ई शिक्षा क्या है और हम इसकी समस्याओं से कैसे छुटकारा पा सकते हैं?

What is E-education and how can we overcome the problems related to it:-

ई शिक्षा क्या है और इसके आयाम :-

ई शिक्षा के इस विषय को हम दो अलग-अलग भागों में अपने आलेख में प्रस्तुत करेंगे :-



1- ऑनलाइन शिक्षा के आयाम (Dimensions of online classes)

2 - अपने शिक्षकों और विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं के लिए और परीक्षाओं के लिए कैसे तैयार करें (How to prepare faculty and students for online classes and examination)


प्रस्तुत लेख :-

1:- ऑनलाइन शिक्षा के आयाम ( Dimensions of online education):-

पुराने समय के श्यामपट्ट (blackboard) से लेकर आज के स्मार्टबोर्ड (smartboard) तक का सफ़र देखते हुए परिवर्तन की इस धारा के साथ बहना आज की आवश्यकता है। दृश्यश्रव्य (audio visual) प्रणाली के द्वारा शिक्षा को आकर्षक और रुचिकर बनाने की कोशिशें निरंतर ही की जाती रही हैं।

कोरोना महामारी के चलते ऑनलाइन शिक्षा ने बहुत ज़ोर पकड़ लिया है। छोटे- छोटे स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा तक, सभी ई-शिक्षा प्लेटफार्म की तरफ बढ़ रहे हैं।

ई-शिक्षा में इंटरनेट और अन्य संचार उपकरणों / माध्यमों जैसे :- मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, आईपैड आदि के द्वारा शिक्षण कार्य को किया जाता है। यहाँ तक कि इसमें वर्चुअल क्लासरूम (आभासी कक्षा/virtual classroom) जैसी चीज़ें भी शामिल हैं। अगर आज के समय में हम देखे तो रियल टाइम लर्निंग (सीखने का वास्तविक समय) की इस व्यवस्था में ऑनलाइन (सीधे संचार) प्रणाली के उदाहरण:- लाइव चैट (सीधी बातचीत), ऑडियो-विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग (दृश्य श्रव्य संचार सभा) तथा वर्चुअल क्लासरूम (आभासी कक्षा) की मदद से विद्यार्थी और शिक्षक अपने-अपने घरों से विषय को सीख सकते हैं तथा स्टडी मटीरियल (अध्ययन सामग्री) प्राप्त भी कर सकते हैं।

अगर लाइव क्लास (सजीव कक्षा) की उपलब्धता नहीं है, तो ब्लॉग, वीडियो अथवा ई-बुक्स से भी ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त हो सकती है। इसका लाभ उनको मिलता है जो अपनी सुविधानुसार समय पर पढ़ना चाहते हैं।

भारत में ई-शिक्षा अपनी आरंभिक स्थिति में है और बहुत लम्बा सफ़र तय करना है किन्तु जिस दृढ़ निश्चय के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (information technology) मंत्रालय इसमें रूचि दिखा रहा है, उससे इस क्षेत्र में निवेश (investment) व अनुसन्धान (research) को काफी प्रोत्साहन मिलेगा। आवश्यक तकनीक, उपकरण, पठन-पाठन की सामग्री की उचित व्यवस्था होगी।

ई-शिक्षा के उभरते विशाल बाज़ार में इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं की निरंतर बढ़ती संख्या संभावनाओं को पंख लगा रही है।

  • सरकार *स्वयं (SWAYAM)* जैसे एकीकृत मंच तैयार कर रही है  जहाँ कक्षा 9 से लेकर स्नातकोत्तर (PG) स्तर तक की पढ़ाई ऑनलाइन तरीके से हो सकती है।साथ ही *स्वयं प्रभा (SWAYAM Prabha)* का मंच जिसमे डायरेक्ट टू होम (Direct to Home यानी- DTH) चैनल्स के द्वारा 24X7 उच्च गुणवत्ता(quality) वाले शैक्षिक चैनल (educational channels) विविध विषयों (different subjects ) पर सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है । यह उन क्षेत्रों के लिए विशेष तौर पर लाभकारी है।जहाँ इन्टरनेट जैसी सुविधाओं का आभाव है।

