अपने नन्हे बच्चे को लिखना कैसे सिखाएं? How to teach your toddler to write?

How to teach your toddler to write?
अपने नन्हे बच्चे को लिखना कैसे सिखाएं?


जैसा कि आपको पता है भाषा बोलना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। बच्चा जन्म से ही ध्वनियों की तरफ आकर्षित होकर उन से पैदा होने वाली आवाज को ग्रहण करना शुरू कर देता है और अपनी उम्र के लगभग 24 महीने (2 वर्ष) पूरा होने तक वह अपने बातों को शब्दों द्वारा समझाने लगता है। बस यही वह सही समय होता है, जब हम बच्चों के नन्हे मस्तिष्क में कई तरह की छवियों (pictures) को बैठा सकते हैं और साथ में उनकी (phonic sound) ध्वनि को बोल कर उनको उस छवि (फोटो) में लिखे अक्षर से पहचान कराना आरंभ कर सकते हैं।

 बच्चा पहले आवाजें पहचानना फिर उन आवाजों (ध्वनियों) के अक्षरों को देखकर उनसे मिलाना सीखता है। यानी कि दूसरे कदम पर बच्चा पढ़ना सीखता है और जब वह अक्षरों को पहचानने लगता है तब वह उनको मिलाकर शब्द को बोलना और पढ़ना सीखता है।

एक सर्वेक्षण द्वारा यह प्रमाणित हो चुका है कि जब बच्चा 2.5 से 3 वर्ष का होता है तो वह बाल विहार (kindergarten or KG) में जाने योग्य हो जाता है। जहां बच्चे को आसान अक्षरों द्वारा खेल - खेल में लिखना सिखाना शुरू किया जाता है जिससे बच्चा खेल - खेल में अक्षरों को पहचानना और बोलना सीख लेता है। जब बच्चा अक्षरों को पहचानता है तो उसके लिए उन्हें लिखना सरल हो जाता है।

हम बच्चों को आसानी से और जल्दी लिखना कैसे सिखा सकते हैं -

(1) आड़ी तिरछी आकृतियां बनाना (Scribbling) :-


जब बच्चा ठीक से चलना और बोलना सीख जाता है, तब वह अन्य शैतानियों में दिमाग लगाने लगता है। जैसे- कूदना, फेंकना, नाचना और दीवारों पर किसी भी चीज को उठाकर लाइने खींचना आदि। यदि आप इस समय पर बच्चे को कॉपी, पेंसिल, कलर आदि देकर उसे कागज पर कुछ भी बनाने की छूट दें तो बच्चा रंगों और आपके दिए हुए सामान द्वारा विभिन्न आड़ी तिरछी रेखाएं (scribbled lines) बनाना शुरू कर देता है और बड़ा उत्साहित होकर अपने काम को आपको दिखा कर अपनी प्रशंसा करवाना चाहता है। जब आप उसके काम की तारीफ करतें हैं तो आपका बच्चा और अधिक देर तक अपने उसी काम को मन लगाकर करता है और जाने अनजाने में ही आप उसका परिचय लेखन क्रिया से करा देते हैं।

परंतु ध्यान रहे ऐसा करते समय बच्चे को थोड़े मोटे crayon या marker ही दें जिससे बच्चा आसानी से उन्हें पकड़ सके। साथ ही कोशिश करें कि आपका बच्चा कॉपी या कागज पर ही अपनी कलाकारी करें, किसी दीवार या अलमारी पर नहीं।

(2) अक्षर पहचानना (Letter Recognition) :-


बच्चे के द्वारा बनाए गए आड़े तिरछे चित्रों या लाइनों को उनके मनपसंद आकार में बदल दें। जैसे- तारों का आकार, दिल का आकार, गेंद का आकार आदि। फिर उससे संबंधित शब्द बोले और वह शब्द किस अक्षर से शुरू होता है बच्चे को बताएं तथा लिखकर दिखाएं और फिर से उसे कुछ ब्लॉक्स जिन पर वह अक्षर लिखे हो, दें। फिर उनसे वह अक्षर पहचान कर आप उनसे वापस मांगे। 

आपके ऐसा करने पर बच्चे अक्षरों को पहचानने लगेंगे। फिर आप घर के कामों के साथ खेल - खेल में भी कभी आटे से, कभी कच्चे चावल से यह अक्षर बनाएँ और अपने बच्चे से उसे पहचानने को कहें। फिर वह भी ऐसा ही करेगा जिससे उसका ध्यान लिखने की तरफ बढ़ेगा।

