बच्चा बोलना या भाषाएं कैसे सीखता है? How do children learn talking and language ?

How do children learn talking and language?
आपका बच्चा बोलना या भाषाएं कैसे सीखता है?


मेरे एक पूर्व प्रकाशित (published) लेख में मैं आपको बता चुकी हूं कि बच्चे का प्रशिक्षण मां के गर्भ से ही प्रारंभ हो जाता है। यहां पर स्पष्ट करना ज़रूरी है कि भाषा या बोलना सिखाना नहीं पड़ता ,वरन् अपने आप ही बच्चा अपने वातावरण से सीखने लगता है।
बोलना या भाषा सीखना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो बच्चे के जन्म के साथ आरंभ होकर धीरे-धीरे उसकी उम्र के साथ-साथ विकसित होती जाती है। जिस प्रकार स्तनपान करना बच्चे को प्राकृतिक,(naturally,) तौर पर आता है, उसी प्रकार अपनी मातृभाषा भी उसे अपने आप ही आने लगती है।

यदि गहराई से अध्ययन करें तो बोलना (भाषा) सीखने की प्रक्रिया को तीन स्तरों में विभाजित कर सकते हैं:-


भाषा (बोलना) सीखने के स्तर :-


(1) ध्वनियों आवाज़ों द्वारा (learning by sounds) :-

आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि एक बच्चा अपनी बोली (भाषा) सीखने की शुरुआत आवाज़ों से करता है। क्या आप जानते हैं की आवाज़ें 150 प्रकार की होती हैं जिनके आधार पर पूरे विश्व में लगभग 6500 भाषाएं बोली जाती हैं। अब आप भी जानना चाहते होंगे कि आवाज़ों द्वारा भाषाओं का जन्म कैसे होता है। आप अभी सिर्फ इतना समझे की आवाज़ों से ध्वनि ग्राम (phonemes) या गणनीय संज्ञा पैदा होते हैं। और इन्हीं को बार-बार सुनते रहने से बच्चों के अंदर आवाज़ों को पहचानने और उन्हें पुनः उत्पन्न करने की क्षमता का विकास जन्म के बाद से ही होने लगता है।

अंग्रेजी भाषा में 44 (phonemes) होते हैं जबकि हिंदी भाषा में 11 स्वर (vowels) और 33 से 40 व्यंजन(consonants) मिलाकर लगभग 51(phonemes) होते हैं और यही phonemes ही हमारी भाषा को जानने समझने और बोल पाने के आधार बनते हैं।

(2) शब्दों द्वारा (learning by words):-


6 महीने तक का होने पर बच्चा अपने द्वारा सुनी जा रही phonemes का अनुसरण करना शुरू करते हुए उसी लय (rythem) को बोलने की कोशिश करता है और पहला शब्द मां बोलना सीखता है और तब यह ध्वनि उससे शब्द के रूप में अपनी मां को बुलाने का आकर्षित करने में मदद करती हैं।

इसके साथ ही बच्चा एक शब्द की समाप्ति और दूसरे शब्द के आरंभ को सीखने की तरफ बढ़ने लगता है और साथ ही पापा, बुआ आदि शब्दों को बोलने की कोशिश करता है और उसके बोलने के साथ ही उसके सामने अलग-अलग लोग आने लगते हैं और बच्चा अपने बोले शब्दों से उन व्यक्तियों को जोड़कर पहचानना आरंभ कर देता है। यहीं पर बच्चों का परिचय शब्द सीमाओं से होता है और शब्द ही नहीं सीखता बल्कि वह शब्दों के टुकड़े करना (morphemes) भी सीखने लगता है। जो उसे नए शब्दों से परिचित कराते हैं।

(3) वाक्य द्वारा (learning by sentence) :-


कुछ समय बाद बच्चा टूटे-फूटे वाक्य बोलना शुरू कर देता है, जो एक क्रम में होते हैं जिनका अर्थ समझ में आता है। भले ही व्याकरण (grammar) की दृष्टि से वह वाक्य सही नहीं होते हैं। इस उम्र में बच्चा अपने आप को व्यक्त (explain) करने लगता है।

यह तो थे ,भाषा सीखने के प्रथम ३ चरण अब चलते है, भाषा के विकास की ओर :-

भाषा का विकास (language development):-

 
आइए जानते हैं कि भाषा का विकास किस प्रकार से होता है:-
जन्म के बाद से ही नवजात शिशु भाषा के लायात्मक (rythems) पर प्रतिक्रिया देने प्रतिक्रियाएं देने लगता है। किसी झुनझुने की आवाज पर उस तरफ मुड़ना, गाना गाने पर उस आवाज को पहचानने की कोशिश करना, अपने घर के सभी सदस्यों की आवाज़ों को उनके बोलने की लय से पहचानने लगना बच्चा अपने जीवन के पहले महीने में ही आरंभ कर देता है।

