कोविड-19 और शिक्षा - Online education during Covid-19

कोविड-19 की महामारी के इस दौर में हमारे शिक्षक वर्ग और विद्यार्थी वर्ग दोनों ने ही बहुत तीव्रता के साथ हो रहे आधुनिक परिवर्तनों को अपनाने की दिशा में अपना कदम बढ़ाया है।

परंपरागत तरीकों से चलती आ रही शिक्षा पद्धति को छोड़ते हुए नई डिजिटल शिक्षा या ऑनलाइन (online) शिक्षा पद्धति के साथ आत्मासात (assimilation) करना आरंभ कर दिया है।

महामारी ने ये महसूस करवा दिया है कि यदि हम आधुनिक तरीकों के साथ नहीं चलते हैं तो हम समाज में पीछे रह जाएंगे और अपनी कोई भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा नहीं कर पाएंगे। और यह भी हो सकता है कि हम अपनी आजीविका के संसाधन भी खो बैठे इसलिए समय की मांग के साथ ही आज की शिक्षा के आयाम और तरीके दोनों में ही एक बड़ा परिवर्तन आ गया है जिसे समझे और जाने बिना ना तो शिक्षक पढ़ा सकेगा और ना ही विद्यार्थी पढ़ सकेंगे।


कोविड-19 और शिक्षक:-

परंपरागत (कक्षा अध्यापन) classroom teaching के तरीकों से पढ़ाने वाले हमारे सम्माननीय शिक्षक आज दृश्य श्रव्य कक्षाएं (virtual classes) अपने- अपने स्मार्टफोन में माइक्रोसॉफ्ट, Google meet, zoom जैसे ऐप द्वारा ले रहे हैं। वर्चुअल क्लासेस के सभी आयामों को पूर्व प्रकाशित लेख में वर्णित किया जा चुका है।

शिक्षकों को आरंभ में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और आधुनिक तकनीक अपनाने में समय लगा। परंतु यह भी सच है कि शिक्षक इसे आत्मसात कर लें तो यह बहुत अधिक सुविधा पूर्ण है।

दृश्य श्रव्य ऑनलाइन पढ़ाई से शिक्षकों को लाभ:-

(1) प्रश्न पत्र बनाने और उसे सुरक्षित रखने के लिए कागज, कलम, फाइल, पेपर, पेन आदि की कोई ज़रूरत नहीं है।

(2) अपनी पाठन सामग्री को पूर्व से ही तैयार करने की आवश्यकता नहीं।

(3) ऑनलाइन बनाए गए प्रश्न पत्रों की स्वत: जांच (automatic correction) हो जाता है। अतः कॉपी जांचने के कार्य से छुटकारा।

(4) कार्य क्षमता का दुरुपयोग नहीं होता।

(5) Audio और वीडियो द्वारा बच्चों तक पाठन सामग्री भेजना आसान होता है।

(6) अपने वीडियो न बना पाने की स्थिति में यूट्यूब पर आपके विषय से संबंधित वीडियोस को ढूंढ कर अपने छात्रों को भेजकर उनकी पढ़ाई कराना आसान हो गया।

(7) परंपरागत पद्धति से अधिक आरामदायक और सरल है यह आधुनिक पद्धति परंतु अभी कुछ शिक्षक इस आधुनिक तकनीक को आत्मसात नहीं कर पा रहे हैं।
आपको बिना किसी परेशानी के इस तकनीक के इस्तेमाल को शुरू करें आपको स्वयं भी बहुत अच्छा महसूस होगा।

(8) पाठ्यक्रम का संकुचन (contraction) और विस्तार (extension) करना बहुत आसान हो जाता है।

(9) पूरे वर्ष का कार्यक्रम और पाठ्यक्रम निर्धारण करना आसान हो जाता है।

(10) व्यक्तिगत तौर पर या समूह में किसी भी पाठ को समझना अत्यंत ही सरल और सुविधाजनक है।

(11) किसी भी पाठ की व्याख्या को रिकॉर्ड करके कई बार विद्यार्थियों को रिवीजन के लिए भेजा जाना आसान होता है।

(12) आप अपने साथी शिक्षकों का भी विषय वार समूह (subject wise group) बनाकर उनसे भी अपने बच्चों को ऑनलाइन टिप्स दिलवा सकते हैं।

(13) पाठ से संबंधित नोट्स आसानी से भेजे जा सकते हैं।

Online परीक्षा:-

इस आधुनिक तकनीक में परीक्षा को दो भागों में बांट कर समझना आसान होगा :-


(1) बहुविकल्पीय परीक्षा पद्धति (multiple choice exam) -

 
A- सरल बहुविकल्पीय प्रश्न (simple multiple choices)
B- खाली जगह भरो (fill in the blanks)
C- खोजो और भरो (find the missing)
D- मिलान करो (match the picture)
E- कुछ अन्य परंपरागत तरीके भी प्रयोग किए जा सकते हैं।

