जिद्दी बच्चों को कैसे संभाले ?


बच्चों की शिक्षा उनके घर से ही प्रारंभ होती है और माता पिता उनके पहले शिक्षक होते हैं ।क्योंकि बच्चे अधिकतर समय अपने माता-पिता के साथ ही बिताते हैं ,तो वह बचपन में जो कुछ भी सीखते हैं, वह उन्हीं से सीखते हैं। ऐसे में सभी माता-पिता अपने बच्चों  को अच्छी परवरिश देना चाहते हैं, लेकिन कुछ कारणों से बच्चे चिड़चिड़ करने वाले और, जिद्दी स्वभाव के हो जाते हैं।

 जब बच्चे ज़िद करते हैं, तो वे किसी की बात नहीं सुनते हैं। माता-पिता के समझाने, बहलाने और दबाव डालने से भी कोई लाभ नहीं होता है और बच्चे अपना मनमाना बर्ताव करते हैं।


जिद्दी बच्चों को संभालने के लिए अधिक धैर्य व प्रयासों की आवश्यकता होती है। आपको अपने बच्चों के व्यवहार का सही प्रकार से अवलोकन करने व समझने की ज़रूरत है। बच्चों की ज़िद  को कम करने के लिए आपको उनके मनोविज्ञान को समझने की आवश्यकता है।


जिद्दी बच्चों का मनोविज्ञान

जिद्दी बच्चों को संभालने के लिए आपको यह बात जानना अत्यंत आवश्यक है कि उनकी ज़िद के पीछे का क्या कारण है ।आपको इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए की  जिद्दी होने में और दृढ़ निश्चय होने में अंतर होता है। दृढ़ निश्चय बच्चे भी जिद्दी बच्चों की तरह अपने कार्य को करने का हर संभव प्रयास करते हैं और हर काम स्वयं करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह जिद्दी हो गए हैं या बिगड़ गए हैं।

जिद्दी बच्चों को समझने के लिए आपको उनके मनोविज्ञान को समझना आवश्यक है।

 (1) बच्चे अपनी ज़िद ज्यादातर अपनी मां के सामने ही करते हैं। घर के बाहर ,जहां ज्यादा लोग हो या मेहमानों के सामने बच्चे ज्यादा ज़िद करते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है कि माता-पिता लोगों के सामने उनकी ज़िदको पूरा करेंगे।
ऐसे में आप को बच्चों के मनोविज्ञान को समझकर ही प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

(2) बच्चे अपनी पिछली हरकतों और आपकी प्रतिक्रिया को सोचकर ही ज़िद करते हैं। बच्चे मन ही मन सोच लेते हैं कि उनके किस प्रकार के व्यवहार पर उनके माता-पिता की किस प्रकार की प्रक्रिया होगी। 

(3)आपको अपने बच्चों पर छोटी-छोटी बातों पर चिल्लाना या गुस्सा नहीं करना चाहिए। आपके ऐसा करने से वे चिड़चिड़े हो जाएंगे और आपको परेशान करने के लिए और अपनी ज़िद को पूरा करने के लिए वह यह हरकतें दोबारा कर सकते हैं।

(4)बच्चों की गलतियों पर चिल्लाने और डांटने की बजाय आपको उन्हें शांति से बैठाकर समझाना चाहिए।

(5) बच्चों के अच्छे कामों व व्यवहारों की तारीफ करने से बच्चों को खुशी मिलती है और उन्हें अच्छे कामों को करने का प्रोत्साहन मिलता है ,जिससे वे धीरे-धीरे ज़िद करना कम कर देते हैं।

बच्चों की ज़िद

जब बच्चे चिड़चिड़े  हो जाते हैं तो वह हर बात पर ज़िद करते हैं ।कभी बच्चे खाना न खाने की ज़िद ,तो कभी पढ़ाई न करने की ,तो कभी खेलने की ज़िद ,नए कपड़ों की ज़िद करने लगते हैं ।अगर बच्चों की एक ज़िद पूरी कर दी जाए तो वह कोई दूसरी ज़िद पकड़ कर बैठ जाते हैं। 