  • देश में *राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी (National Digital Library)* की परिकल्पना को लाने की योजना का आना, जिसमे Single Window Search Facility के माध्यम से लगभग 3 करोड़ से अधिक डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता हेतु लगभग 20 लाख सक्रिय उपयोगकर्त्ताओं के साथ 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का इसमें अपना पंजीकरण (registration) कराया गया है।यह अपने आप में ऐतिहासिक माना जा सकता है और डिजिटल की दुनिया में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा।

  • इसके अलावा *स्पोकन ट्यूटोरियल (Spoken Tutorial)* द्वारा ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर पर 10-10 मिनट के २२ भाषाओँ में नि:शुल्क ऑडियो-वीडियो ट्यूटोरियल उपलब्ध हैं। 

  •  शिक्षा के लिए फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (Free and Open Source Software for Education) द्वारा ट्यूटोरियल्स, जागरूकता कार्यक्रम, कॉन्फ्रेंस, ट्रेनिंग वर्कशॉप इत्यादि इंटर्नशिप के माध्यम से किया जा रहा है।

  • *इंटरेक्टिव सिमुलेशन एन्वायरनमेंट (Interactive Simulation Environment)* इसके द्वारा रियल टाइम वातावरण (Enviornment) एवं समस्याओं को समझने तथा उसके निराकरण की क्षमता के विकास हेतु लगभग *225 वर्चुअल लैब (Virtual Lab)* का संचालन हो रहा है। जिससे लगभग 15 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।

  • *ई-यंत्र (e-Yantra)* भी एक महत्वपूर्ण परियोजना है। जिसमे एम्बेडेड सिस्टम (Embedded Systems) तथा रोबोटिक्स (Robotics) की मदद से इंजीनियरिंग छात्रों को कोडिंग आदि दिखाए जाने की योजना है।

  • ई-शिक्षा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अपनी जगह, अपने समय व अपनी सुविधानुसार  प्राप्त की जा सकती है। साथ ही जानकारी किताबों की बजाय वेब आधारित स्टडी मटीरियल के द्वारा भी मिल जाती है, तथा इसकी लागत भी कम होती है।

  • किन्तु ई-शिक्षा में आत्म अनुशासन की अति आवश्यकता है। साथ ही अगर इन्टरनेट कनेक्शन सही न हो तो भी मुश्किल होती है। बहुत से छात्र बिना शिक्षक के नहीं पढ़ सकते, यह ई-शिक्षा के समक्ष एक बड़ी चुनौती है।

  • एक अहम बात और कि वर्चुअल क्लासरूम में प्रैक्टिकल या लैब वर्क करना मुश्किल होता है जो कि विज्ञान सम्बन्धी विषयों की गुणवत्ता परख शिक्षा पर एक प्रश्नवाचक चिन्ह है।

  • देश के अनेक ऐसे इलाके हैं, जहाँ शहरी क्षेत्रों की भांति विद्युत व्यवस्था नहीं है। यह ई-शिक्षा की पहुँच में बहुत बड़ी रुकावट है।

अपनी इच्छा शक्ति व ऊर्जा के निवेश से हम सभी दूरगामी एवं भविष्य की नई शिक्षा प्रणाली का लाभ उठा सकेंगे।

डिजिटल इंडिया देश को आगे ले जाने में सक्षम है, और विश्व पटल पर हमें अग्रणी बनने हेतु आवश्यक भी है।

तो चलिए डिजिटल बने और ई-शिक्षा को अपनाकर अपने को शेष विश्व से जोड़कर आगे बढ़ने का प्रयत्न करें।

इस लेख के दूसरे भाग को अगले अंक में प्रकाशित किया जाएगा ।

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