बच्चे बूढ़े और जवानों में गुम जाने के भय के प्रभाव (FOMO):- Having FOMO (fear of missing out) in Kids, Teens and Adults.

बच्चे बूढ़े और जवानों में गुम जाने के भय के प्रभाव:-
Fear Of Missing Out (FOMO)-



Meaning in 2013 came out as nervous as anxious.

2013 में FOMO का सही अर्थ फोर्ड इंग्लिश शब्दकोश में सामने आया जिसका अर्थ है चिंतित (भयभीत) और बेचैन। नए तकनीकी युग के अधिक विस्तार, फैलाव और इस्तेमाल तथा पूरे विश्व के बढ़ते हुए दिखावे और तकनीकी तरीकों ने इस एक नए शब्द FOMO को जन्म दिया।

कैसे पहचाने कि आप कि आप फोमो के शिकार हैं:-


 FOMO के लक्षण :-


1- यदि आपको कहीं बुलाया ही न जा रहा हो तब आपके दिमाग में आता है कि शायद मुझे नजरअंदाज किया जा रहा है, ऐसे में आपके अंदर FOMO जन्म लेने लगता है।

2- कभी-कभी हम अपने को दूसरों से कम आंकते हैं और यह मान लेते हैं कि हमारा सामाजिक और आर्थिक स्तर (status) सामने वाले के स्तर से कम है और FOMO के शिकार हो जाते हैं।

3- जब हम अपने स्तर को कम मानने लगते हैं तब हम हीनता के शिकार हो जाते हैं और फिर FOMO हम पर प्रभावी होने लगता है।

4- दूसरों के घर को देखकर अपने घर को खराब या निम्न स्तर का मानना भी इसका एक लक्षण है।

5- दूसरों के गहने कपड़े आदि हममें हीनता को विकसित करने लगते हैं और हम सोचने लगते हैं कि दूसरों के सामने हम कैसे जाएं!

6- छोटी- छोटी बातों से डर जाना, जल्दी घबरा जाना, खुद भी परेशान होना और दूसरों को भी परेशान करना भी इसका एक लक्षण है।

7- छोटी सी घटना पर चिल्लाना, रोना आदि सब FOMO के ही लक्षण हैं।

8- जब आपको कहीं बुलाया जाए और आपका स्वयं वहाँ  जाने का दिल ना करे। 

किस आयु वर्ग में यह अधिक दिखता है :-


एक तत्कालीन सर्वेक्षण से पता चला है कि 16 से 42 वर्ष तक की आयु में लोग अधिकतर इस FOMO के शिकार होते हैं। उस सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि FOMO के शिकार लोगों का अनुपात 2:3 है।

FOMO के कारण :-


आइए जानते हैं कि इस भय के शिकार होने के क्या क्या कारण है -

1-  सामाजिक स्तर का दिखावा।
2- हर समय कंप्यूटर इंटरनेट से संचार (online) में रहना।
3- अद्यतन स्तर (status update) अर्थात आज का अपना कोई कार्य फोटो या कुछ भी प्रसारित करना (social media updating)। 
4- दूसरों द्वारा प्रतिदिन अपनी चीज़ें विचार या कुछ और बदलना (changing of status)।
5- दूसरों द्वारा बदली गई चीज़ को देखना और उनसे अपनी तुलना करना।
6- लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट पर अगर किसी पार्टी या छुट्टियां मनाने की पोस्ट हैं, तो अपने में कमी महसूस होना कि हम यह सब क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
7- अपने जीवन में सोशल मीडिया को ज्यादा महत्व देना।
8- तकनीकी जानकारियों के अभाव में अपने को और लोगों से पीछे समझते हुए अवसाद (depression) में जाना आदि।

