छोटे बच्चों को विदेशी भाषा सिखाने के लाभ - Benefits of introducing a foreign language to young children

छोटे बच्चों को विदेशी भाषा सिखाने के लाभ - Benefits of introducing a foreign language to young children



आज के समय में भाषाओं की प्रवीणता का हमारे जीवन में बहुत अधिक प्रभाव है। एक नई भाषा सीखने से आपका दिमाग स्वस्थ्य रहता है व आपको कई प्रकार के संज्ञानात्मक व सामाजिक लाभ भी होते हैं। यदि आप अपने बच्चों को शुरू से ही एक विदेशी भाषा सिखाती हैं तो इससे बच्चो के मस्तिष्क के विकास के साथ ही उन्हें अन्य कई प्रकार के लाभ भी होते हैं।
यदि हम बच्चों को छोटी उम्र से ही एक विदेशी भाषा सिखाते हैं तो वे आसानी से नई भाषा को सीख सकते हैं क्योंकि इस उम्र में उनका मस्तिष्क विकासशील होता है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को विदेशी भाषा (अन्य भाषा) सिखाना उचित रहता है, क्योंकि इससे वे अपनी मातृभाषा के साथ ही विदेशी भाषा को भी आसानी से सीख जाते हैं।
दो भाषाओं का ज्ञान रखने वाले बच्चे अन्य बच्चों की अपेक्षा जल्दी व आसानी से सीखते हैं। इससे इन बच्चों में समस्या सुलझाने का कौशल व रचनात्मकता बढ़ती है और साथ ही इन्हें कैरियर में ज्यादा अवसर भी प्राप्त होते हैं। द्विभाषी बच्चे दूसरी संस्कृतियों से आसानी से जुड़ पाते हैं और इससे वे खुले विचारों वाले व्यक्ति भी बनते हैं। जिससे कि वे नई संस्कृतियों की विभिन्नताओं को अच्छे से समझ पाते हैं।


तो आइए जानते हैं कि बच्चों को कम उम्र में एक विदेशी भाषा सिखाने के और क्या लाभ होते हैं!

बच्चों के अन्य विदेशी भाषा सीखने के लाभ


(1) बच्चे भाषा को जल्दी व आसानी से सीखते हैं:-


 जो बच्चे 5 वर्ष या उससे भी कम उम्र में अपनी मातृभाषा के अलावा एक विदेशी भाषा सीखने की शुरुआत करते हैं, वे भाषाओं को जल्दी व आसानी से सीख पाते हैं क्योंकि वे अपने मस्तिष्क का वही भाग प्रयोग करते हैं जो कि वह अपनी मातृभाषा को सीखने में करते हैं। इसी प्रकार बड़े बच्चों के लिए किसी दूसरी भाषा को सीखना अपेक्षाकृत थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि उन्हें डर रहता है कि दूसरी भाषा का प्रयोग करते हुए उनसे कोई गलती ना हो, जिससे कि नई भाषा सीखने में उन्हें कठिनाइयां होती हैं।

(2) स्मरण शक्ति में वृद्धि:-


 शोध में पता चला है कि विदेशी भाषा सीखने वाले बच्चों व वयस्क दोनों की ही स्मरण शक्ति अन्य लोगों की अपेक्षा बेहतर होती है।

(3) मस्तिष्क का विकास:- 


विदेशी भाषा सीखने से बच्चों के संक्रियात्मक विकास पर सीधा व सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और साथ ही यह इससे यह समस्याओं को सुलझाने में, गहनता से सोचने में, सुनने के कौशल में वृद्धि होती है। अन्य भाषा सीखने से बच्चे अच्छी प्रकार से ध्यान लगा पाते हैं व साथ ही बहु कार्य करने के कौशल का भी विकास होता है।

(4) भविष्य के लिए बेहतर अवसर:-


 एक से अधिक भाषाओं का ज्ञान होने से आपके बच्चों के लिए भविष्य के अवसर भी बढ़ जाते हैं। विदेशी भाषा पर अच्छी पकड़ होने से अपने देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बहुत सी मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी नौकरियों के अवसर मिलते हैं जो कि बच्चों के भविष्य के लिए बहुत ही अच्छा है।

