Effects of Mobile Radiation on Children - बच्चों पर मोबाइल रेडिएशन का प्रभाव व उससे बचने के उपाय

 बच्चों पर मोबाइल रेडिएशन का प्रभाव व उससे बचने के उपाय :-


आज के समय में हमारे जीवन मे टेक्नोलॉजी ने एक महत्वपूर्ण जगह बना ली है और इनमें से मुख्य मोबाइल और लैपटॉप हैं। और जैसा कि हम सब जानते हैं कि कोरोना महामारी के कारण कुछ महीनो से जब से लॉकडाउन हुआ है तब से हम अपना अधिकांश काम मोबाइल और लैपटॉप के माध्यम से ही कर रहे हैं। ज्यादातर ऑफिस के लोग अपना काम घर से ही कर रहे हैं, छोटे बच्चों के स्कूल की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही हैं और मीटिंग भी ऑनलाइन हो रहे हैं। ऐसे में हम कहीं बाहर नहीं जा पा रहे हैं और न ही हम अपने बच्चों को बाहर खेलने भेज पा रहे हैं।
इन सब कारणों की वजह से स्वयं को व्यस्त रखने के लिए या ऑफिस के काम के लिए या बच्चों की पढ़ाई के लिए हम पूरा समय मोबाईल के संपर्क में रहते हैं। कई लोगों को तो नया मोबाइल भी खरीदना पड़ रहा है ताकि उनके ऑफिस का काम और बच्चों की पढ़ाई ठीक से हो सक सके। बहुत से माता-पिता ऐसे हैं जो अपने बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहते लेकिन ऑनलाइन क्लासेस की वजह से उन्हें बच्चों को मोबाइल देना पड़ रहा है। 

तो आइए जानते हैं कि इस तरह पूरा समय मोबाईल प्रयोग करने से हमारे और हमारे बच्चों पर इसका क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और मोबाइल रेडिएशन के प्रभावों से बचने के लिए हमें क्या उपाय करने चाहिए।

मोबाईल रेडिएशन से बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव:-


(1) तंत्रिका विकार-

 बच्चों पर मोबाइल रेडिएशन का बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। बच्चों के अंगो, हड्डियों , ऊतकों व मुख्यतः मस्तिष्क की सुरक्षा झिल्ली बहुत पतली होती है जिससे कि ये अंग मोबाइल से निकलने वाले 60% रेडिएशन को अवशोषित कर लेते हैं। जिससे कि तंत्रिका तंत्र पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है जो कि शरीर के लिए बहुत ही घातक है।

(2) मस्तिष्क पर प्रभाव-

 वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि केवल दो मिनट मोबाइल पर बात करने से ही बच्चों के मस्तिष्क पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव हो सकता है। इससे बच्चों के दिमाग की चुनावी गतिविधि (electorial activity) एक घंटे के लिए बदल सकती है। मोबाइल से निकलने वाली रेडियो तरंगे बच्चों के कान ही नहीं बल्कि आंखों और दिमाग के अंदर तक पहुंच जाती हैं जिससे कि बच्चों की मानसिक गतिविधि में बाधा आ सकती है।

(3) अनिद्रा की समस्या-

 बहुत से बच्चे रात में मोबाइल का प्रयोग करते हैं।वे मोबाइल पर गेम खेलते हैं, सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं, यूट्यूब देखते हैं जिसके कारण उन्हें अच्छी नींद नहीं मिल पाती जो कि उनके मानसिक व शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

(4) डायबिटीज व हाइपरटेंशन की समस्या -

 अगर बच्चे को मोबाइल की लत है तो वे खाली समय मिलते ही मोबाइल पर लग जाते हैं। जिसके कारण वे बाहर खेलने नहीं जा पाते हैं और उन्हें बाहर की ताजी हवा भी नहीं मिल पाती है और वही सब आगे चलकर मधुमेह और हाइपरटेंशन का कारण बनते हैं।

(5) मानसिक विकास में कमी-

 मोबाइल फोन के ज्यादा प्रयोग से बच्चों के मानसिक विकास में बाधा आती है। इससे बच्चों में सीखने की क्षमता कम हो जाती है जिससे कि कक्षा व बाहर वे कुछ भी अच्छे से सीख नहीं पाते हैं। ऐसे में सामाजिक व व्यावहारिक रूप से भी बच्चों को लोगों से जुड़ने में परेशानी होती है।

(6) मोबाइल रेडिएशन का मस्तिष्क का प्रभाव-

मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन सबसे ज्यादा छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। मुख्यतः 5 वर्ष से छोटे बच्चे इससे बहुत अधिक प्रभावित होते हैं। क्योंकि मोबाइल से निकलने वाली हानिकारक तरंगे आसानी से उनके मस्तिष्क में अंदर तक पहुंच जाती हैं।

 10 वर्ष के बच्चों को 5 वर्ष के बच्चों की अपेक्षा कम नुकसान पहुंचता है। वयस्को के लिए यह सबसे कम हानिकारक है क्योंकि बच्चों की अपेक्षा वयस्कों के कपाल (skull) की मोटाई थोड़ी अधिक होती है। अतः उन्हें कम नुकसान पहुंचता है।

