बच्चों को पोटी ट्रेनिंग कैसे दे? How to potty train a child in just 3 days

 बच्चों को बस 3 दिन में potty training कैसे दे?


बच्चों की अच्छी परवरिश करना माता पिता के लिए एक चुनौती के समान होता है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और संतुलित दिनचर्या का पालन कराने के लिए उन्हें कई बातें सिखाना आवश्यक होता है। इसी में से एक पॉटी ट्रेनिंग (शौच प्रशिक्षण) भी है। आप यह प्रशिक्षण स्वयं दे सकती हैं या इसके लिए किसी केयरटेकर की सहायता भी ले सकती हैं।

 शौच प्रशिक्षण (पोटी ट्रेनिंग) क्या है?

बच्चों को टॉयलेट का उपयोग सिखाने की प्रक्रिया को पॉटी ट्रेंनिंग कहा जाता है। पॉटी ट्रेंनिंग बच्चों को टॉयलेट और bowel control सिखाने की एक प्रक्रिया है। इसमें बच्चों को टॉयलेट सीट का प्रयोग करना सिखाया जाता है। इसमें बच्चों को उनके शरीर से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ जैसे मल, मूत्र आदि निकलने के संकेतों को समझाया जाता है।
बच्चों को डायपर की जगह टॉयलेट का उपयोग करना सिखाने की इस पूरी प्रक्रिया को potty training कहते हैं।

 बच्चों को पॉटी ट्रेंनिंग देने की सही उम्र:-

बच्चों को पॉटी ट्रेंनिंग देने से पहले आपका यह जानना आवश्यक है कि इस प्रशिक्षण के लिए बच्चे की कितनी आयु होनी चाहिए। किसी भी विशेषज्ञ द्वारा पॉटी ट्रेनिंग के लिए कोई आयु निर्धारित नहीं की गई है। पॉटी ट्रेनिंग के लिए बच्चे लगभग 18 महीने से 24 महीने के बीच तैयार हो जाते हैं। आप अपने बच्चे की पॉटी ट्रेंनिंग 1.8 वर्ष से 2 साल के बीच शुरू कर सकती हैं क्योंकि इस आयु में बच्चे स्वयं भी संकेत दे सकते हैं कि उन्हें डायपर को बदलने की आवश्यकता है।


बच्चों के पॉटी ट्रेनिंग शुरू करने के संकेत:-

1- बच्चे की पॉटी ट्रेंनिंग शुरू करने से पहले आपके अपने बच्चे में कुछ ऐसे संकेतों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जिससे यह पता चलता है कि वह इस प्रशिक्षण के लिए तैयार हैं। आइए जानते हैं कुछ संकेतो को जिनकी मदद से आप अपने बच्चों को पोटी ट्रेनिंग देने की योजना बना सकती हैं:-

2-यह प्रशिक्षण आप तब शुरू करें जब आपका बच्चा चलने लगे और कम से कम 5 मिनट के लिए एक स्थान पर चुपचाप बैठने लगे।

3-जब बच्चा डायपर के गीले होने पर चिड़चिड़ा होने लगे या फिर बोल कर अथवा हाव भाव से पॉटी आने के संकेत देने लगे तो यह पॉटी ट्रेंनिंग शुरू करने का अच्छा संकेत है।

 4-यदि बच्चा दूसरों की बाथरूम संबंधी आदतों में रुचि दिखाएं या फिर बड़ों की नकल करें तो यह सही समय है ,जब आप उससे टॉयलेट संबंधी आदतों के बारे में बता सकती हैं।

5-यदि आपका बच्चा लगभग 2 से 3 घंटों के दौरान या दिन में सोने के दौरान अपनी पैंट गीली नहीं करता है तो यह आपके बच्चे के लिए potty training की योजना बनाने में मदद कर सकता है।

 6-जब बच्चा खुद से अपने शारीरिक संकेतों को समझकर संकेत देने में सक्षम हो जाए।

 7-जब वह आपके छोटे छोटे निर्देशों को समझना व उनका पालन करना शुरू कर दे।

 3 दिन की पॉटी ट्रेनिंग के लिए कुछ आवश्यक बातें :-

 बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग के लिए तैयार करते समय आपको कुछ चीजों की आवश्यकता पड़ सकती है। जैसे कि पॉटी सीट, potty chair, gloves, toilet soap, toilet paper आदि। आप बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग देते समय gloves पहन कर रखें ताकि बच्चे संक्रमण से बचे रहें। पॉटी करने के बाद बच्चों में हाथ  धुलने की आदत डालें और उन्हें टॉयलेट सोप और टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल  करने का तरीका समझाएं। पॉटी करने के बाद बच्चे को पैंट पहनाना ज़रूरी होता है। इसके साथ ही आपको कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखना चाहिए और उन्हीं के मुताबिक तैयारी करनी चाहिए।

 पॉटी चेयर को अपने बच्चे के खेलने के स्थान के पास रखें ताकि वह उसे देखे। उन्हें कभी भी इस पर बैठने के लिए मजब  ना करें। पहले बच्चे को पूरी तरह से कपड़े पहने हुए पॉटी सीट पर बिठाए और जब बच्चा उस पर से उतरना चाहे तो उसे उतरने दे। जब वह आराम से उस पर बैठना शुरु कर दे, तो उसे बिना डायपर और पैंट के इस पर बैठने दें और उन्हें यह भी समझाएं की पॉटी जाने से पहले पैंट को कैसे उतारना है।

