क्यों आवश्यक है बच्चों को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाना? (Why it is important to make a child independent?)

क्यों आवश्यक है बच्चों को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाना?

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर स्वतंत्र व आत्मनिर्भर बने। जब बच्चा छोटा होता है तो वह पूरी तरह से अपने माता-पिता पर ही निर्भर रहता है, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होने लगता है ,वह आत्मनिर्भर होने लगता है और अपने कुछ काम स्वयं करने की कोशिश करता है ।लेकिन वह अभी भी प्यार, संरक्षण और मार्गदर्शन के लिए माता-पिता पर भी निर्भर रहता है।आप अक्सर देखते होंगे कि छोटे बच्चे हर काम अपने आप करने की ज़िद करते हैं।यह उनमें आत्म निर्भरता और स्वतंत्रता के गुण  को दर्शाता है। माता-पिता द्वारा उनके इस गुण को बढ़ावा देना बहुत ही आवश्यक है।

 स्वतंत्रता आपके बच्चों के विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है। स्वतंत्र होने का मतलब है कि हम अपने लिए स्वयं निर्णय लें और जिम्मेदारी को समझें। बच्चों के लिए इन चीजों को सीखना बहुत ही आवश्यक है ,जिससे कि वह भविष्य में प्रत्येक परिस्थिति का सामना अच्छे से कर सकें। ऐसे में यह आवश्यक है कि आप अपने बच्चे की आत्मनिर्भर बनने में सहायता करें। दो वर्ष की आयु से बच्चों में आत्मनिर्भरता की प्रवृत्ति आने लगती है। इस उम्र में आप को बच्चों को जीवन में कुछ आसान निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।


 बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना क्यों ज़रूरी है ?

 बच्चों को जीवन में सफल बनाने के लिए उन्हें स्वतंत्र व स्वावलंबी बनाना बहुत ही आवश्यक है। बच्चों में आत्मनिर्भरता का उनकी उम्र, योग्यता, परिस्थितियों के अनुसार ही आता है।
 आइए जानते हैं कि बच्चों को स्वतंत्र व आतमनिर्भर बनाना क्यों ज़रूरी है:-
1- इससे बच्चों में आत्मविश्वास आत्म सम्मान आदि गुणों का विकास होता है।
2-इससे बच्चे आत्मनिर्भर बनते हैं और अपने सभी कार्यों को स्वयं ही करने की कोशिश करते हैं।
3-यह बच्चों में महत्व और अपनेपन की भावना को बढ़ाता है जो कि सामाजिक संबंधों को बढ़ाने और दुनियाँ के लिए योगदान देने के लिए आवश्यक है।
4-इसमें बच्चों में जागरूकता और संवेदनशीलता के स्तर में वृद्धि होती है, जिससे कि वह अपने आसपास के लोगों की सहायता कर पाते हैं।
5-जब बच्चे आत्मनिर्भर होते हैं तो इससे वे आत्म प्रेरणा के विषय में सीखते हैं क्योंकि उनके पास कुछ भी प्राप्त करने के लिए कारणों को खोजने की स्वतंत्रता होती है।
6-यह बच्चों में एक प्रकार का विश्वास पैदा करता है कि वह हर प्रकार से सक्षम हैं और अपनी देखभाल स्वयं कर सकते हैं ,जिससे कि वे आने वाली चुनौतियों का अच्छे से सामना कर सकते हैं।
7-इससे बच्चों में  निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है क्योंकि उन्हें विभिन्न विकल्पों में से सबसे अच्छा विकल्प चुनने की स्वतंत्रता होती है।
8-इससे बच्चों में अन्य गुणों जैसे धैर्य, एकाग्रता, स्वयं की सहायता करना ,सहयोग, आत्मानुशासन आदि अति महत्वपूर्ण गुणों का विकास होता है।
9-इससे बच्चों को खुलकर जीवन जीने का और उससे बहुत ही आवश्यक चीजें सीखने का मौका मिलता है।
10- इससे बच्चे खुश और स्वस्थ रहते हैं क्योंकि उन्हें स्वयं किए गए कार्यों से उपलब्धियां और सफलता मिलती है।
11- जब उन्हें स्वयं कुछ करने का मौका मिलता है तो वह चीजों को अपने प्रयासों और गलतियों के कारण जल्दी सीख जाते हैं।
12- यदि बच्चों को स्वतंत्र होने का अवसर मिलता है तो वे तनाव और असफलता का सामना अच्छे से कर पाते हैं और नकारात्मक भावनाओं पर भी आसानी से काबू पाना सीख जाते हैं।


बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के तरीके:-

बच्चों में स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता का गुण होना आवश्यक है। बच्चों में यह गुण उनकी उम्र, योग्यता और परिस्थितियों के अनुसार ही आता है। ऐसा हो सकता है कि आप अपने बच्चे को इतनी जल्दी बड़े होने देना नहीं चाहते लेकिन स्वतंत्रता एक ऐसा गुण है ,जिससे उन्हें सीखने की ज़रूरत है। यदि वे इसे नहीं सीखते हैं तो हो सकता है कि उन्हें घृणा और विरोध की भावना, छोड़ दिए जाने की या अलग हो जाने की भावना आ जाए और उनके व्यवहार में अनुचित परिवर्तन आ जाए।
 आइए बच्चों में स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता की भावना को विकसित करने के कुछ तरीके जानते हैं:-

1-अपने बच्चों को साधारण निर्णय लेने की छूट दें। जैसे किस दिन बच्चों को कौन से कपड़े पहनने हैं ,इस बारे में उनकी राय लें। बच्चे अक्सर गलतियां करते हैं ,ऐसे में आप उनका सहयोग करें और उन गलतियों से सीखने में उनकी मदद करें।
2- बच्चों को घर के काम जैसे साफ-सफाई आदि में हाथ बटानें दे और काम के पूरा होने के बाद उनकी प्रशंसा करें।
3- बच्चों को बताएं कि आपको उनके विचारों को जानने में रुचि है और बच्चों से संबंधित चीजों में उनकी राय अवश्य लें।
4- बच्चों द्वारा लिए गए निर्णय का सम्मान करें ।
5-बच्चों की यह जानने में सहायता करें कि उन्होंने जो विकल्प चुने थे, उनका क्या परिणाम निकला है।
6- बच्चों को समस्या हल करने के कौशल दिखाएं और यह बताने के स्थान पर कि क्या करना है ,उन्हें बताएं कि वह समस्या को सुलझाने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं।


    स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता से बच्चे अपने कौशल को सुधारते हैं, सही व गलत सीखते हैं और अपने व्यक्तित्व और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करते हैं। इससे बच्चों को वह चुनाव करने का अवसर मिलता है, जिससे कि उन्हें खुशी होती है। इस प्रकार के वे मज़बूत बनते हैं, जीवन की चुनौतियों का सामना करते हैं और भावनात्मक रूप से सुरक्षित और खुश रहते हैं।

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