बच्चों की मालिश करने के क्या लाभ हैं?-Benefits of child's Massage

बच्चों की मालिश करने के क्या लाभ हैं?

नवजात शिशु बहुत ही नाज़ुक होते हैं इसलिए उनका ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है। शिशु के स्वास्थ्य के लिए जितना ज़रूरी मां का दूध होता है उतनी ही ज़रूरी होती है उनकी नियमित रूप से मालिश । मालिश आपके लिए अपने बच्चे के प्रति प्यार ज़ाहिर करने का और उनकी देखभाल करने का अच्छा तरीका है। मालिश आपके शिशु को आराम पहुंचता है और यह अच्छी नींद लाने में भी सहायक हैं।

 भारत में शिशु की मालिश बहुत समय पहले से ही होती आ रही है और इसके साथ ही डॉक्टर भी शिशु की मालिश करने की सलाह देते हैं ।नवजात शिशु की मालिश  ज्यादातर मां या घर में कोई अन्य बड़ा सदस्य करता है ।आजकल लोग विशेषकर बच्चों की मालिश के लिए किसी महिला को भी नियुक्त करते हैं।

बच्चों की मालिश करने के लिए तेल या लोशन का प्रयोग करके शिशुओं की त्वचा को हाथों से धीरे-धीरे से सहला या जाता है।इसमें धीरे-धीरे बच्चों के पैरों, हाथों, कलाई ,टखने और उंगलियों को सहलाया जाता है। इसके साथ ही बच्चों से प्यार से धीरे-धीरे बात करने या कोई गाना गुनगुनाने से बच्चों बच्चे इस गतिविधि में ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। साथ ही अभिभावक और शिशु के बीच बेहतर तालमेल भी बनता है।

 बच्चों की मालिश करने से क्या लाभ होते हैं?

 मालिश शिशु के लिए बहुत ही लाभदायक होती है। प्रत्येक मां को शिशु की प्रतिदिन मालिश अवश्य करनी चाहिए। रोज़ाना मालिश करने से कई फायदे मिलते हैं :-

बच्चे रहते हैं शांत

 जब बच्चों को नींद लगी होती है या किसी और कारण से भी वे चिड़चिड़ा जाते हैं ,उस समय उनकी मालिश करने से बच्चे शांत हो जाते हैं । जब आप हल्के हाथों से बच्चों की मालिश करती हैं तो बच्चों के शरीर में अच्छे हार्मोन का स्राव होता है और इससे उनका चिड़चिड़ापन कम हो जाता है।

बच्चों की नींद अच्छी आती है

 मालिश बच्चों की नींद के लिए बहुत अच्छी है।सोने से पहले बच्चों की मालिश करने से बच्चों के शरीर में मेलाटोनिन उत्पन्न होता है जो कि नींद के लिए ज़रूरी माना गया है।

मानसिक शारीरिक व सामाजिक विकास में सहायक

 शिशु के नियमित रूप से मालिश करने से उसका मानसिक ,शारीरिक  व सामाजिक विकास तेज़ी से होता है। अध्ययनों में पता चला है कि बच्चों को किया गया स्पर्श उनके मानसिक व सामाजिक विकास पर प्रभाव डालता है।मालिश करने से बच्चों की मांसपेशियां मज़बूत  होती हैं जिससे उनका शारीरिक विकास तेज़ी से होता है।

रक्त संचार व पाचन में सहायक

मालिश से शिशु का पाचन व रक्त संचार ठीक रहता है और साथ ही श्वसन संबंधी फायदे भी होते हैं। इसके अलावा शिशु की मालिश करने से गैस व कब्ज जैसी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।

 शिशु की मांसपेशियों को आराम मिलता है

शिशु की प्रतिदिन मालिश करने से शिशु की मांसपेशियों को आराम मिलता है जोकि उसके शारीरिक विकास में सहायक है।

  तंत्रिका तंत्र उत्तेजित करता है

मालिश करने से शिशु का तंत्रिका तंत्र उत्तेजित होता है और साथ ही मांसपेशियों के तालमेल में भी सुधार होता है।

दांत निकलने पर दर्द को कम करने में सहायक

बच्चे अक्सर दांत निकलने पर होने वाले दर्द व असहजता से परेशान रहते हैं। ऐसे में उनके चेहरे पर कुछ विशेष तरीको से मालिश करने से  endorphin नामक हार्मोन का स्राव होता है जो कि शरीर में प्राकृतिक रूप से दर्द निवारक  के लिए ज़रूरी है। साथ ही मालिश करने से cartisol, तनाव हार्मोन, का स्तर भी कम होता है।
   
वज़न बढ़ाने में सहायक 

शिशुओं की प्रतिदिन मालिश करने से उनके शरीर में वृद्धि हार्मोन का स्त्राव बढ़ता है जो कि बच्चों का वज़न  बढ़ाने के लिए आवश्यक है।

