मानसिक तनाव और बच्चे (Mental stress and children)

आज से 25-30 साल पहले बच्चे अपने जीवन को भरपूर आनंद से जी रहे थे। हर त्यौहार बड़ी धूमधाम, हर्षो उल्लास से मनाते थे। खेलना-कूदना, खाना-पीना, मौज-मस्ती करना और इन सब के साथ अपनी पढ़ाई करना और अपने जीवन को बिना तनाव के जीते थे।

परंतु आज का वातावरण (atmosphere) बिल्कुल अलग हो गया है। बच्चा पैदा बाद में हो रहा है और प्रतियोगिता (competition) पहले अपना मुंह फैला कर खड़ी है।



ऐसे में जब होने वाली मां और पिता तनाव में रहते हैं तो उसका अनुवांशिक (जेनेटिक) असर बच्चे पर भी पड़ता है और उसके जन्म के बाद से ही वह अपने घर का वातावरण तनावपूर्ण ही देखता है और अपने ऊपर एक अनदेखा, अंजाना, अनचाहा दबाव महसूस करता है और स्वतः मानसिक तनाव का शिकार होता चला जा रहा है।

संसार के समस्त प्राणियों में मनुष्य सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि उसके पास सोचने, समझने के लिए भगवान ने बुद्धि की शक्ति दी है। आज की पीढ़ी अति बुद्धिमान है लेकिन उनका मार्ग परिवर्तित हो चुका है। इसका कारण समस्त प्राणियों में आज मनुष्य सबसे नाजुक, आराम तलब, सुखचैन का इच्छुक और कर्म शीलता का भिखारी बन गया है। मतलब वह कर्म हीनता (यानी काम न करना) की तरफ बढ़ गया है। जब तक उसके अंदर ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा नहीं जगेगी तब तक उसका उत्थान नहीं हो सकता।

ज्ञान से ही कर्म बनता है इसीलिए तो राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी बरसों पहले ही लिख गए हैं-
काम करो कुछ काम करो ।। जग में रहकर कुछ नाम करो।।

कर्म करे बिना सुख पाने की इच्छा रखने के कारण कि आज का युवा अनेकों मानसिक विकारों से भर गया है।

मानसिक तनाव के कारण (Causes of mental stress)-

(1) भौतिकवाद (Materialism)-
बढ़ता हुआ दिखावा ही भौतिकवाद है और आज की पूरी दुनिया दिखावे की है।

(2) हर क्षेत्र में आपसी प्रतियोगिता चाहे वह पढ़ाई लिखाई हो, खेलकूद हो, फैशन हो, घूमना फिरना हो या कुछ और एक दूसरे से आगे रहने की प्रवृत्ति तनाव का कारण है।

(3) बात बात पर गुस्सा होना या गुस्सा सहना दोनों ही तनाव के कारण हैं।

(4) अवसाद तनाव का एक प्रमुख कारण है जो मनपसंद काम को न कर पाने या मनपसंद वस्तु या व्यक्ति न मिलने के कारण हो जाता है।

(5) किसी भी विषय पर लगातार सोचते रहना या चिंता करना आपको चिंताग्रस्त स्थिति में ला देता है और आप तनाव महसूस करते हैं।

(6) अधिक से अधिक पा लेने का लालच आपको हर समय तनाव में रहने को मजबूर करता है।

(7) अत्यधिक दबाव में रहते हुए यदि आप कोई काम करते हैं तो छोटी सी गलती भी आपको अपराध बोध कराती रहती है और आप तनाव में रहते हैं।

(8) किसी भी काम को करने से पहले या बाद में आप अपने को दूसरों से कम समझते हैं यानी आप low-self esteemed रहते हैं तो भी आप तनाव में रहेंगे।

(9) यदि आपके परिवार में कोई बीमार या बूढ़ा है और उसकी सेवा आदि कर रहे हैं ऐसे में यदि आप अपने को समय नहीं दे रहे हैं तो भी आप अपने तनाव का अनुभव करते हैं।

(10) आपके सामने कोई अप्रिय घटना जैसे- चोरी, आगजनी, भूकंप, बाढ़, बलात्कार या मारपीट आदि घटी हो जिससे आप चाहकर भी भूल नहीं पा रहे हैं तब भी आप तनाव की गिरफ्त में रहते हैं।

कैसे पहचाने कि आप तनाव में हैं (Recognition)-

(1) सबसे पहला असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है आप अपने को कमजोर और बीमार महसूस करते हैं।

(2) आप अपने घर पर अपने सगे संबंधियों से दूरियां बढ़ाने लगते हैं उनसे बातचीत करना भी पसंद नहीं करते हैं।

(3) कभी-कभी अत्यंत आक्रामक (aggressive) हो जाते हैं।

(4) आप अपने ऊपर से अपना विश्वास खोने लगते हैं।

(5) अनेकों तरह की संवेदनात्मक समस्याओं के शिकार बनते जाते हैं।

(6) दैनिक (daily) कार्यों में जीवन शैली में बदलाव आने लगता है।

(7) दूसरों से अपनी तुलना कर अपने पास पैसे की कमी महसूस कर अपने को कोसते हैं आदि।

मानसिक तनाव दूर करने के उपाय (Remedies to check mental stress)-

(1) रोज व्यायाम (exercise) करें।

(2) पौष्टिक (healthy) आहार ले।

(3) घर में खुशबूदार अगरबत्ती, धूपबत्ती या मोमबत्ती को जलाना आरंभ करें।

(4) चाय-कॉफी आदि का सेवन कम करें जिससे कैफीन की मात्रा आपके शरीर में कम होगी और आपकी आक्रामकता में भी कमी आएगी।

(5) जब, जहां, जैसे ही मौका मिले हंसने-हंसाने के बहाने ढूंढिए  खुद भी हंसिए और दूसरों को हंसाए।

(6) अपने परिवार व रिश्तेदारों के साथ अधिक समय बिताएं।

(7) ध्यान (meditation) का अभ्यास करें।

(8) अच्छी नींद (sleep) बहुत ही आवश्यक है।

(9) अपने अंदर आत्मविश्वास पैदा करें।

(10) रोज कुछ ना कुछ जरूर लिखें मन नहीं भटकेगा।

(11) संगीत (music) को अपना साथी बना लें। यह आपको हर तरह के तनाव से एक सच्चे दोस्त की तरह बचाएगा।

(12) योगा करना आरंभ करें जिसमें प्राणायाम की सारी प्रक्रियाएं जरूर करें। जिससे मानसिक संतुलन विकसित होगा।

(13) कभी-कभी, कहीं कहीं, किसी ना किसी बात के लिए नहीं कहना भी सीखें। यह आप को बल प्रदान करेगा।

(14) दिल खोल कर घूमना फिरना, बात करना, लोगों से मिलना जुलना शुरू करें। आप का दायरा बढ़ेगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

(15) अपनी प्राथमिकताओं का चुनाव कर उन्हीं के अनुसार ही कार्य करें।

(16) नई-नई चीजों का अन्वेषण करें आपको मजा आएगा।

अंत में इतना ही समझ लें की मानसिक तनाव कोई बीमारी नहीं है। इसके लिए किसी चिकित्सक की जरूरत नहीं है। जरूरत सिर्फ अपने आप को बदल कर मानसिक दबाव पर दबाव बनाकर उसे दूर करने की है, जो कोई कठिन कार्य नहीं है। बस आपका एक दृढ़ निश्चय आपको विजय दिला सकता है।

एक कदम बढ़ाए तो सही अपने मानसिक दबाव को हटाने की तरफ।

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