बच्चों के विकास में सामाजिक संदर्भ की भूमिका -


बच्चों के विकास में सामाजिक संदर्भ की क्या भूमिका है?


आपने अक्सर देखा होगा कि बच्चे अपने माता-पिता के भावों को देखकर कुछ घटनाओं व स्थितियों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया के लिए उपयोग करते हैं। जब वे कुछ नया करते हैं जैसे कोई नई वस्तु, व्यक्ति या किसी परिस्थिति में वे अपने माता-पिता के हावभाव को देखते हैं और सहमति मिलने पर ही उस चीज के संपर्क में आते हैं। इसे ही सामाजिक संदर्भ कहा जाता है। यह बच्चों को उनके आसपास व बाहरी दुनियाँ को अपने संरक्षक के संकेतों पर एक सुरक्षित ढंग से पता लगाने में मदद करती है। यदि आप सामाजिक संदर्भ मनोविज्ञान (social referencing psychology) के बारे में जान ले कि ये बच्चों में किस प्रकार कार्य करता है तो आप अपने बच्चे की परवरिश और भी अच्छे से कर पाएंगी।

 सामाजिक संदर्भ का क्या अर्थ है ?

सामाजिक संदर्भ मनोविज्ञान की परिभाषा के अनुसार, यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा शिशु अपने माता-पिता व देखभाल करने वालों के भावात्मक प्रदर्शन को देखकर अपनी प्रतिक्रियाओं को बनाते हैं और अन्य लोगों और वस्तुओं पर कुछ घटनाओं और स्थितियों के अनुसार उनके प्रति अपने व्यवहार को समायोजित करते हैं। वयस्कों को यह भाव प्रदर्शन उनके चेहरे के हाव भाव उनके बोलने के तरीके व शारीरिक भाषा(body language) के माध्यम से हो सकता है।

8 से 10 माह के बच्चे दूसरे व्यक्तियों के चेहरे के हाव भाव को देखकर इस बात का निर्णय लेते हैं कि उन्हें क्या करना है। यदि बच्चा अपनी मां के चेहरे पर डर या गुस्से का भाव देखता है तो हो सकता है कि वह उस काम को ना करें। इसी प्रकार यदि वह उत्साहित और खुश भाव देखता है तो वह कार्य को आसानी से व ख़ुशी मन से करता है।

 माता पिता के बच्चों के प्रति इस प्रकार के सामाजिक भाव उनके बच्चों की परवरिश के लिए बहुत आम है और उसे प्रभावित करते हैं। सामाजिक संदर्भ के कई अलग-अलग रूप जैसे- चेहरे के हावभाव, संकेतों से लेकर कुछ मुख्य भावात्मक घटनाओं तक हो सकते हैं। जब बच्चे बहुत छोटे होते हैं तो वे बहुत मासूम होते हैं और बहुत ही जल्दी किसी भी बात से प्रभावित हो सकते हैं। उन्हें यह नहीं पता होता है कि किसी परिस्थिति में उन्हें अपने भावों को किस प्रकार से महसूस और व्यक्त करना चाहिए ऐसे समय में सामाजिक संदर्भ के माध्यम से अपने माता-पिता से उसकी स्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देना सीखते हैं। माता-पिता को बच्चों के सामने अपने अपने भावों को बहुत बड़ा चढ़ाकर नहीं दिखाना चाहिए क्योंकि ऐसे में बच्चे हर बात को लेकर अति सचेत हो जाते हैं। जबकि इसके विपरीत माता-पिता को ऐसी परवरिश करनी चाहिए जिससे कि बच्चे शांत स्वभाव के रहे, न कि अति संवेदनशील।

 बच्चों के जीवन में सामाजिक संदर्भ की भूमिका-

 जैसा कि आपने जाना कि सामाजिक संदर्भ के द्वारा बच्चे अपनी प्रतिक्रिया व दूसरों के प्रति व्यवहार को समायोजित करते हैं। संज्ञानात्मक कौशल और सामाजिक संदर्भ के विकास के बीच के संबंध पर अधिक शोध नहीं हुए हैं और न यह स्पष्ट हुआ है कि सामाजिक संदर्भ प्रत्येक बच्चे में किस प्रकार से भिन्न है। लेकिन शोधकर्ताओं द्वारा ऐसे कुछ तरीके बताए गए हैं ,जिनके द्वारा सामाजिक संदर्भ बच्चे के विकास को प्रभावित करता है।

