बच्चों को शिष्टाचार सिखाना क्यों आवश्यक है ?

शिष्टाचार जो दो शब्दों 'श्रेष्ठ 'और 'आचार ' के मेल से बना है। जिसका अर्थ होता है विनम्रता और शालीनता पूर्ण आचरण। विनम्रता, सद्भावना और प्यार से परिपूर्ण व्यवहार ही दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। हमें समाज में सभ्य और सामान्य ढंग से रहने के लिए शिष्टाचार की आवश्यकता होती है। अच्छे आचरण और सामाजिक मूल्य बहुत ही आवश्यक जीवन कौशल हैं,जो कि व्यक्ति के व्यक्तिगत, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। इसके लिए हमें शिष्टाचार के नियमों का स्वयं भी अच्छे से पालन करना चाहिए और अपने बच्चों से भी करवाना चाहिए। हमें बच्चों को शुरूवात से ही शिष्टाचार सिखाने चाहिए क्योंकि छोटी आयु में बच्चे नई नई चीजें बहुत जल्दी सीख जाते हैं। बड़ों की तुलना में बच्चे चीजों को तेज़ी  से सीखते हैं।

 शिष्टाचार के साथ एक बच्चा बड़ा होकर मज़बूत सामाजिक कौशल वाला विश्वसनीय और सम्मानजनक व्यक्ति बनता है। बच्चे अपने  बड़ों से ही सीखते हैं कि उन्हें एक अच्छा व्यक्ति कैसे बनना चाहिए। इसलिए यह ज़रूरी है कि आप बच्चों के सामने अच्छा व्यवहार करें ,बच्चे आपको देखकर सीख सकें। बच्चों को उनकी आयु के अनुसार शिष्टाचार सिखाएँ जाने चाहिए। घर पर धीरे-धीरे इनका अभ्यास करने की कोशिश करें और कुछ दिनों बाद आपके बच्चों में परिवर्तन देखने को मिलेगा।


 बच्चों को शिष्टाचार सिखाना क्यों आवश्यक है ?

 जब बच्चे शिष्टाचार सीखते हैं तो वे अपने अच्छे आचरण से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। आइए जानते हैं कि बच्चों में शिष्टाचार होना क्यों आवश्यक है -

 1- खुशी मिलती है :-
 आपने यह स्वयं भी महसूस किया हुआ कि आप जब भी कुछ अच्छा करते हैं तो आपको बहुत खुशी मिलती है ।इसी प्रकार जब बच्चों को उनके अच्छे आचरण के लिए लोगों द्वारा प्रशंसा मिलती है ,तो बच्चे को खुशी और संतुष्टि मिलती है। इस प्रकार  वे अपनी अच्छी आदतों को अपने व्यवहार में शामिल कर लेते हैं।

 2- आत्मविश्वास में वृद्धि:-

 जब बच्चों को उनके अच्छे आचरण के कारण दूसरों से प्रशंसा मिलती है तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है।

3- सामाजिक जीवन में सुधार :-
 
आपने सुना होगा कि हम जैसा व्यवहार करते हैं उसी प्रकार की संगत के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसी प्रकार बच्चों के साथ भी होता है जो बच्चे ज़िद्दी और अशिष्ट होते हैं ,उनकी संगत बुरी होती है और वहीं दूसरी ओर अच्छे आचरण वह बातचीत वाली बच्चों की संगत अच्छी होती है ।

4- बेहतर अवसर मिलते हैं :-

अच्छे आचरण वाले बच्चे हमेशा ही सभी लोगों को पसंद होते हैं। ऐसे बच्चों को स्कूल व कैरियर में अच्छे व बेहतर अवसर मिलते हैं। सभ्य व शिष्ट आचरण वाले लोग को नौकरी जल्दी मिलती है और वे अपने करियर में बहुत तेज़ी से आगे बढ़ते हैं।



 बच्चों को सिखाएं जाने वाले शिष्टाचार :-
 
1-बच्चों को हेलो और बाय कहना सिखाएं -
 बच्चों को सबसे पहले हेलो और बाय बोलना सीखते हैं। उन्हें सही अवसर पर यह कहने के लिए प्रोत्साहित करें और बताएं कि क्या बोलना है।

2-कृपया और धन्यवाद बोलना सिखाए -
जैसे-जसे बच्चे दूसरे शब्द बोलने लगें तो उन्हें प्लीज और थैंक्यू जैसे शब्दों को बोलना और प्रयोग करना सिखाएँ । जब बच्चे आपको कोई चीज़  दें तो आप उन्हें थैंक यू बोलें । इससे वे शब्द को समझने लगेंगे और स्वयं भी इसे कहने का प्रयास करेंगे।

3- खाना खाने का तरीका सिखाएं -
 बच्चों को खाना खाने के तौर-तरीकों को समझाएं ।उन्हें बताएं कि खाना खाते चबाते समय मुंह बंद करके खाना चाहिए। उन्हें बताएं कि थोड़ी मात्रा में खाना खाएं और छोटे छोटे कौर बनाकर खाएं और जब भी वह खाना खा रहे हो तो खाने को अच्छी तरह से चबाकर खाएं। खाना खाते समय बात ना करें। बच्चे अक्सर खाना देखकर मुंह बनाते हैं और खाना नहीं खाते। ऐसे में उन्हें बताएं कि भोजन हमारे शरीर के लिए क्यों ज़रूरी है।

