ही धूम्रपान करने के बाद बच्चों के पास जाएं 
क्योंकि धुएं के कण कपड़ों पर आसानी से चिपक जाते हैं और बच्चों के शरीर में 
पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं।
इस धुएं के कारण बच्चों को  SIDS, bronchitis,अस्थमा, कान में संक्रमण आदि 
बीमारियां हो सकती हैं।  यह बच्चों की बुद्धि व तंत्रिका तंत्र पर भी प्रभाव डालती हैं।


 व्यायाम से बढ़ेगी इम्यूनिटी 

व्यायाम हमारे शरीर को सभी रोगों से मुक्त करता है। प्रतिदिन लगभग 30 मिनट 
नियमित व्यायाम प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है। यदि आप अपने बच्चे को 
हमेशा स्वस्थ रखना चाहती हैं ,तो उनमें व्यायाम करने की आदत डालें।
 उन्हें बाहर खेलने भेजने की बजाय आप उनके साथ व्यायाम करें और उन्हें प्रोत्साहित 
करें।  रोजाना लगभग 30 मिनट के लिए चलना, जोगिंग,  साइकिलिंग आदि पूरे 
परिवार के लिए अच्छा व्यायाम है ।इसके अलावा बच्चे की पसंद की गतिविधियां 
जैसे स्विमिंग आदि भी की जा सकती है।


जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक हैं हानिकारक 

आज के समय में एंटीबायोटिक हमारे लिए बहुत उपयोगी है, लेकिन अनावश्यक 
एंटीबायोटिक  दवाओं के उपयोग से हमारे शरीर को नुकसान होता है ।एंटीबायोटिक 
दवाओं के अत्याधिक सेवन से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। क्योंकि 
यह अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के बैक्टीरिया को मार देता है। यह बैक्टीरिया 
एंटीबायोटिक प्रतिरोध होने के कारण किसी भी प्रकार के इलाज के प्रभाव की गति 
को धीमा कर देता है। बच्चों को सर्दी जुकाम आदि होने पर डॉक्टर से हमेशा 
एंटीबायोटिक दवा के लिए सलाह ना ले ।

प्यार व स्नेह है जरूरी 

बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए प्यार और इसने सबसे अधिक आवश्यक होता है ।
सकारात्मक भावनाएं बच्चे के प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाने में सहायता प्रदान 
करती हैं। बच्चों को तनावमुक्त रखकर हम उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत  
बना सकते हैं।

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