सामाजिक मीडिया के संकेत- किशोरों की दोस्ती के अर्थ को बर्बाद कर रहा है

Signs social media is ruining teen friendship

सामाजिक मीडिया के संकेत - किशोरों की दोस्ती के अर्थ को बर्बाद कर रहा है

यह सच है कि सामाजिक मीडिया के बढ़ते कदम हमारे जीवन में केवल किशोरों को ही नहीं बल्कि बच्चों, युवाओं और वयस्कों तक की दोस्ती के अर्थ को बिगाड़ रहे हैं।



सामाजिक मीडिया क्या है?
What is social media?


संप्रेक्षण (विचारों के आदान-प्रदान) के माध्यम को मीडिया कहते हैं। बात अगर सामाजिक संप्रेक्षण की करें तो इसका अर्थ हुआ एक साथ कई लोगों या लोगों के एक पूरे समूह को अपने विचारों, छवियों आदि का आदान प्रदान कर अपने कार्यकलापों को लोगों तक पहुंचाना। इस प्रकार के सामाजिक मीडिया (Social Media) पर कोई सीधा सरकारी नियंत्रण नहीं होता है। इस कारण लोग खुलकर किसी भी प्रकार के विचार, वीडियो, फोटो आदि इन पर अपडेट करते रहते हैं। ताकि उनसे जुड़े हुए लोग उनकी पोस्ट को देखकर उनकी प्रशंसा करें। जिससे लगातार पोस्ट अपडेट करने वाला चर्चा में रहे और उसको जानने वालों की संख्या में दिन-प्रतिदिन बढ़ती रहे।

 सामाजिक मीडिया का सकारात्मक पहलू (Positive aspects of social media) :-


1- आप किसी भी समय पूरे विश्व के किसी भी दोस्त या जानने वाले से जुड़ सकते हैं। 
2- आप अपने स्वजनों को सोशल मीडिया के द्वारा बड़ी आसानी से ढूंढ सकते हैं।
3- सामाजिक मीडिया पुराने परंपरागत संचार माध्यमों से कहीं अधिक सुविधाजनक होते हैं। 
4- आप अपने व्यवसाय को बड़ी आसानी और सुविधापूर्ण तरीके से अपने ग्राहकों तक उपलब्ध करा कर बड़ा कर सकते हैं। 
5- नई-नई तकनीकी जानकारियां बड़ी आसानी से सीखने को मिलती हैं। 
6- कोविड-19 ने पढ़ाई और ऑफिस के सारे काम भी घर बैठकर तकनीक द्वारा संपन्न कराना अब लगभग हर भारतीय को सिखा दिया है।
7-  मीटिंग भी अब वर्चुअल यानी फोन पर ही संपन्न हो रही है ताकि कोरोना के खतरे से बचा जा सके।
8- सामाजिक मीडिया प्रबंधन और विस्तार संबंधी रोजगार में भी कोविड-19 के समय में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। 
9- मालिक और कर्मचारियों के संबंधों में सुधार दिखता है क्योंकि अब काम करवाने वाले और काम करने वाले दोनों ही सामाजिक मीडिया से जुड़े हैं।
10- आप कभी भी, किसी को भी अपने चलचित्र (video) और तस्वीरें (photos) साझा (share) करके लोगों द्वारा अपनी प्रशंसा पा सकते हैं।

 सामाजिक मीडिया का नकारात्मक पहलू
(Negative aspects of social media) :-


1- व्यक्तियों की उत्पादकता (productivity) में कमी आने लगती है क्योंकि वे अपना अधिक समय सोशल मीडिया में लगा देते हैं।
2- लोगों में आपस में मिलने जुलने और सामाजिक व्यवहार में कमी आने लगती है अर्थात् वास्तविक दोस्ती से हटकर आज की दोस्ती नकली (false) हो गई है।
3- बहुत सारी निजी बातें सार्वजनिक मीडिया पर कर पाना असंभव होता है।
4- डाटा भरवाने में पैसा और उसे चलाने में समय की बहुत बर्बादी होती है।
5- सामाजिक वास्तविक व्यवहार में गिरावट और अलगाववादी भावना बढ़ने लगती है। 
6- आपस में घर में भी लोग एक दूसरे से दूर होते चले जा रहे हैं।
7- अभद्र और असंयमित भाषा का प्रयोग करने लगे है।

 सामाजिक मीडिया में दोस्ती के विभिन्न माध्यम (Different mediums of friendship in social media) :-


* फेसबुक (Facebook)
व्हाट्सएप (WhatsApp)
इंस्टाग्राम (Instagram)
टि्वटर (Twitter)
यूट्यूब (YouTube)
गूगल (Google)
टेलीग्राम (Telegram)

इत्यादि। 


आजकल के आधुनिक तकनीकी युग में हम समय और दूरी को इन सामाजिक (social) मीडिया माध्यमों द्वारा अपनी मुट्ठी में लेकर चलते हैं। परंतु दुनिया को मुट्ठी में भरना तक तो ठीक है लेकिन यदि यह मुट्ठी खुल गई तो सिवाय दुनिया में खो जाने के कोई दूसरा अस्तित्व नहीं बचेगा। कहने का मतलब है कि जब आप सोशल मीडिया की लत पाल लेते हैं तो आप अपने आप को भूल जाते हैं और धीरे-धीरे सोशल मीडिया की खाई में गिर जाते हैं।