आइए जानते हैं कि बच्चे किस किस प्रकार की ज़िद करते हैं:-
मोबाइल की ज़िद 

आजकल हर दूसरे बच्चे को मोबाइल की लत है। बच्चे जब भी बड़ों को मोबाइल का प्रयोग करते हुए देखते हैं,तो वह भी मोबाइल लेने के लिए ज़िद  करने लगते हैं। बच्चे अपनी ज़िद को पूरा करने के लिए रोते हैं, चिल्लाते हैं ।लेकिन आपको उन्हें मोबाइल नहीं देना चाहिए ,यदि आप उन्हें शांत करने के लिए थोड़ी देर के लिए भी मोबाइल दे देते हैं, तो उनकी ज़िद करने की आदत और बढ़ जाती है।

खाना ना खाने की ज़िद

 बच्चे अक्सर खाना न खाने की ज़िद करते है और खाने की जगह जंक फूड या चॉकलेट आदि बाहर का सामान  मांगते हैं।

नए खिलौनों की ज़िद

 बच्चे अक्सर अपने दोस्तों को या टीवी के विज्ञापनों को देखकर नए खिलौने की ज़िद करते हैं। ऐसे में आप उन्हें महंगे खिलौने लाकर देने की बजाय पढ़ाई व उनके मस्तिष्क के विकास से संबंधित खिलौने जैसे शतरंज आदि ला कर दें ।

पढ़ाई न करने की ज़िद

 बच्चे अक्सर होमवर्क न करने के बहाने ढूंढते हैं और पढ़ाई से भागने की कोशिश करते हैं। ऐसे में आपको इस बात का कारण पता लगाना चाहिए कि बच्चे ऐसा क्यों कर रहे हैं और उनका मन  पढ़ाई में क्यों नहीं लग रहा है।

पैसे मांगने की ज़िद 

 चिप्स, चॉकलेट, बिस्किट आदि खाने के लिए बच्चे अक्सर घर में पैसे मांगते हैं। ऐसे में आपको उन्हें पैसे देने की बजाय उन्हें वह चीज़ स्वयं ला कर देनी चाहिए। पैसे देने से बच्चे रोज ज़िद  करने लगते हैं।



जिद्दी बच्चों की आम समस्याएं 

बच्चों का थोड़ा बहुत ज़िद करना सामान्य है। यह समस्या समय के साथ अपने आप दूर हो जाती है। लेकिन अगर आपका बच्चा लंबे समय से ज़िद करता है, तो यह उसकी आदत बन जाती है। ऐसे में आपको उस पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए आपको जिद्दी बच्चों की समस्याओं को समझने की ज़रूरत है।

जिद्दी बच्चों को खाना कैसे खिलाएं

 जिद्दी बच्चों को खाना खिलाना बहुत ही मुश्किल काम होता है। बच्चे खाने की थाली देखकर मुंह बनाने लगते हैं और कुछ दूसरा खाने की ज़िद करते हैं ।

ऐसे में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

(1) बच्चों को जो भी हेल्दी चीजें पसंद हो ,उन्हें वही खाने को दें।
(2) खाने की थाली को आकर्षित ढंग से परोसे जिससे बच्चे खुद ही खाना खाने के लिए आगे बढ़े।
(3) बच्चों की थाली को रंग-बिरंगे और अलग-अलग आकार के खाद्य पदार्थों के साथ परोसें।
(4) जब बच्चा खाना खाने से मना करें, तो उन्हें खाने के स्वाद के बारे में बताएं और थोड़ा थोड़ा खाना खिलाएं । 
(5) आपने जो भी बनाया है, उसका थोड़ा हिस्सा ही परोसे। बहुत ज्यादा खाना देखकर बच्चे नखरे करते हैं।
(6) जब बच्चे पूरा खाना खत्म कर लें, तो उन्हें इनाम में उनकी मनपसंद मिठाई दें सकती हैं।


