बच्चों को गेंद खेलने से लाभ - Benefits of ball playing for kids

बच्चों को गेंद खेलने से लाभ (फायदे):-

आपको बहुत कम ही ऐसे बच्चे मिलेंगे जो यह कहे कि वह गेंद से खेलना नहीं चाहते हैं। मतलब हर बच्चा गेंद को देख उसकी तरफ अपने आप ही खिंचा चला जाता है। चाहे वह उस गेंद को फेंक रहा हो, पकड़ रहा हो या फिर उसे पटक रहा हो। आप बच्चों की इन गतिविधियों को ध्यान से देखें तो पाएंगे कि उनकी इन सभी क्रियाओं में उन्हें भरपूर मजा आ रहा है, परंतु क्या आप जानते हैं कि अनजाने में वह अनेकों शारीरिक गतिविधियों को कर रहे हैं जिससे उनका  शारीरिक विकास बहुत तीव्र गति से हो रहा है।

खेल के साथ ही असाधारण गतिविधियों का समन्वय :-


   छोटी उम्र से ही गेंद से संबंधित खेलों को खेलने से उनका शरीर और दिमाग दोनों ही सक्रिय रहते हैं। साथ ही शरीर और दिमाग का अच्छा समन्वय भी दिखता है। शरीर का प्रत्येक अंग, प्रत्यंग और उपांग मस्तिष्क के आदेशों पर अपने को संचालित करते हैं। कैसे?

1-  हाथ का आंख के साथ तालमेल -


 गेंद को आंखों से देखते हुए उस दिशा में हाथ अपने आप ही जाकर उसे पकड़ने का प्रयास करने लगते हैं। शुरू में बच्चों के लिए यह अनुमान लगाना कठिन होता है परंतु अभ्यास हो जाने पर यह उतना ही आसान हो जाता है जितना कि उनके लिए ब्लॉक लगाना या डिब्बों में ढक्कन लगाना।

2-  पैरों का हाथ के साथ तालमेल-


 जिस दिशा में गेंद होती है और आंख उसे दिमाग को बताती है। हाथ जब उसे पकड़ने के लिए बढ़ते हैं तो पैर अपने आप हाथ को उसकी मंजिल पर पहुंचा देते हैं। यह सभी क्रियाएं अनायास ही मात्र गेंद से बच्चे के खेलने पर ही हो जाता है जिससे संपूर्ण शरीर गतिशील रहकर मांसपेशियां मजबूत बनने के साथ ही ध्यान को केंद्रित करना भी अपने आप बच्चों में विकसित हो जाता है।

 3- समय प्रबंधन :-


 गेंद को देख उस तक पहुंचने के समय का पूर्व में ही अनुमान लगा पैर उस दिशा की ओर अपनी गति निर्धारित कर बढ़ चलते हैं जिधर आंख उन्हें गेंद को दिखा देती है और हाथ गेंद के पास पहुंचते ही स्वयं लपक कर उसे पकड़ लेते हैं और यह सब बच्चों की गेंद के साथ बचपन से दोस्ती होने पर ही संभव है।

4- बल प्रबंधन -


 जब बच्चा गेंद हाथ में पकड़ लेता है तब मस्तिष्क के आदेश पर वह पुनः गेंद कहां से फेकनी है, देखता है और फिर तय करता है कि वह कितना बल यानी ताकत लगाकर उसे फेंके की गेंद अपनी जगह पहुंच जाए। इस सब काम में बच्चे कोई भी अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ता। यह अनायास ही उसकी गेंद खेलने और गेंद गतिविधियों से दोस्ती के कारण हो जाता है।
 

5- पूर्व नर्धारित लक्ष्य भेद प्रबंधन या गेंद से जुड़ी अपनी भविष्यवाणी को पूर्ण करने की क्षमता का विकास :-


 बच्चा जब गेंद को उठाता है, हाथ को घुमाता है और गेंद को लक्ष्य की तरफ फेंकने का प्रयास करता है तो पूर्व में ही मन ही मन लक्ष्य निर्धारित कर चुका होता है कि उसे गेंद किस जगह और किस कार्य की पूर्ति हेतु फेकनी है अर्थात वह मन के अंदर अपना लक्ष्य निर्धारित कर उसे पूरा करने की क्षमता का विकास अनायास ही गेंद के खेल से हो जाता है।

6- धैर्य व सहन शक्ति का विकास:-


 गेम से खेलते समय कई बार बच्चों को चोट लगती है परंतु वे रोते या चिल्लाते नहीं है क्योंकि उन्हें डर होता है कि यदि वे रोएंगे तो उनके माता-पिता उन्हें खेलने नहीं देंगे इसलिए वह उन चोटों को सहने के आदी बन जाते हैं। जिससे उनमें सहन करने की क्षमता दिनों दिन बढ़ती जाती है।

कभी-कभी मन मुताबिक लक्ष्य भेद ना होने पर निराश होने की वजह ध्यान रखते हुए पुनः प्रयास करते हैं और कामयाब हो जाते हैं जिससे उनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है और वह धैर्य के साथ अपने लक्ष्य भेदन में सफल होते हैं।

7- शुद्ध हवा के साथ स्वास्थ्य विकास:- 


 गेंद के साथ खेल एक ऐसा खेल है जिसे बंद कमरे में खेलना असंभव है। अतः बच्चों को खुली हवा में और पार्क आदि में ही जाकर खेलना पड़ता है और उन्हें जितनी देर वह खेलते हैं, शुद्ध ताजी हवा मिलती है जिससे उनके फेफड़े मजबूत बनते हैं और उनके स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।

8- सहयोग व मित्रता का विकास :-


 गेंद का खेल एक ऐसा खेल है जो कि अकेले खेल पाना मुश्किल है। अतः एक बच्चे को दूसरे बच्चे की जरूरत पड़ती है। इस प्रकार वह अपनी सी मानसिकता वाले दोस्तों या मित्रों को ढूंढ लेते हैं और अपने घर के बाहर एक नई दुनिया बनाना आरंभ कर देते हैं। जो उनके सामाजिक विस्तार में आगे चलकर बहुत ही सहायक होती है।

 अब आप सोच रहे होंगे कि किस उम्र से गेंद बच्चों को के हाथ में दे। गेंद आप जब बच्चों को बैठने लगे तभी से उसके हाथ में दे सकते हैं। ताकि बच्चा गेम को पकड़ना, पटकना, खिसकना, उठाना और नचाना आदि क्रियाएं करके अपने मन और मस्तिष्क को केंद्रित करने लगे। इससे उसका रुझान भी सुस्पष्ट होने लगेगा और आपको बच्चे की शारीरिक व्यायाम करने संबंधी चिंताओं का समाधान हो जाएगा।

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