 3 दिन की पॉटी ट्रेनिंग के दौरान बच्चों को पैंट न पहनाए। बच्चों के लिए थोड़ी बड़ी टीशर्ट पहनाए जिससे कि उन्हें यह ना पता चले कि उन्हें डायपर या पैंट नहीं पहनी हुई है, नहीं तो वे असहज महसूस करेंगे। 3 दिन की पॉटी ट्रेंनिंग में बच्चों को बिल्कुल भी डांटे नहीं। वह शुरू में कुछ गलतियां करेंगे लेकिन यह बच्चों की ट्रेनिंग का हिस्सा है। यदि बच्चे पैंट गंदी कर देते हैं तो आप उन्हें डांटे नहीं बल्कि साधारण रूप से उन्हें प्रोत्साहित करें कि अगली बार वे पॉटी जाने के लिए टॉयलेट का इस्तेमाल प्रयोग करें।

 यदि आपका बच्चा पानी व जूस पीने के बाद भी टॉयलेट नहीं जाता तो आप उसे याद दिलाएं और टॉयलेट का प्रयोग करने को कहें।

 बच्चे को कुछ भी सिखाने के लिए उनका उत्साह बनाए रखना ज़रूरी होता है। इसके लिए आप कुछ पुरस्कार जैसे- रंग भरने की किताबें, स्टिकर्स, क्रेयॉन आदि दे सकती हैं, जब भी वह सही तरीके से टॉयलेट का प्रयोग करें।

 आइए जानते हैं कि 3 दिन में बच्चों को पॉटी ट्रेंनिंग कैसे दे दी जाती है:-

 इस ट्रेनिंग के लिए आपको अपने बच्चों के साथ घर में लगातार तीन दिन चाहिए होंगे। उसके लिए आप सप्ताह के अंत के दिन चुन सकती हैं ,क्योंकि यदि आप नौकरी करती हैं तो शनिवार रविवार को मिलाकर और आप चाहे तो 1 दिन की छुट्टी लेकर यह ट्रेनिंग आप अपने बच्चे को दे सकती हैं।

पहला दिन

जब आपका बच्चा सो कर उठे तो उसका डायपर हटा दें और दूसरा डायपर या  पैंट ना पहनाए। बच्चों को पहले दिन इसी प्रकार बिताने दें। इस तरह से बच्चे जान पाएंगे कि उन्हें टॉयलेट का प्रयोग कब करना है।
 अपने बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ जैसे पानी व जूस देते रहें और बच्चों से मिलने वाले संकेतों को समझें कि कब उसे पॉटी या टॉयलेट जाना है। जब भी आपको ऐसे संकेत मिले हैं ,तो उसे तुरंत बाथरूम में ले जाएं।

 बच्चे से हर 20 मिनट बाद पूछे कि उन्हें टॉयलेट का प्रयोग करना है या नहीं ऐसा करने के लिए आप टाइमर भी सेट कर सकती हैं। आप बच्चों के टॉयलेट प्रयोग करने का समय निर्धारित कर सकती है। जैसे- नाश्ता या खाना खाने से पहले, सोने के समय, खेलने के बाद। इससे यह आदत आपके बच्चे की दिनचर्या में शामिल हो जाएगी।

 दूसरा व तीसरा दिन

 इस प्रशिक्षण में दूसरे व तीसरे दिन की प्रक्रिया पहले दिन के समान ही रहती है। आप चाहे तो तीनों दिन अपने बच्चों के साथ घर में ही रह सकती हैं या दूसरे व तीसरे दिन बच्चों को लेकर बाहर भी जा सकती हैं। यदि आप बच्चों को लेकर बाहर खेलने के आसपास कहीं ले जाती हैं तो एक छोटी पोर्टेबल पॉटी और उसकी दूसरी पैंट  अपने साथ ले जाएं क्योंकि कई बच्चे सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों का प्रयोग करने से मना कर देते हैं। और अगर बच्चे पैंट में टॉयलेट कर दे तो वहीं उनकी पैंट बदल दें और उन्हें समझाएं कि उन्हें टॉयलेट के लिए बाथरूम का प्रयोग करना चाहिए।

 रात या दिन में सोते समय

 3 दिन की इस पॉटी ट्रेंनिंग के दौरान बच्चों को डायपर पहनाना है या नहीं आपकी अपनी सहमति पर निर्भर करता है। आप चाहे तो बच्चों को दिन में सोते समय पैंट व रात में डायपर पहना सकती हैं।

      अपने बच्चों को घर से बाहर जाते समय निर्धारित जगह पर पहुंचने पर टॉयलेट का प्रयोग करने को कहें। इसके साथ ही जब भी आप बच्चों को कहीं बाहर लेकर जाएं तो कुछ जोड़ी कपड़े अपने साथ ले जाएं।

 बच्चों के लिए बिना डायपर के रहना एक अलग अनुभव होता है और शुरुआती समय में बच्चे इसमें डर और असहजता में भी महसूस करते हैं। आपको ऐसे समय में शांत रहना है और अपने बच्चों का साथ देना है जिससे आप उन्हें यह प्रशिक्षण अच्छे से दे सकें। ऐसा हो सकता है कि शुरुआत में बच्चे कुछ गलतियां करें और यह प्रक्रिया ठीक से ना कर पाए लेकिन धीरे-धीरे इस प्रशिक्षण से वे टॉयलेट उपयोग करना अच्छे से सीख जाएंगे।

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