(3) आयु उपयुक्त कार्यपत्रक (Age Appropriate Worksheets) :-


अब आप बच्चे के लिए इस प्रकार से वर्कशीट बना सकते हैं - 

* Match the following :-

1- रंगों का मिलान (Matching the Colors) -

कोई भी दो रंग ले लें। एक बिंदु हरे के सामने लाल और लाल के सामने हरा बनाकर उसका मिलान करना सिखाए। बच्चा आड़ी तिरछी रेखाएं बनाकर उन्हें आपस में मैच करेगा।

2- अंकों का मिलान (Matching the Numbers) -

अब जबकि आपका बच्चा अंक पहचानने लगा है तो आप एक कागज पर आमने-सामने 123 और 321 लिख दें और बच्चे से उसे मिलाने को कहें। बच्चा इसे खुशी-खुशी करेगा और अनजाने में ही वह पेंसिल पकड़ना सीख जाएगा।

3- अक्षरों का मिलान (Matching the alphabets) -

अंक मिलान की तरह ही अक्षर मिलान में भी आमने-सामने अक्षर जैसे abc और cba या क ख ग और ग ख क लिखकर बच्चों को अक्षर मिलाने को कहें। इस प्रकार वह अक्षरों से परिचित हो जाएगा।

4- चित्र मिलान (Matching the Pictures) -

विभिन्न चित्र बनाएं। जैसे गेंद, बोतल, बैट आदि बनाकर उनका मिलान रेखाओं द्वारा कराएं।

5- आकृतियों का मिलान (Matching the Shapes) - 

विभिन्न आकृतियां जैसे गोला, वर्ग, स्टार आदि का मिलान कराएं और उनके नाम भी बताएं।
आपके ऐसी वर्कशीट कराने से बच्चा कागज और पेंसिल से खेलना शुरू कर देगा जिससे उसके आगे का उसका प्रशिक्षण आसान हो जाएगा।

(4) बिंदु बनाकर लेख प्रशिक्षण (Matching Dotted Lines) :-


 इसे हम वास्तविक लेखन सिखाने की पहली ठोस सीढ़ी मानेंगे। इस प्रक्रिया में बिंदु बनाकर फिर उनको आपस में जोड़कर बच्चों को रेखाएं बनाना सिखाते हैं। इसमें सबसे पहले खड़ी लाइन, पड़ी लाइन, तिरछी लाइन, वक्र (curve) सिखाते हुए अंग्रेजी के सरल अक्षर, जैसे- I,T,V,X,L आदि के बिंदु बनाकर उनको जोड़ना आरंभ कराना होता है और बच्चे बड़ी आसानी से लेखन क्रिया को सीख जाते हैं और उन्हें ऐसा करने में मजा भी आता है।

(5) अनुरेखन (Tracing) :-


एक कॉपी या वर्कशीट पर एक पेज में एक अक्षर लिख कर नीचे की कुछ लाइनों में उस अक्षर की आकृति के बिंदु बना दें। बाकी लाइनें छोड़ दें और बच्चे से खुद उस अक्षर बनाने को कहें। शुरू - शुरू में बच्चा बिना बिंदु रखे अक्षर बनाने में आनाकानी करेगा, फिर धीरे-धीरे बनाने लगेगा।


इसके बाद इसी तरह से छोटे छोटे शब्द, जैसे - cat, rat, नल, दल, खत आदि लिखाना आरंभ कराया जा सकता है।

 ध्यान रहे बच्चे का मन और मस्तिष्क दोनों ही बहुत नाजुक होते हैं। आपको अपने बच्चों को लिखना सिखाते समय अत्यंत सावधान रहना है और इस बात का ध्यान रखना है कि कहीं आपका बच्चा आपके इस कार्य से ऊब तो नहीं रहा। यदि ऐसा है तो तुरंत उस कार्य में विराम लगा कर बच्चे को खेल-खेल में इसके लिए प्रेरित करें। क्योंकि यदि बचपन में ही बच्चे को पढ़ाई लिखाई बोझ लगने लगेगी तो आपके बच्चे का मन पढ़ाई से भागेगा। अतः बच्चे पर दबाव न डालें और जब जितनी देर बच्चे का मन लगे उतनी देर ही उसे पढ़ाए परंतु पढ़ाई में एक नियमितता जरूर रखें।

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