अभिभावक व शिशुओं के बीच बेहतर तालमेल

अध्ययनों में पता चला है कि बच्चे को किया गया स्पर्श उनके विकास पर प्रभाव डालता है। जब माता-पिता बच्चों की मालिश करते हैं और साथ ही उनसे बात करते हैं तो ऐसे में उनकी बच्चों के साथ अच्छी bonding बन जाती है।


प्रीमेच्योर बच्चों के लिए लाभदायक 

समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में मालिश उनके वज़न को  बढ़ाने, रक्तचाप ठीक करने, तंत्रिका तंत्र को सुधारने, तनाव व दर्द से दूर रखने में सहायक है।

पीलिया से उबरने में सहायक

 शोध में पाया गया है कि जो बच्चे जन्म के समय पीलिया से ग्रस्त होते हैं उनकी प्रतिदिन मालिश करने से भी जल्दी ठीक हो जाते हैं।

 प्रसव के बाद अवसाद से उबरने में सहायक

बच्चों की मालिश करने से मां और बच्चे के बीच प्यार बढ़ता है। यही कारण है कि मालिश से अपने बच्चों के साथ समय बिताकर मां को प्रसव के बाद होने वाले अवसाद के साथ से लड़ने में सहायता मिलती है।

आप शिशु के जन्म के 15 से 20 दिन के बाद से उनकी मालिश शुरू कर सकती हैं शिशु की मालिश को अपने प्रतिदिन की दिनचर्या में शामिल करें।


      बच्चों की मालिश के लिए तेल :-

 बच्चों की मालिश के लिए सही तेल का चुनाव करना ज़रूरी है आइए जानते हैं कि आप कौन कौन से तेल अपने शिशु की मालिश के लिए प्रयोग कर सकती हैं

नारियल तेल -
इस तेल से आप सर्दी व गर्मी दोनों में ने बच्चों की मालिश कर सकती हैं।
 इससे आपके बच्चे की त्वचा में नमी आती है और त्वचा कोमल और मुलायम रहती है।

 जैतून का तेल -
 जैतून के तेल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह तेल त्वचा के लिए बहुत ही अच्छा होता है। इसके विभिन्न चिकित्सकीय लाभों के कारण इस तेल को liquid gold भी कहा जाता है।

तिल का तेल -
 तिल का तेल भी बच्चों की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है ,यह आपको आसानी से बाजार में मिल जाएगा।

 सनफ्लावर ऑयल -
यदि आपके बच्चे की त्वचा संवेदनशील है तो आप मालिश के लिए सनफ्लावर ऑयल का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें विटामिन ई और कई फैटी एसिड होते हैं जो कि बच्चों की त्वचा को पोषण देते हैं।

बादाम का तेल :-
बादाम के तेल में विटामिन, फैटी एसिड, प्रोटीन, पोटैशियम, जिंक, कैल्शियम आदि ज़रूरी पोषक तत्व होते हैं ,जिनसे रक्त संचार में सहायता मिलती है और त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।

मालिश करते समय कुछ ध्यान रखने योग्य बातें :-

*शिशु की मालिश को अपने प्रतिदिन की दिनचर्या में शामिल करें और प्रतिदिन एक निश्चित समय पर ही उनकी मालिश करें।
*शिशु की मालिश करने के लिए घर में ऐसी जगह पर चुनाव करें जो आपके व आपके बच्चे दोनों के लिए आरामदायक हो।
*छोटे बच्चे बहुत ही नाज़ुक होते हैं इसलिए ध्यान से उनकी मालिश करें और मालिश करते हुए हाथों पर ज्यादा जोर न दे इससे बच्चों को चोट लग सकती है।
*बच्चों की मालिश के लिए वही तेल प्रयोग करें जो कि उनके लिए ठीक हो।
*मालिश करने के 20 मिनट बाद आप बच्चे को गुनगुने पानी से नहला सकती हैं।
*अगर बच्चे को सोने में परेशानी होती है तो आप रात में के समय भी बच्चे की मालिश कर सकते हैं इससे उन्हें अच्छी नींद आएगी।
*बच्चों की मालिश करते समय उनकी नाक व कान में तेल ना डालें,इससे इंफेक्शन का खतरा हो सकता है।
*नन्हे शिशु की मालिश करने में ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि वे बहुत नाज़ुक होते हैं। ऐसे में उन्हें ठीक से लेटाना और सही प्रेशर देते हुए मालिश करना बहुत ज़रूरी है।

मालिश करने से बच्चों को नुकसान नहीं होता पर ज़रूरी है कि बच्चों की मालिश सही तरीके से की जाए।

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