यहां पर एक और सर्वेक्षण की चर्चा करते हुए और बताना ज़रूरी है कि कुछ साइकोलॉजिस्ट तो यह मानते हैं कि FOMO का मुख्य कारण ही सोशल मीडिया है। शायद यही सोशल मीडिया की इतनी सफलता का कारण भी है। इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक अपनी मौज मस्ती को दूसरों को बताने के साथ ही साथ उन्हें उकसाने का भी कार्य करती है। जिससे लोग विशेषकर किशोर और युवा कुछ प्रतिशत तक वयस्क (elders) भी बुरी तरह से FOMO (fear of missing out) का शिकार हो जाते हैं। परंतु आज के इस आधुनिक युग में इसका प्रयोग न करें तो समाज में रह पाना भी मुश्किल हो जाएगा।

वर्तमान समय में कोविड-19 की महामारी ने सोशल मीडिया के प्रयोग को और भी अधिक बढ़ा दिया है। अब तो छोटे बच्चे भी अपनी पढ़ाई और परीक्षाओं के लिए इसी पर निर्भर हैं और जिनके माता-पिता के पास अच्छे मोबाइल या लैपटॉप नहीं है या वह उनको प्रयोग करना नहीं जानते हैं तो ऐसे में बच्चे भी अब FOMO का शिकार हो रहे हैं।

परिणाम (consequences):-

यदि FOMO आप पर हावी हो रहा है तो आपके और आपके परिवार पर उसका क्या असर होगा-

1- चिंता और बेचैनी बढ़ेगी।
2- तनाव का स्तर बढ़ेगा।
3- आप बिना किसी कारण दुखी रहेंगे।
4- बाहरी दिखावे पर अधिक ध्यान जाएगा और आप अपने घर परिवार के साथ मिलने वाली खुशियों को पर ध्यान नहीं दे पाएंगे।
5- सही सोचने और समझने की क्षमता कम होने लगती है और जो दिख रहा है उसे ही सच मानकर परेशान होते हैं।
6- सही गलत की पहचान ख़त्म होने लगती है।
7- आत्म सम्मान में कमी का अनुभव होने लगता है।
8- अपने जीवन को कैसे जीना है, अपने पास जो भी है, उसके साथ अपना जीवन कैसे व्यतीत करना है इस बात का ध्यान नई रहता। 
9- सिर्फ दूसरे लोग क्या कर रहे हैं? कहां जा रहे हैं? क्या पहन रहे हैं? हमारा ध्यान बस उसी पर लगा रहता है। हम अपने सारे कार्य छोड़कर पूरा दिन केवल सोशल मीडिया पर ही व्यस्त रहने लगते हैं।
10- कई बार तो लोग अवसाद (depression) में भी चले जाते हैं।
11- कुछ लोगों की हालत इतनी बुरी हो जाती है कि वह नशीली दवा यानी ड्रग्स का सेवन भी करने लगते हैं।
12- घर परिवार में प्रशिक्षण बाधित होता है।
13- रात में देर तक जागने की आदत का विकास हो जाता है जिससे स्वास्थ्य खराब होने का डर बढ़ जाता है।
14- दूसरों से तुलना और प्रत्यलोचना बढ़ जाती है, जो आपके अंदर हीन भावना पैदा करती है और आप को FOMO का शिकार बना देती है।

बचाव (Remedies) :-


FOMO से बचाव बहुत सरल है। आपको बस इतना करना है कि जितनी ज़रूरत हो उतना ही अपने आप को सोशल मीडिया में व्यस्त रखें।जैसे कोविड-19 में दूरी को ही बचाव को एक सफल इलाज माना गया है। वैसे ही FOMO से बचाव के लिए बस आपको सोशल मीडिया के पास तब तक ही रहना है जब तक वो आपको लाभ दे रहा है।

ऐसा नहीं है कि आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया खराब है। ये सुविधा पूर्ण तरीकों और आसानी से काम करने में हमारी मदद करते हैं। परंतु हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम इनके अधीन न हो जाए क्योंकि इनका हमारे मस्तिष्क पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

यदि कहीं भी ज़रा सा हम इनके आधीन हुए तो ये हमारे दिल और दिमाग़ को बदलने और हमें FOMO का शिकार बना देने से नहीं चूकेंगे। 

तो स्वयं सतर्क रहकर अपने परिवार को भी इस FOMO रूपी अनदेखे, अनजाने और अनचाहे भय से बचाएं।

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