(5) भाषा कौशल में वृद्धि:-


 आम धारणा के अनुसार, बच्चों को कोई अन्य विदेशी भाषा सिखाने से वे उलझन में पड़ जाते हैं और विदेशी भाषा के साथ-साथ अपनी मातृभाषा को भी एक प्रकार से नहीं सीख पाते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है शोध बताते हैं कि जो बच्चे विदेशी भाषा सीखते हैं वह अन्य बच्चे जो कि केवल अपनी मातृभाषा सीखते हैं उनकी अपेक्षा अपनी मातृभाषा की अच्छी समझ सकते हैं।
 विदेशी भाषा की व्याकरण सीखने से बच्चों की अपनी मातृभाषा ने भी में भी बहुत सुधार होता है।

(6) बच्चों में सहानुभूति की भावना में वृद्धि:-


 नई भाषा सीखने से बच्चों का नए शब्दों से, व्याकरण संरचना व संस्कृतियों से परिचय होता है। द्विभाषी बच्चे दूसरों की बातों को अच्छे से समझ पाते हैं और अपनी राय भी रख पाते हैं। जिससे कि वह दूसरों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करते हैं और इससे इनकी इस भावना का विकास भी होता है।

(7) रचनात्मक सोच का विकास:-


 बच्चों को कम उम्र से ही विदेशी भाषा सिखाने से बच्चों की रचनात्मकता बढ़ती है। जिससे कि वह अपने कार्यों को पहले से बेहतर व रचनात्मक ढंग से कर पाते हैं।

(8) बहुकार्य (multitasking) में कुशलता:-


 बहुभाषी कुशलता वाले बच्चे  बहुकार्य की कला भी सीखते हैं। जिससे कि वह आसानी से कई प्रकार के कार्य एक साथ करना व साथ ही उनसे जुड़ी समस्याओं को सुलझाना सीखते हैं।

(9) लोगों से जुड़ना:-

 यदि हम छोटी उम्र से ही बच्चों को विदेशी भाषा सिखाते हैं तो वे अपने स्थानीय भाषा या मातृभाषा के साथ ही एक अन्य स्थान विशेष की भाषा व संस्कृति से भी अवगत हो पाते हैं। जिससे की भविष्य में वे अपने व्यक्तिगत व व्यवसायिक रूप से सामाजिक सर्कल को बढ़ा पाते हैं और नए लोगों से जुड़ने में भी उनकी मदद करता है।

(10) आत्मविश्वास में वृद्धि:-

 अपनी मातृभाषा के अलावा एक अन्य भाषा को सीखने से बच्चों में आत्मविश्वास की भावना का विकास होता है। जब हम बच्चों को कोई नई भाषा सिखाते हैं तो शुरुआत में थोड़ी कठिनाई आ सकती है। कोई भी नई भाषा सीखने में पहले थोड़ी कठिनाई होती है लेकिन यदि आप स्वयं और अपने बच्चे पर विश्वास रखें तो वह इसे आसानी से सीख पाएंगे और जब वे दूसरी भाषा बोलने में सक्षम हो जाएंगे तो बच्चों में आत्मविश्वास की भावना बढ़ेगी और वे अन्य किसी नए कार्य को करने से भी नहीं डरेंगे।

(11) इससे बच्चों के नई जगहों पर यात्रा करने के अवसर बढ़ते हैं और वे अपनी विरासतो से जुड़ते हैं व उन्हें नई संस्कृतियों के बारे में भी जानकारी मिलती है।



 बच्चों को एक नई भाषा सिखाने से आप और आपके बच्चे दोनों ही बहुत सी नई चीजों के बारे में सीखते हैं। इस कौशल को सिखाने के लिए आपको थोड़े से धैर्य और समझ की आवश्यकता होती है। यदि आपको ऐसा लगता है कि आपका बच्चा नई भाषा को ठीक से नहीं सीख पा रहा है और उससे दूसरे बच्चों की तुलना में ज्यादा समय लग रहा है तो इसमें आपको परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपको इस प्रक्रिया को अपने बच्चों के लिए दिलचस्प बनाना चाहिए, जिससे कि इस नई भाषा को सीखने में उसकी रुचि बढे।

 द्विभाषी होना बच्चों पर एक सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए यदि बच्चों से कोई गलती हो जाए तो आप को बच्चों की आलोचना करने की बजाय उनकी प्रशंसा करनी चाहिए। आप अपने बच्चे का अच्छी तरह से साथ देंगे तभी वह इस नई विदेशी भाषा को आसानी से सीख पाएंगे।

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