क्या जुड़वा बच्चे होना अधिक खर्चीला है? Is having twins more expensive?

Is having twins more expensive?
क्या जुड़वा बच्चे होना अधिक खर्चीला है?


जब आपको यह पता चलता है कि आप जुड़वाँ बच्चों की माँ बनने वाली है तो आपके और आपके परिवार के मन में बहुत से सवाल आने लगते हैं जैसे- क्या उनका जन्म समय से पहले हो जाएगा? कहीं वो जन्म के समय जुड़े तो नहीं होंगे? क्या वे जन्म के समय स्वस्थ होंगे ? नॉर्मल डिलीवरी होगी या सी - सेक्शन होगा? और धीरे - धीरे इस बात पर ध्यान जाने लगता है  कि ख़र्चे कितने होंगे?

तो आइए इस लेख में जानते हैं आपके इन कुछ सवालों के उत्तर !
लेकिन उससे पहले हम ये जान लेते हैं कि जुड़वाँ बच्चे कितने प्रकार के होते हैं -
 

जुड़वां के मुख्य प्रकार :-

(1) एक शरीर दो प्राण (Conjoined Twins) :-

जो एक ही शरीर में जुड़े रहते हैं और कुछ को तो अलग कर पाना भी कठिन होता है। ऐसे बच्चों के माता-पिता को बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और बच्चे भी विचित्र और विभिन्न समस्याओं और प्रतिक्रियाओं को झेलते हुए बड़े होते हैं।

(2) एकदम एक से दिखने वाले जुड़वाँ (Identical Twins) :-

Identical twins को Monozygotic Twins भी कहा जाता है। जुड़वा बच्चे जो रंग, रूप, शारीरिक बनावट, चाल ढाल आदि से इतने एक जैसे होते हैं जिन्हें खुद उनकी मां को भी पहचानने में समय लग जाता है। ऐसे बच्चों में बहुत छोटा सा ही कोई अंतर होता है। जैसे एक के मुंह पर तिल होगा दूसरे पर नहीं, एक का होंठ छोटा होगा आदि।

(3) एक जैसे न दिखने वाले जुड़वाँ (Fraternal Twins) :-

Fraternal Twins को Dizygotic Twins भी कहते हैं। ये एक जैसे दिख भी सकते हैं और नहीं भी। वे एक ही समय पे अलग लिंग के हो सकते हैं। इसमें एक ही समय पर माँ के दो अलग अलग अंडे, दो अलग अलग शुक्राणुओं से मिलकर फ़र्टिलायज़ (fertilize) होते हैं। इसलिए ऐसे जुड़वा एक दूसरे से अन्य बच्चों की तरह ही भिन्न होते हैं। 

जुड़वां की समस्याएं :-

1- गर्भवती माँ को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
2- जुड़वाँ बच्चों के माता पिता को नींद की कमी के कारण सही से आराम नहीं मिल पता है।
3- दोनों बच्चे एक साथ भूखे होते हैं तो दोनों को एक साथ स्तनपान कराने में कठिनाई होती है।
4- दो बच्चों को एक साथ बाहर ले जाने में भी परेशानी होती है। 
5- दोनो बच्चों को सुबह स्कूल भेजना, टिफिन बनाना, नहलाना, तैयार करना, बैग लगाना आदि इतने सारे काम मां को अकेले ही करने पड़ते हैं।
6- दोनो बच्चों के लिए सभी चीज़ें एक जैसी ही लानी पड़ती हैं।

जुड़वां के फायदे :-


1- बच्चों को कहीं बाहर जाकर दोस्त बनाने की जरूरत नहीं होती। वह आपस में ही अच्छे दोस्त बन जाते हैं।
2- दोनों जुड़वा बच्चों में बहुत अच्छा कोआर्डिनेशन देखने को मिलता है।
3- ऐसे में बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं, वह एक दूसरे को अपने आप को परिस्थितियों के अनुसार ढालना सीख लेते हैं।
4- जुड़वा बच्चों में आपस में अच्छी भावनात्मक समझ (bonding) होती है। दोनों एक दूसरे के लिए त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
5- जुड़वा बच्चे समस्याएं आपस में ही सुलझा लेते हैं।
6- निर्णय करने की क्षमता ऐसे बच्चों में अच्छी होती है।
7- दोनों बच्चों के बीच चीजें बांटने (sharing) की अच्छी आदत होती है।
8- दोनों ही एक ही से परिवर्तन वाले होते हैं। संवेदनात्मक परिवर्तन (emotional changes) भी एक से दिखाई देते हैं।
9- बच्चों में गुस्सा नियंत्रण (anger managment) बहुत अच्छा होता है क्योंकि कोई बड़ा और छोटा नहीं होता है तो एक दूसरे पर गुस्सा होने की प्रवृत्ति भी नहीं रहती।
10- माता-पिता एक साथ बच्चों की परवरिश कर एक वक्त के बाद फ्री महसूस करते हैं।

अब चलते हैं अपने विषय के मुख्य बिंदु पर-

क्या जुड़वा बच्चों में खर्चा अधिक होता है?


