बच्चों को वित्तीय शिक्षा (Financial Education for kids)

 बच्चों को वित्तीय शिक्षा 

(Financial Education for kids)


वित्तीय शिक्षा, उसका महत्व, लाभ, बच्चों पर प्रभाव, उनका भविष्य निर्माण आदि बातें आपको आसानी से समझ में आ सके इसलिए इस लेख में किस उम्र से बच्चों को वित्तीय शिक्षा देना शुरू करें? और कैसे शुरू करें पर बात करेंगे। 



वित्तीय शिक्षा अर्थात् Financial Education। यह एक बहुत वृहत विषय है जिसे सैद्धांतिक रूप से (theoretically) समझ पाना आसान नहीं है। परंतु अगर हम इसे रोज़मर्रा के जीवन से जोड़कर समझे तो इसकी जटिलता कम हो जाएगी। हम आपको इसी सरल तरीके से वित्तीय शिक्षा को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

वित्त जिसको हिंदी में अर्थ के नाम से भी जाना जाता है। अर्थ यानी धन, अब इस बात को इस प्रकार से समझे कि यदि अर्थ (धन) है, आपके पास तो आप सभी सुख-सुविधाओं के मालिक हैं और यदि आपके पास धन नहीं है तो आप अर्थहीन, सम्मानहीन और गरीब कहलाते हैं।

तो जब हम एक ऐसे समाज में रहने वाले सामाजिक प्राणी (social animal) हैं जहां पैसे अर्थात् धन अर्जन को सर्वोपरि रखा जाता है तो यह जानना हमारे लिए पूरे परिवार के लिए बहुत जरूरी हो जाता है कि हम धन कैसे कमाएं? किस उम्र से कमायें? कैसे उसे बचायें? उसको कैसे बढ़ाएं? उस धन से कैसे आर्थिक सामाजिक और मानसिक सुरक्षा प्राप्त करें?

आजकल के युवा माता-पिता अपने बच्चों को बहुत छोटी सी उम्र से ही आत्मा निर्भर बनने की आदत को विकसित करना आरंभ कर देते हैं। 

उसके दो मुख्य कारण हैं -

1) पहला माता-पिता दोनों नौकरी करने वाले होते हैं तो बच्चों की आत्मनिर्भरता उनके लिए आरामदायक सिद्ध होती है।

 2) दूसरा बच्चे अनायास ही जीवन को जीने और स्थितियों के साथ तालमेल करना सीखते हुए हर स्थिति को समझते हुए बड़े होते हैं।

 ऐसे में उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी पाठ बचपन से ही पढ़ाया जाए तो उनकी आगामी आर्थिक सुरक्षा अपने आप ही सुनिश्चित हो जाती हैं। इस लेख का आशय यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चों से अपनी आजीविका (livelihood) की बात कर उन्हें धन अर्जन के लिए प्रेरित किया जाए। 

बल्कि इस लेख द्वारा बच्चे को धन के सही समय पर, सही तरीके से, सही जगह पर प्रयोग करने की शिक्षा देने से है। यह शिक्षा कैसे दे कुछ बिंदु प्रस्तुत है:-

1) ज़िद- बच्चे की हर ज़िद को पूरा न करें और पूरा न करने के पीछे के आर्थिक और सामाजिक कारणों को उसे समझाएं। 

यदि आप ज़िद पूरी करना चाहते हैं तो भी उसे तुरंत पूरा न करें वरना बच्चा को चीजों का मूल्य (वैल्यू) नहीं समझेगा और पैसे की बर्बादी होती रहेगी।

2) बचत (किफ़ायत)- बच्चे के अंदर बचपन (ढाई वर्ष) की अवस्था से ही अपने चीजें संभालने, उन्हें ठीक से रखने, खाना पूरा खाने, पानी न फेंकने, कागज न फाड़ने, खिलौनों को न तोड़ने आदि की आदत डलवाएं। 

इस तरह वह हर चीज़ में बचत या किफ़ायत करने का आदी हो जाएगा और जैसे-जैसे वह बड़ा होगा उसे यही बात पैसों के संबंध में भी सिखाना शुरू करें, जिससे बड़े होने पर वह पैसे की अहमियत समझ सके।

3) गुल्लक (Piggy Bank) की आदत - साल में कोई भी एक बड़ा त्यौहार चुन लें। जिसमें हर साल अपने बच्चे को नया गुल्लक लाकर दें और उसके पुराने गुल्लक को तोड़ कर उसमें जमा किए गए पैसे गिन कर के बच्चे के नाम पर बैंक में खाता खोलकर उसमें डालें। 

आगामी वर्ष में पिछले वर्ष से अधिक पैसे जोड़ने की सीख के साथ नई गुल्लक का श्रीगणेश बच्चे से कराएं, धीरे- धीरे से उसकी आदत बन जाएगी और वह बचत कर पैसे बचाना सीख जाएगा।

4) जेब खर्च (पॉकेट मनी) - जब आपका बच्चा 5 वर्ष या इसके ऊपर हो जाए तो उसे जेब खर्च देना शुरू करें और उसको दिए गए पैसों का हिसाब उससे मांगे। आपके द्वारा दिए गए पैसों में ही उसे पूरे महीने का अपना खर्चा चलाने को कहें। कभी कभी जबरदस्ती की आर्थिक तंगी का दिखावा करें और अपने बच्चे से उसकी पॉकेट मनी से कुछ पैसे मांगे इससे बच्चे को अपने ऊपर गर्व होगा और वह आपकी मदद करने और खुश करने के लिए पैसे बचाने लगेगा। 

इस तरह की उसकी बचत को किसी सही जगह निवेश करके बच्चे के अंदर निवेश की आदत का विकास करें।

आपका अपने बच्चों के द्वारा बचाए गए पैसों का सही दिशा और सही जगह किया गया निवेश न सिर्फ आपके बच्चे को आर्थिक मजबूती देगा बल्कि उनके बड़े होने पर उनका वही पैसा उनके लिए आर्थिक उन्नति के अलग-अलग रास्ते भी खोलेगा। दूरदर्शी माता पिता होने के नाते आप अपनी बढ़ती उम्र में बच्चों की चिंता से मुक्त रहेंगे और अपने जीवन का भरपूर आनंद लेंगे।

No comments:

Post a Comment