एकल परिवार के फायदे नुकसान और बच्चों पर इसका प्रभाव (Pros and cons of nuclear families and its effects on child)

एकल परिवार के फायदे, नुकसान और बच्चों पर इसका प्रभाव:-
Pros and cons of nuclear families and its effects on child:-



एकल परिवार में माता पिता अपने बच्चों के साथ में रहते हैं और बच्चे अपने हर छोटे-बड़े कामों के लिए केवल अपने माता-पिता पर ही निर्भर रहते हैं और माता-पिता भी अपने बच्चों की पल-पल की जानकारी रखते हैं। अपने बच्चों की पसंद - नापसंद, स्कूल, एक्स्ट्रा एक्टिविटीज, घूमना फिरना हर बात को माता-पिता ही समझते और जानते हैं  । 

एकल परिवार के वातावरण में पल रहे बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव :-

लाभ(Pros / Benefits) 

1) निरंतर अच्छी या एक सी देखभाल (consistency in care taking) :-

क्योंकि बच्चे बिना किसी मध्यस्था के सीधे अपने माता- पिता के साथ में ही होते हैं, और उन्हें पता होता है कि यदि वह बीमार पड़े या कुछ और समस्या पैदा की तो माता-पिता को ही सहन करना पड़ेगा । ऐसे में माता- पिता बच्चों को अच्छा खाना- पीना, पढ़ना- लिखना,  घूमना फिरना देकर हर प्रकार से संतुष्टि देने का भरपूर प्रयास करते हैं ।जिसके फलस्वरूप माता-पिता और बच्चों के बीच एक अच्छी समझ यानी बॉन्डिंग बन जाती है।

2) शक्ति और स्थिरता (strength and stability) :-

बच्चे अपने जीवन काल की शुरुआत से ही अपने माता-पिता को कई सारी समस्याओं से जूझते और उन को सुलझाते हुए देखते -देखते बड़े होते हैं । जिससे बच्चों के अंदर परिवार की समस्याओं को सुलझाने और सहनशक्ति के साथ-साथ अपने माता पिता के साथ घरेलू कामकाज में हाथ बंटवाने की आदत का विकास हो जाता है। जिससे उनके अंदर जिम्मेदारियां निभाने की अच्छी आदतों का विकास होता है। साथ ही सहयोग की एक जबरदस्त भावना बच्चों में आ जाती है।

3) सकारात्मक व्यवहार में वृद्धि (increase in positive behaviour):- 

एकल परिवार में रहने वाले बच्चे बचपन से ही एक-दूसरे के साथ बंधे रहने के आदी होते हैं, तो ऐसे में उनके अंदर विरोध कम और सहयोग के भाव अधिक होते हैं ,और यही सहयोग भाव उन्हें अधिक सकारात्मक (positive)  बनाता है और यह उनका व्यवहार सा बन जाता है।

4) विद्यालय में अच्छे अंक प्राप्त करना (good grades in school):-

क्योंकि माता-पिता और बच्चों की छोटी सी अपनी ही दुनियां होती है ,तो माता-पिता अपना अधिक समय बच्चे की पढ़ाई -लिखाई और उसके उज्जवल भविष्य की तैयारियों को कराने में लगाते हैं । जिसके परिणामस्वरूप बच्चा विद्यालय में अच्छे अंक (grades) पाने में सफल रहता है।

5) आर्थिक स्थिरता (economic stability) :-

परिवार छोटा होता है और जरूरतें सीमित और योजनाबद्ध, तो आर्थिक समृद्धि की संभावनाएं अधिक बढ़ जाती हैं। जिसके चलते परिवार एक विलासितापूर्ण (luxurious) जीवन को जीने का अभ्यस्त हो जाता है । जिसके चलते बच्चों में उच्च वर्गीय समाज में जीवन को जीने की और एक अच्छे जीवन स्तर की आदत हो जाती है।

6) अतिरिक्त गतिविधियों का अच्छा विकास (a good development in extra activities):-

एकल परिवार में माता-पिता पढ़ाई के साथ -साथ कई और चीजें जैसे वाद्य यंत्र बजाना, गाना- नाचना, तैरना, वैदिक  गणित आदि के लिए अपने बच्चे को पूरी सुविधाओं के साथ भेजना पसंद करते हैं । जिससे उनका सर्वांगीण विकास होकर वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हो जाते हैं।