(7) असुरक्षित मीडिया -

 कई बार माता-पिता छोटे बच्चों को मोबाइल दे देते हैं तो हो सकता है कि अचानक बच्चों से कोई ऐसा लिंक खुल जाए जो बच्चों के लिए ठीक नहीं है। तो ऐसे में यह भी बच्चों के दिमाग में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

(8) कैंसर का खतरा -

एम्स (AIIMS) के शोध में पता चला है कि दस साल से ज्यादा मोबाइल फोन का यूज करने से ब्रेन ट्यूमर का खतरा 33% तक बढ़ जाता है।

 (9) सिर दर्द की समस्या -

 आजकल मोबाइल के बढ़ते प्रयोग की वजह से बच्चों में सिरदर्द की समस्या आम हो गई है। छोटी उम्र के बच्चों में आंखों से जुड़ी समस्याएं भी बहुत बढ़ गई है,जैसे - आंखों से पानी आना, देखने में परेशानी, आंखों में सूखापन (dryness) ,जिसका मुख्य कारण मोबाइल फोन रेडिएशन है।

कई बार यदि हम बच्चे को मोबाइल बिल्कुल भी नहीं देते हैं पर फिर भी उनके आसपास मोबाइल के इस्तेमाल से बच्चे बहुत प्रभावित हो सकते हैं। अक्सर ऐसा देखा गया है कि जो बच्चे ज्यादा मोबाइल का प्रयोग करते हैं उन्हें जल्दी गुस्सा आता है और कई बार तो डिप्रेशन की समस्या भी हो सकती है।

 (10) साथ ही बड़ों में मोबाइल रेडिएशन से (infertility) बांझपन की समस्या भी बढ़ रही है।

 मोबाइल फोन रेडिएशन से बचने के उपाय:-


1- पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन का प्रयोग बिल्कुल भी ना करने दें।

2- यदि आपको मजबूरी में बच्चों को पढ़ने या ऑनलाइन क्लास करने के लिए मोबाइल देना पड़ रहा है तो मोबाइल रेडिएशन को कम करने के लिए आप मोबाइल में एरोनिक्स Environics की Envirochip का प्रयोग कर सकते हैं।

इस चिप में एक सिलीकान सर्किट होता है जो कि रेडिएशन को कम करता है और मोबाइल से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन वेव्स को उदासीन (neutralize) करता है और इसकी प्रकृति को biofriendly बनाता है।

आप इसका प्रयोग अपने मोबाइल, लैपटॉप, वाईफाई राउटर और कंप्यूटर पर कर सकते हैं। यह 24 घंटे हमें रेडिएशन से बचाता है साथ ही एक चिप कई सालों तक प्रयोग में ला सकते हैं।

 ऐसे में कई सारे वीडियो व ब्लॉग हैं जिनसे आप यह निश्चित कर सकते हैं कि यह चिप सच में रेडिएशन को रोकने में सक्षम है। Environics द्वारा बनाई गई यह Envirochip  मैक्स हेल्थ केयर, MIT Technology review, CE , DB technology, Steria, JBISE और AIIMS के द्वारा प्रमाणित है।

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3- जब मोबाइल में नेटवर्क कम हो या फिर ऐसी जगह जहां पर जहां नेटवर्क कम आता हो तो ऐसी स्थिति में बच्चों को उस जगह पर न जाने दे और बच्चों को मोबाइल बिल्कुल भी न दें क्योंकि ऐसे में मोबाइल नेटवर्क के लिए एंटीना से जुड़ने का प्रयास करेगा जिसके कारण रेडिएशन की तीव्रता बढ़ सकती है जो कि बच्चों के लिए हानिकारक है।

4- कार, ट्रेन, बस और लिफ्ट में मोबाइल रेडिएशन बहुत ही तेज होता है इसलिए ऐसी जगह पर बच्चों को मोबाइल का प्रयोग न करने दें और खुद भी मोबाइल का प्रयोग करने से बचें।

5-  छोटे बच्चों को फोन पर बात न करने दें।

6- ध्यान रखें कि रात में सोते समय बच्चों के कमरे में मोबाइल ना हो।

7- घर व स्कूल का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आसपास कोई मोबाइल टावर ना हो।

8- गर्भवती महिलाओं को मोबाईल का प्रयोग कम से कम करना चाहिए क्योंकि इससे जन्म लेने वाले बच्चे पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

मोबाइल का प्रयोग करना बिल्कुल बन्द तो नहीं कर सकते लेकिन जैसा कि हमने अभी मोबाइल के नुकसान के बारे में जाना है तो हमें मोबाइल का प्रयोग करते समय कुछ सावधानियां ज़रूर बरतनी चाहिए जिससे हम अपने बच्चों को व स्वयं को मोबाइल रेडिएशन से होने वाले दुष्प्रभाव से बचा सके। इस विषय में यदि आपके पास कोई अन्य सवाल व सुझाव हो तो आपने नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स के माध्यम से हम तक पहुंचा सकते हैं।

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