इस बात में कोई दो राय नहीं है कि जुड़वा बच्चों पर खर्चा अधिक होता है।आइए जानते हैं समय के साथ ये ख़र्चे धीरे धीरे किस प्रकार बढ़ते जाते हैं -   

1- अधिकतर ऐसे मामलों में (प्रीमेच्योर डिलीवरी) समय से पूर्व ही जन्म होता है। जिससे नवजात को गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में रखना पड़ता है जिसका अधिक खर्चा होता है।

2- अधिकतर डॉक्टर ऐसे मामलों में नॉर्मल डिलीवरी का खतरा नहीं लेते हैं और c-section ऑपरेशन द्वारा ही बच्चों का जन्म कराया जाता है जिसका खर्च आज के समय में अत्यधिक है।

3- दोनों बच्चों की दो फीडिंग बोतलें, साबुन, तौलिए आदि चीजें दो - दो लानी पड़ती है तो खर्चा भी दोगुना हो जाता है।

4- एक बार में एक बच्चा होने पर कपड़ों और खिलौनों की रीसाइक्लिंग की जा सकती है परंतु जुड़वा बच्चे होने पर यह बिल्कुल संभव नहीं है।

5- वाकर, खिलौने, साइकिल आदि की भी रीसाइक्लिंग नहीं की जा सकती। मतलब यह कि  सभी चीजें दो दो ही लानी पड़ती हैं।
 यहां आपके दिमाग में एक प्रश्न आ रहा होगा कि ऐसा क्या जरूरी है? तो उत्तर साफ है कि

6- जुड़वा बच्चों में भी self या मेरा का भाव जगाना भी आवश्यक होता है। इसलिए समझदार माता-पिता इन जगहों पर समझौता नहीं करते हैं और खुलकर खर्च करते हैं।

7- जुड़वा बच्चों का हर सामान अलग-अलग होने पर उनमें एक मालिकाना अस्तित्व जन्म लेने लगता है जो उनके भविष्य को अच्छा बनाता है इसलिए यह खर्च आवश्यक होता है।

8- "सबसे बड़ा है रोग, क्या कहेंगे लोग" इसके चलते माता-पिता एक बच्चे के लिए सामान नहीं ला सकते, दोनों बच्चों के लिए लाना पड़ता है, तो खर्चा दोगुना हो जाएगा।

9- बच्चों के लिए diaper और daycare का ख़र्च भी दोगुना होता है।

10- प्रीस्कूल की फीस दोगुनी देनी पड़ती है।

11- स्कूल, कॉलेज की फीस और कॉपी किताबों का खर्चा भी दोगुना। 

12- स्कूल वाहन का किराया दो गुना।

13- अतिरिक्त प्रशिक्षण में भी दोगुनी फीस।

14- बीमा भी दो लोगों के लिए। कोचिंग का खर्चा भी दो गुना।

15- फल, मेवा, मिठाई, खाना - पीना, घूमना सब का खर्चा भी दोगुना।

16- हद तो तब हो जाती है जब जन्मदिन पर उनके उपहारों का खर्चा भी दोगुना हो जाता है और उनके बढ़ने के साथ-साथ यह जन्मदिन व्यय भी आसमान छूने लगता है।

17- बड़ा कमरा, दो अलग बेड, अलग-अलग अलमारियां आदि सब का बड़ा भारी खर्चा युवा मां-बाप पर अचानक से आ जाता है।

युवा मन जो पहली बार जुड़वा बच्चों के माता-पिता बनने जा रहे हैं, वो इन खर्चों की परिकल्पना से ही घबरा जाते हैं। यदि जुड़वा बच्चे घर में आने की सूचना मिलने के साथ ही मुद्रा प्रबंधन नीतियां (money management policies) अपना ली जाएं और एक योजनाबद्ध तरीके से खर्चों को संचालित किया जाए तो संभवत जुड़वां पर हो रहे खर्च को आसानी से निभाया जा सकता है।

बच्चों के जन्म से पूर्व ही कुछ पॉलिसीज और बॉन्ड्स लेकर रखना शुरु कर देना चाहिए ताकि समय आने पर जुड़वां बच्चों के बड़े खर्चे पूरे किए जा सकें।

जुड़वां बच्चों को जन्म देना, उन्हें पालना, उन्हें सफल बनाना कोई साधारण कार्य नहीं है। माता पिता को उनकी उम्र कब गुजर गई पता नहीं चलता। पर हां दिल में अपने बच्चों के अच्छे लालन-पालन का सुकून जरूर रहता है। साथ ही बच्चों की आपसी समझ के कारण उनका भविष्य बहुत मजबूत और जमीन से जुड़ी ऊंचाइयों तक पहुंचने वाला बनता है।

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