 जिद्दी बच्चों को कैसे सुलाये 

(1) जिद्दी बच्चे अक्सर सोने में बहुत नखरे करते हैं ।आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे ठीक से खेलें और सभी प्रकार की गतिविधियां करें क्योंकि इससे बच्चे थक जाएंगे और आराम से सो जाएंगे।
(2) बच्चों के लिये सोने के समय का नियम बनाना भी ज़रूरी है ।
(3) आप को बच्चों को सुलाते समय ज्यादा सख्ती नहीं करनी चाहिए।
(4) उन्हें आराम से बेड पर लेट कर ,उन्होंने पूरा दिन क्या-क्या किया और उन्हें सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगा ऐसी बातें करें।
(5) बच्चों को सुलाने के लिए आप अच्छा संगीत भी बजा सकती हैं।


बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग कैसे दें ?

 (1) जब बच्चे ज़िद्दी होते हैं, तो उन्हें पॉटी ट्रेनिंग देना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आप अपने 2- 3 साल के बच्चे को धैर्य के साथ, बिना गुस्सा किए टॉयलेट का प्रयोग करना सिखाएँ।
(2) बच्चे को समझाएं कि टॉयलेट सीट का किसलिए और कैसे उपयोग किया जाता है।
(3) बच्चे को पॉटी के समय टॉयलेट सीट पर कैसे बैठना है यह समझाएं ।
(4) अगर आपका बच्चा ज्यादा ज़िद करें तो उसे डांटने की बजाए कुछ समय बाद ट्रेनिंग दें।


ज़िद्दी  बच्चों  को कैसे पढ़ाएँ 

(1) ज़िद्दी बच्चों को पढ़ाई कराने के लिए सबसे पहले उन्हें बताएं कि पढ़ाई का जीवन में क्या महत्व है और उन्हें भविष्य में हर क्षेत्र में किस प्रकार मदद मिलेगी।
(2) घर में पढ़ाई करने का शांत माहौल बनाए और बच्चों के पढ़ने का समय निर्धारित करें।
 (3) उन्हें अपने साथ में बिठाकर पढ़ायें और पढ़ाई में आने वाली समस्याओं को हल करें ।
(4) बच्चों को रंग-बिरंगे ब्लॉक्स आदि लाकर दें । 
(5) अच्छा प्रदर्शन करने पर बच्चों को इनाम दें ।


 जिद्दी बच्चों को सजा कैसे दें

बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए बच्चों को अनुशासन में रखना ज़रूरी है और उन्हें अनुशासित रखने के लिए नियम बनाना भी ज़रूरी है। बच्चों को उनकी गलतियों के लिए दंड देना आवश्यक है, लेकिन सज़ा उनकी गलतियों और जीत के मुताबिक ही होनी चाहिए। आप को बच्चों को यह बताना चाहिए कि उनकी गलतियों के क्या परिणाम हो सकते हैं ।बच्चों को सज़ा  देने का मतलब यह नहीं है कि आप उन पर चिल्लाए,डांटे या उनकी पिटाई करें। बच्चों को सज़ा देने से वे यह समझ जाते हैं कि ज़िद करना गलत है।

 कपड़ों को लेकर  ज़िद 

बच्चे अक्सर ऐसे कपड़े पहनने के लिए ज़िद करते हैं जो कि समय,अवसर या मौसम के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं। ऐसे में अलमारी में कपड़ों की जगह एक दो हफ्तों में बदलती रहे हैं और उन्हें मौसम के अनुसार हटाते  रहें। इसके बच्चे की ज़िद थोड़ी कम हो जाएगी।

 उन्हें कभी कभी खुद से कपड़े चुनने का मौका दें ,इस प्रकार बच्चा खुश रहेगा और ज़िद नहीं करेगा।


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