सामाजिक मीडिया का दोस्ती व अन्य संबंधों पर दुष्प्रभाव (Bad effects of social media on friendship and other relations) :-


1- आपके हाव - भाव और आप का वास्तविक सामाजिक व्यवहार बदल जाता है। जैसे हम आपस में मिलने पर नमस्ते या चरण स्पर्श आदि अभिवादन करते हैं या यथायोग्य अभिवादन देते हैं। लेकिन सोशल मीडिया कहता है hi, hello,bro,sis आदि जो वास्तविकता से दूर एक काल्पनिक दिखावे की दुनिया में ले जाते है जिससे हम अपने संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं।

2- धोखेबाजी (betrayal), झूठ, दिखावा इसमें इतना अधिक होता है कि हम अपनों से दूर होते जाते हैं। उदाहरण के लिए, क्या कोई गंदे कपड़ों में अपने फोटो सोशल मीडिया पर किसी प्लेटफार्म पर डालेगा? शायद, नहीं! वह अपनी सबसे अच्छी फोटो ही अपलोड करेगा। तो कहा आया सच सामने। यह एक धोखा है और इससे हमें समझने की जरूरत है। ऐसी झूठी तस्वीरों को देखकर आप अपने को निम्न समझते हुए अवसाद में चले जाते हैं।

3- आजकल लोग साइबर बुलीइंग (Cyber bullying) की बुरी तरह से शिकार हो रहे हैं। अब यह साइबर बुलिंग क्या होता है? यहां यह जानना जरूरी है। सोशल मीडिया में गंदी भाषा का प्रयोग करना (बोलकर या लिख कर), गंदी तस्वीर को पोस्ट करना (अपनी या किसी और की), इन माध्यमों पर धमकियां देना या मिलना आदि साइबर बुलिंग कहलाता है। जब एक बार कोई इसका शिकार हो जाता है तो वह मानसिक रूप से असंतुलित होने लगता है। 

4- व्यक्ति FOMO (Fear of missing out) का शिकार बन जाता है यानी उसे अपने समूह से बाहर निकाल दिए जाने का अनदेखा डर सताने लगता है। जिससे उसके अंदर गुस्सा, मारपीट, तोड़फोड़ करने जैसे भी विकार पैदा होने लगते हैं और यह व्यक्ति अपने को, अपने परिवार को और समाज को नुक़सान पहुंचा सकता है।

5- कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि बातों-बातों में यह मीडिया, दोस्त जिन्हें शायद सामने से कभी नहीं देखा होता है, आपसे आपके सभी राज जान लेते हैं और आपकी निजी जानकारियों के आधार पर आपके बैंक अकाउंट और अन्य जरूरी चीजों के पासवर्ड को लेकर आपको लूट सकते हैं।

 अब क्या करें? 
(Now what to do?):-


ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया का प्रयोग करना ग़लत है परंतु जब भी आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हो तो कुछ बातों को ध्यान में रखें और अपने अमूल्य जीवन को नष्ट बर्बाद होने से बचाएं।

1- आप यह समझें कि यह सारी ऐप्स बनाने वाली कंपनियों को TRP मिलती है और ये विज्ञापनो द्वारा पैसे बटोरती हैं। आप अपने पैसे पहले डाटा रिचार्ज पर खर्च करके अपने कीमती समय बर्बाद करते हैं और फायदा कंपनियों को होता है। तो आप हमेशा अपने फायदे के एप्स ही प्रयोग करें।

2- अपने रहन-सहन, खान-पान, पहनावा, परिवार और समाज के साथ जुड़े रहें। आवश्यकता पड़ने पर एक दो पोस्ट देख लें या डाल दें। अधिक समय सोशल मीडिया पर न बिताएं।

3- बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रहने के लिए कहने पर वह हम से असहमत हो जाते हैं। ऐसे में आप स्वयं को भी नियंत्रित और नियमित रखें।

4- बच्चों के दोस्त आप स्वयं बने और उन्हें जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करें। उसके साथ मदद को तैयार रहें।

5- ओवरशेयरिंग पर रोक लगाएं और बच्चे को कंप्यूटर द्वारा ऐप प्रयोग करने दें, मोबाइल द्वारा नहीं।

6- बच्चे को अपने आप को साबित करने को कहें।

7- उसे सृजनशील(creative) बनाएं।

8- बच्चे के अंदर सोशल मीडिया से अलग दोस्ती को बढ़ाने और निभाने की आदत डालें जिससे वह अपने वास्तविक समाज में रहना सीखें।

अंत में आपसे निवेदन है कि आप तकनीक के मालिक बन कर उस पर शासन करें। उसे अपना मालिक न बनने दें।आप बेकार की ऐप्स हटाकर सिर्फ काम की चीजें ही फोन में रखकर उनका प्रयोग करें। तो ही सोशल मीडिया आपकी जिंदगी को बर्बाद नहीं कर पाएगा।

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