1- सामाजिक संदर्भ आपके बच्चे के भावात्मक विकास का एक महत्वपूर्ण तत्व है। इसके द्वारा बच्चे विभिन्न प्रकार के भावों की अभिव्यक्ति और उनके अनुभव शब्द और ध्वनियां और साथ ही चीजों के समायोजन को भी सीखते हैं।

2-सामाजिक संदर्भ निर्णय लेने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और इससे आपके प्रयासों द्वारा बच्चों के आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। इस कार्यप्रणाली द्वारा आपके बच्चे की निर्णय लेने की क्षमता का आधार विकसित होता है।

3- सामाजिक संदर्भ द्वारा बच्चों में जटिल विचारों और भावों की अभिव्यक्ति के अर्थ को समझने की नींव पड़ती है। यह आवश्यक नहीं है कि बच्चों बच्चे यह गुण घर से ही सीखे, बाहरी सामाजिक वातावरण भी आपके बच्चे के विकास को बहुत हद तक प्रभावित करता है।

4- इससे शिशु को भी विभिन्न सकारात्मक व नकारात्मक अर्थ समझ में आने लगते हैं।
 
बच्चों के विकास के लिए सामाजिक संदर्भ का उपयोग :-

माता-पिता अपने बच्चे के बेहतर विकास के लिए सामाजिक संगठन का एक शिक्षण उपकरण की भांति प्रयोग कर सकते हैं। सामाजिक संदर्भ एक ऐसी प्रक्रिया है जो बच्चों के विकास के साथ चलती रहती है। आपकी भावनाएं हाव-भाव संकेत कार्य व पारिवारिक स्थितियां लगातार सामाजिक संदर्भ के रूप में कार्य करती रहती हैं। सामाजिक संदर्भ को समझकर और अपने व्यवहार को नियंत्रण में रखकर आप इसका प्रयोग अपने बच्चे के हित में कर सकती हैं। आइए जानते हैं कि इसका प्रयोग आप किस प्रकार से कर सकती हैं -

1-घर व बाहर दोनों ही स्थानों पर अपने बच्चों के साथ खेलते हुए या बातचीत करते हुए अपने चेहरे के हाव-भाव का प्रयोग करें। अपने हाव-भाव को उसी प्रकार दिखाएं जिस प्रकार का आप संदेश अपने बच्चों को देना चाहती हैं ,इसे देखकर बच्चे सही प्रकार से भावों को व्यक्त करना सीखेंगे।

2-आप बाहर दूसरों के साथ या अन्य सामाजिक परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करते हैं ,यह भी आपके बच्चे पर प्रभाव डालता है और बच्चे इससे सीखते भी हैं।

3-अगर आपकी आवाज़ आपके बात करने के तरीके से मेल नहीं खाती है तो इससे आपके बच्चे परेशानी में पड़ सकते हैं।

4-सामाजिक संदर्भ के द्वारा आप बच्चों को यह बताकर की क्या खाना सेहत के लिए अच्छा है और सही है उनमें अच्छी व स्वस्थ आदतों का विकास कर सकती हैं।

5-सामाजिक संदर्भ की उस समय महत्वूर्ण भूमिका होती है ,जब आपके बच्चे कोई गलत निर्णय ले रहे होते हैं।

6-आपका लोगों के प्रति व्यवहार घटनाएं व परिस्थितियां बच्चों पर बहुत अधिक प्रभाव डालती हैं इसलिए जितना हो सके सावधान और शांत रहें और कठिन समय व अत्याधिक दबाव में भी शांत रहने की कोशिश करें।

7- इसके साथ ही बच्चों को दुख दर्द के भावों को समझाना भी ज़रूरी होता है।

    सामाजिक संदर्भ सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के संकेत भावों से हो सकता है। जैसे जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उन पर नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का प्रभाव सकारात्मक प्रतिक्रिया से ज़्यादा होता है।
 सामाजिक संदर्भ की बच्चों के विकास में अहम भूमिका होती है आप सामाजिक संदर्भ के विषय में सीख कर व अपने हाव-भाव में परिवर्तन लाकर अपने बच्चों का भावनात्मक विकास अच्छे प्रकार से कर सकते हैं।

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