7) उच्च स्थान मान (higher placement value):-

ऐसे परिवारों के बच्चे जिनका पालन पोषण आर्थिक स्थिरता में, सकारात्मक व्यवहार के साथ, अच्छे वातावरण वाले विद्यालय में, अच्छे अंको और अन्य अतिरिक्त गतिविधियों के चलते होता है, तो ऐसे बच्चों का प्लेसमेंट बहुत ही अच्छा होता है। जिससे उनका भविष्य सुनहरा रहता है।

8) एकल परिवारों का सामाजिक भौतिक और संवेदनात्मक परिवेश बहुत प्रभावशाली व आकर्षक होता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह एक अच्छा वातावरण प्रदान कर पाते हैं।

9) एकल परिवार में रहने वाले बच्चे जल्दी ही आत्मनिर्भर हो जाते हैं। जिससे उनमें बहुत अच्छी संवाद (communication) क्षमता का विकास हो जाता है ।

10) ऐसे बच्चे सक्षम और स्वतंत्र जीवन शैली के आदी हो जाते हैं। जिससे ऐसे परिवारों में अधिक मानसिक तनाव वह लड़ाई -झगड़े नहीं होते हैं।

हानि (cons):-

1) वास्तविकता समाप्त हो जाती है (all originalities and realities burnt):-  

एकल परिवार के बढ़ते दायरे में जीवन की वास्तविक जीवन शैली और परिवार प्रथा कहीं खो गई  है। आजकल दादा -दादी ,चाचा- चाची ,बुआ, मौसी, मामा केवल एक व्यक्ति हैं।  जिनके घर कभी- कभी मिलने जाया जाता है  ।यह सभी एक ही परिवार के हैं ,यह एकल परिवार में रह रहे बच्चों की सोच से परे है और वे परिवार की असलियत से दूर अपने में ही परिवार बन कर रह जा रहे हैं।

2) छोटी सहयोग प्रणाली (small support system) 

जैसे संयुक्त परिवार में कोई बात पड़ने पर सब एक साथ एक दूसरे की मदद के लिए हर समय तैयार रहते हैं ,वैसा एकल परिवार में असंभव है। कठिन समय में एकल परिवारों को अत्यधिक कष्ट सहना पड़ता है क्योंकि बच्चे सब के साथ अपने को एडजस्ट नहीं कर पाते हैं।

3) स्व केंद्रित विश्व परिदृश्य (self-centered volume)

एकल परिवार में रहने वाले सभी लोग सिर्फ अपने तक ही सीमित रहते हैं और अपने अन्य सगे संबंधियों से मतलब नहीं रखते, जो उन्हें उनके अपनों से दूर करता जाता है अर्थात् वह स्वयं में ही केंद्रित होकर रह जाते हैं और अपने संबंधों और विचारों को अत्यधिक विस्तार नहीं दे पाते।

3) झगड़ों को सुलझाने की कला नहीं होती (no conflict solving skill)

एकल परिवार के विस्तार के साथ -साथ ही परिवार विघटन/ टूटना बहुत दिखने लगा है, क्योंकि एकल परिवार में पति -पत्नी के बीच झगड़ों को सुलझाने और उन्हें समझाने वाले बड़े उनके साथ नहीं होते हैं । ऐसे में झगड़ों को मिल बैठकर सुलझाने की कला एकल परिवार में नहीं होती है।

4) परंपराओं और संस्कारों का अभाव (lack of tradition and culture):-

 आज के एकल परिवारों में पल रहे बच्चे अपनी संस्कृति, परंपराओं, संस्कारों और सभ्यताओं से बहुत दूर होकर पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करते दिखाई पड़ते हैं।

एकल परिवार प्रथा में जहां एक ओर सकारात्मकता का विकास होता है, अच्छी आय के साधन बनते हैं, बच्चों के अंदर अनेकों गतिविधियों का विकास और विस्तार होता है, अच्छी पढ़ाई करके अच्छी-अच्छी नौकरियां प्राप्त करने में सफल होते हैं ,साथ में खाना- पीना, घूमना, बातचीत करना उनके आपसी संबंधों को मज़बूत करता है।


वहीं यदि एकल परिवार में पल रहे बच्चों को रिश्ते और उनकी अहमियत की भी शिक्षा वास्तविक रिश्ते निभा कर दी जाए, तो शायद एकल परिवार की शिक्षा और प्रथा अपनी पूर्णता को प्राप्त होगी नहीं तो कहीं एक कोना शायद अछूता रह जाए।

No comments:

Post a Comment