(2) कक्षा परीक्षा पद्धति (classroom exam) -


A-  प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार (direct personal interviews)
B-  ऐप पर मौखिक प्रश्नोत्तरी (verbal questions)
C- पद्य देकर व्याख्या पूछना।
D-  वस्तु विषय प्रदान कर पत्र लेखन करना।
E- गद्यात्मक लंबे प्रश्न देखकर समय सीमा निर्धारण पर वापस मांग कर जांच करना आदि।

 परीक्षा सुरक्षा (exam security):-


आधुनिक तकनीक के प्रयोग में भी सुरक्षा के अनेक तरीके हैं, जिन्हें अपनाकर नकल या कोई और व्यवधान रोका जा सकता है।
(1) पासवर्ड की सुरक्षा
(2) समय सीमा निर्धारण की सुरक्षा (restrict time limit)
(3) आवश्यक कार्य पूर्ति (compulsory completion of work)
(4) आरंभ समय और अंतिम समय के मध्य परीक्षार्थी परीक्षा को छोड़कर न जा सके, न बीच में आ सके उसके लिए URL code द्वारा समय निर्धारण।

शिक्षकों की तैयारी :-


अब आप अपने आप को इस ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली में कैसे सफल बनाएं उसके कुछ टिप्स नीचे दिए जा रहे हैं :-

(1) ऑनलाइन पढ़ाई कराते समय, आप नज़र आपके फोन की स्क्रीन पर रखें और अपने छात्रों को उनके मोबाइल के कैमरे को ऑन रखने को कहें ताकि आप उन्हें देख सके कि वह क्या कर रहे हैं।

(2) अपने छात्रों के मोबाइल का माइक पढ़ाते समय बंद करा दें ताकि आपकी आवाज़ सही से बच्चों तक पहुंचे।

(3) बच्चों का कैमरा on रहने से उनका निरीक्षण (monitoring) अच्छी तरह से होगा और किसी प्रकार की चीटिंग पर नज़र रखी जा सकेगी।

(4) एक चैट बॉक्स का निर्माण करें ताकि उसके द्वारा बच्चे परेशानी रहित वार्तालाप कर सकें।

(5) एक दिन में सीमित बच्चों के टेस्ट लें, ताकि उन्हें मौखिक प्रश्न पूछ कर भी टेस्ट लिया जा सके।

(6) ऑनलाइन परीक्षाओं की संपूर्ण जानकारी बच्चों को दें और परीक्षा के हफ्ते भर पहले से बच्चों को इसका अभ्यास भी कराएं, जिससे बच्चे मल्टीमीडिया टूल्स का सही प्रयोग सीखें और करें।

(7) आपके द्वारा की जाने वाली सभी चीजें समन्वित और स्पष्ट हो।

(8) परीक्षा के समय विषय अध्यापक अपने मोबाइल की स्क्रीन पर ही उपस्थित रहें ताकि बच्चे को यदि कुछ पूछना हो तो पूछ सके।

(9) हो सके तो शिक्षक को अपना ईमेल, चैट बॉक्स, कॉलिंग, व्हाट्सएप ऑन रखना चाहिए। ताकि वह अपने छात्रों की आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता कर सकें।

(10) प्रश्न पत्र इस बात को ध्यान में रखकर बनाया जाए जाना चाहिए कि मानो यह खुली किताब परीक्षा (open book exam) हो।

विद्यार्थियों की ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी:-


(1) Online test के format को समझने के लिए अतिरिक्त समय लगाएं।

(2) स्वयं ऑनलाइन पेपर बना कर समय सीमा के भीतर उसे सॉल्व करने का अभ्यास करें।

(3) इंटरनेट से अनेक प्रश्न पत्र डाउनलोड करके उनका अभ्यास करें।

(4) परीक्षा आरंभ होने से पूर्व अपना कंप्यूटर मोबाइल दोनों चेक करें।

(5) साथ में यह चेक करना ज़रूरी है कि इंटरनेट सही से चल रहा है या नहीं।

(6) घर में सब से शांतिपूर्ण जगह का चुनाव करें जहां बैठकर बच्चे ऑनलाइन परीक्षा दे सकें।

(7) परीक्षा के बीच में कोई बाधा न आने दें, नहीं तो आप पेपर समय पर समाप्त नहीं कर पाएंगे।

(8) समय सीमा पर भी नज़र बनाए रखें।

(9) अपने शिक्षक या आयोजक के संपर्क में रहें।

(10) पेपर सबमिट करने से पहले एक बार फिर से चेक कर लें।

(11) अगर परीक्षा के बीच में कोई तकनीकी खराबी आ जाती है तो परेशान न हों और अपने शिक्षक या परीक्षा आयोजित से संपर्क करें।

(12) अपने ऊपर और अपनी पढ़ाई पर भरोसा रखें।

(13) अपना सभी सामान सुव्यवस्थित करके रखें ताकि यदि आवश्यकता पड़े तो उसे जल्दी से प्रयोग में लाया जा सके।

यदि शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही आज इस कोरोना की जंग में अपनी जीत का झंडा लहराना चाहते हैं, तो उन्हें ऑनलाइन शिक्षा पद्धति को आत्मसात करना ही पड़ेगा और यही आज के समय की मांग है, नहीं तो आप बहुत पीछे रह जाएंगे।

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