 हमारी हिंदी में बच्चे की भाषा और परिवार से परिचय पर एक कहावत है जो इस प्रकार है -

           मां मासे पिता छह मासे।
          सगे संबंधी सब बारह मासे।।


अर्थात एक शिशु 1 महीने में अपनी मां, 6 महीने का होने पर अपने पिता और 1 वर्ष का होने पर अपने संबंधियों और उनकी आवाज़ों को पहचाने लगता है।

आइए अब बच्चे की आयु के विकास के साथ उसकी भाषा विकास का क्रम बद्ध विवरण जानते हैं:-


* जन्म से 3 महीने की आयु तक एक नवजात डांटना, तनावपूर्ण आवाज में बोलना, तेज या धीमी आवाज में बोलना, हंसने की आवाज, रोने की आवाज पर अपनी पूरी पूरी प्रतिक्रिया उसी रूप में देने लगता है। जिन्हें देखकर आप भी खुश होते हैं। परंतु कुछ समय बाद आपसे बार-बार ऐसा करने पर बच्चे की प्रतिक्रिया में कमी आने लगती है।

* 4 महीने से 6 महीने की आयु तक बच्चा शब्द, आवाज़ें और शोर में अंतर करना सीखने लगता है। आपके द्वारा बोले गए शब्दों और अब आपकी ताली में अंतर कर उस पर अपनी प्रतिक्रिया करने लगता है और इसी उम्र में बच्चा व्यर्थ की बातें जिसका अर्थ हम भी नहीं समझ पाते पर वह अपने आप को व्यक्त करने के लिए ऐसी बातें करने लगता है।

* 7 से 8 महीने में बच्चा आवाज़ों के समूह को पहचानने लगता है और शब्द सीमाओं को भी समझने लगता है और कुछ शब्दों का उच्चारण करने लगता है और उन्हें अलग-अलग करके बोलना भी शुरू कर देता है।

* 9 से 10 महीने का होने पर वह प्रतिदिन में प्रयोग होने वाले शब्दों को समझने और उनके अनुसार ही अपना कार्य करने लगता है।

* 11 से 12 महीने का होते ही बच्चा शब्दों को आपस में जोड़ना सीखने लगता है और उसका शब्दकोश बढ़ने लगता है। वह दूसरों की नकल उतारने लगता है। आपने अक्सर देखा होगा कि यदि इस उम्र में आप बच्चे को किसी बात के लिए डांटते हैं तो वह भी आपको आपके अंदाज में ही डांटता है।

* 13 से 18 महीने (डेढ़ वर्ष) का होने तक बच्चा अपनी बात बोलकर समझाने लगता है और भाषा में आने वाली संज्ञा और क्रिया में अंतर करना सीख जाता है।

* 19 से 24 महीने (2 वर्ष) का होने तक बच्चा सरल वाक्य बोलने लगता है।

* 25 से 36 महीने (3 वर्ष) का होने तक 90% बच्चे ठीक तरह से सही भाषा का प्रयोग करना सीख जाते हैं और उनकी भाषा का विकास और विस्तार बड़ो की भांति होने लगता है और बच्चे भाषा पर अपनी पकड़ बना लेते हैं।

प्रकृति द्वारा दिए गए मस्तिष्क क्षमता का भी बच्चों के भाषा सीखने में एक महत्वपूर्ण किरदार होता है। एक नवजात शिशु को प्रकृति 1 मिनट में 5000 शब्दों को अपने मस्तिष्क में रख सकने की क्षमता दे कर भेजती है। जो बढ़ती हुई आयु के साथ-साथ कम होती जाती है। 

अतः आपसे निवेदन है कि शिशु के आरंभिक जीवन में ही उसकी भाषा और शब्दकोश के प्रति रुचि पैदा करें। साथ ही उन शब्दों को अन्य भाषाओं में क्या कहते हैं यह भी बताना आरंभ करें जिससे कि उसके तीव्र व मानसिक विकास को बल मिले और उसके भाषाओं को सीखने की क्षमता का विकास और विस्तार तेजी से हो। और आपका बच्चा कहीं पर भी अपने को अभिव्यक्त करने में संकोच नहीं करेगा जिससे उसका अपने और अपनी भाषा तथा उसके प्रयोग पर विश्वास बढ़ेगा और साथ उसका आत्मसम्मान भी बढ़ेगा जो उसे भविष्य में बहुत आगे ले जा सकता है।

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