 4- माफी मांगना सिखाएं -
जब बच्चे 3 या 4 साल के हो जाते हैं तो उन्हें अच्छे और बुरे में फर्क करना आ जाता है। ऐसे में आप का उन्हें यह सिखाना ज़रूरी है कि जब भी उनसे कोई गलती हो जाए तो सामने वाला व्यक्ति से वह माफी मांगे।

 5- अभिवादन करना सिखाए-
 बच्चों को सिखाएं कि दूसरों का अभिवादन किस प्रकार किया जाता है। उन्हें हेलो। गुड मॉर्निंग। नमस्ते आदि बोलना सिखाएँ ।

6- कुछ भी लेने से पहले पूछना , बच्चों को सिखाएं-
  दूसरों की कोई भी चीज़ लेने आने से पहले उनसे पूछना ज़रूरी होता है ,चाहे वह चीज़ उसके दोस्त, माता-पिता या रिश्तेदारों की हो।साथ ही उन्हें वह चीज़ वापस करें तो थैंक यू ज़रूर बोलें। 

7-खांसते या छींकते समय बच्चों को मुंह ढकना सिखाएं-
बच्चों को सिखाएं की जब भी उन्हें खाँसी या छींक आए तो उन्हें अपने मुंह को ढाकना चाहिए।यह सिर्फ एक अच्छी आदत नहीं है बल्कि स्वच्छता का भी एक भाग है।

 8-बच्चों को दयालुता और दूसरों की मदद करना सिखाएँ -
 बच्चों को दूसरों की मदद करना व लोगों के प्रति दयालु बनना सिखाएँ । वे जब भी किसी विकलांग व्यक्ति को देखे या उनके बारे में पूछें तो उन्हें बताएं कि विकलांग व्यक्ति भी अन्य लोगों की तरह ही होते हैं और उनके साथ भी उन्हें वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसे कि वह दूसरों के साथ करते हैं।

 9-बच्चों को अच्छा मेहमान बनना सिखाएं-
 उन्हें बताएं कि जब भी वे किसी के घर जाएँ तो उन्हें कैसा व्यवहार करना चाहिए और उन्हें ज़िद और शैतानी नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही यदि कोई मेहमान घर पर आए तो उसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ये भी बताएं।

 10-अच्छी तरह बात करना सिखाएँ -   
 बच्चों को बताएं की बात करते समय चीखें चिल्लाए या गुस्सा ना करें ।यह बात करने का सही तरीका नहीं है अपनी बात को आराम से व प्यार से कहना चाहिए। जब भी कोई दूसरा बात कर रहा हो तो उसकी बात पूरी होने का इंतजार करें और फिर अपनी बात को रखना चाहिए।

 इसी प्रकार ऐसे बहुत से शिष्टाचार है जो आप अपने बच्चों को सिखा सकती हैं। जैसे- दूसरों का मज़ाक़ न उड़ाना, बड़ों का सम्मान करना, चीज़ें दूसरों के साथ बांट कर खाना, ईमानदारी , गलत भाषा का प्रयोग न करना।

 बच्चों को शिष्टाचार कैसे सिखाएं  ?

अब तक हमने जाना कि ऐसे कौन-कौन से शिष्टाचार हैं जो हमें अपने बच्चों को सिखाने चाहिए। अब हम जानेंगे कि बच्चों में इन अच्छी आदतों को हम किस प्रकार से ला सकते हैं क्योंकि एक माता-पिता होने के कारण या हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम उनमें अच्छी आदतों का विकास करें।
 *सबसे पहली तथा महत्वपूर्ण बात है कि जब तक आप स्वयं उन आदतों को नहीं अपनाएंगे तब तक आपके बच्चे यह सब नहीं सीख पाएंगे *जब भी आपका बच्चा कुछ अच्छा करें ,तो उसकी सराहना करें यदि आपका बच्चा कुछ गलत करें तो उसे डांटने की बजाय उसे  वहीं उसी समय सुधारने का प्रयास करें। इसी प्रकार जब बच्चे शैतानी करें या आपको तंग करें  तो उन्हें प्यार से समझाएं डाँटे नहीं।
* बच्चों को सब कुछ एक ही बार में सिखाने की कोशिश ना करें। बच्चों को धीरे धीरे अभ्यास करने देें।
* बच्चों को यह सभी चीजें एक मज़ेदार ढंग में सिखाएं। इससे बच्चे की उत्सुकता बढ़ेगी और वह जल्दी से सीखेंगे।
* यदि आप बच्चे का किसी भी प्रकार का बुरा बर्ताव देखें तो वह यह सब कहां से सीख रहा है पहले यह पता लगाने की कोशिश करें।

 सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आपको धैर्य रखना पड़ेगा आप अपने बच्चे को एकदम से अच्छा इंसान नहीं बना सकती और न ही आपको अपने विचार उन पर थोपना नहीं चाहिए।
  आपको धैर्य रखना है और धीरे-धीरे उनका मार्गदर्शन करते हुए उन्हें एक ऐसा अच्छा इंसान बनाना है जिन पर आप गर्व कर सके।

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