बच्चों को तैरना कैसे सिखाएं और ये क्यूँ आवश्यक है ? How to teach your child to swim & its benefits

बच्चों को तैरना कैसे सिखाएं?
बच्चों के लिए तैराकी सीखना क्यों आवश्यक है?

सबसे पहले हमारे लिए यह जानना आवश्यक है कि क्या तैरना सीखना बच्चों के लिए आवश्यक है? अनेकों अध्ययनों से पता चला है कि पूर्व काल में हर व्यक्ति को तैरना आता था और व्यक्ति नदी तट पर ही स्नान आदि करने जाता था, चाहे वह स्त्री हो या फिर पुरुष। इससे सुबह की शुद्ध हवा और कलक करती नदी के बहते शुद्ध जल से तन और मन दोनों ही बलिष्ठ व मजबूत बने रहते थे और लोग सैकड़ों वर्षो का निरोगी जीवन जीते थे।

परंतु आधुनिकता के विकास के साथ ही साथ सब कुछ सिमटता तक चला गया और अब सब अपने अपने घरों में ही सीमित रह कर (स्नान ग्रह) बाथरूम का प्रयोग करते हैं।

यदि आज के परिपेक्ष में देखें तो अमेरिका को अत्याधुनिक देश कहा जाता है। अमेरिका में संचालित एक अमेरिकी एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की रिपोर्ट को पढ़े तो हमें पता चलता है कि " बच्चों के लिए डूबने के खिलाफ सुरक्षा की एक परत के रूप में औपचारिक तैराकी के सबक को आवश्यक माना गया है और स्कूली स्तर पर ही तैराकी की शिक्षा को पाठ्यक्रम में अनिवार्य अंग बनाने की सिफारिश की गई है।"

मुख्य कारण यह है की तरह की सभी शारीरिक व्यायामो की रानी है। तैरने से शारीरिक बनावट को एक गठीला और आकर्षक आकार प्राप्त होता है और साथ ही लंबाई भी बढ़ती है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय तैराक को देखते ही हम उसकी शारीरिक बनावट की प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाते।

नदी में तैराकी को यदि अनिवार्य कर दिया जाए तो दो लाभ भी होते हैं- पहला शरीर की थकान व चर्म रोग अपने आप ही गायब हो जाते हैं, दूसरा यह कि जब हम नदियों का प्रयोग में स्नान आदि के लिए करेंगे तो उन्हें व उनके आसपास सफाई रखना भी जरूरी हो जाएगा। इससे स्वच्छ वातावरण बनेगा और प्रदूषण का स्तर भी घटेगा।
 
आइए जानते हैं कि बच्चों को तैराकी सिखाने के क्या-क्या लाभ हैं-


 (1) भारत जैसे अनेक ऋतुओ वाले देश में हर वर्ष बाढ़ का एक खतरा मंडराता रहता है। ऐसे में यदि हम सब तैरना जानते हैं तो कम से कम जान का खतरा तो समाप्त ही किया जा सकता है।

 'माल जाए तो फिर बन जाए जान जाए तो वापस ना आए' इसीलिए बाढ़ की आपदा में तैराकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(2) रोमांचकारी क्रिया :-

तैराकी एक ऐसा व्यायाम है जिसमें बिना ठोस आधार के शरीर को तरल बहते या स्थिर जल में लोटाने का कार्य करना होता है और असंभव कार्य को करने का रोमांच तैराक को समय पर निर्णय लेकर अपने को तैयार करने में सहायक होता है।

(3) सुरक्षा अनुभूति :- 

एक कुशल तैराक अपने को हर स्थिति में सुरक्षित महसूस करता है क्योंकि वह तैराकी के गुण को सीखने के साथ विषम परिस्थितियों से समन्वय करना सीख जाता है।

तैराकी की क्रिया मुख्यता श्वसन तंत्र को नियंत्रित करने की क्रिया है जो कभी भी किसी भी स्थिति में हमें अपने शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा कर पाने में मदद करती है। जिससे हम कम ऑक्सीजन वाली जगह पर भी अपने को सुरक्षित रख पाने में सफल हो जाते हैं।

(4) जल कौशल और स्वास्थ्य :-

 जल क्रीड़ा करने से शरीर की रक्त तंत्रिकाओं का पूर्ण रूप से क्रियाशील हो जाती हैं जिसके कारण रक्त संचार अच्छी तरह से होता है। जो शरीर को बल प्रदान करते हुए हमारे स्वास्थ्य में वृद्धि करने में सहायक होता है।

 अपने बच्चों को तैराकी कैसे सिखाएं?

 आप सोच रहे होंगे कि बच्चों के लिए जब तैराकी इतनी महत्वपूर्ण है तो उन्हें तैराकी सिखाना कैसे आरंभ करें?

1) पानी से परिचय-

 सबसे पहले बच्चों को पानी का पूरा परिचय देना जरूरी है जोकि है H2O यानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अर्थात श्वसन प्रक्रिया के लिए आवश्यक  ऑक्सीजन और रक्त के तरली करण के लिए हाइड्रोजन के दो अणु दोनों ही इसमें मौजूद रहते हैं। तो पानी फेफड़ों और ह्रदय को मजबूत करता है। यदि यह दोनों को एक साथ स्वस्थ और मजबूत बनाना है तो जल क्रीड़ा से उत्तम कुछ भी नहीं।

2) सुरक्षा उपायों की जानकारी- 

बच्चों को यह बताना अत्यंत आवश्यक होता है कि वह अकेले यानी बिना किसी बड़े की निगरानी के पानी के पास ना जाएं।

A) यहां पर माता-पिता को विशेष ध्यान रखना है कि उनके बच्चे अपने दोस्तों मित्रों के कहने पर उनके साथ कभी भी किसी तरणताल या नदी तट पर न जाएं, चाहे उन्हें तैरना क्यों ना आता हो। ऐसे में बच्चे का अति आत्मविश्वास घातक सिद्ध हो सकता है।
 तो जब भी बच्चा तरणताल जाए तो आप उसके साथ ही रहे।

B) तरणताल में उतरने से पूर्व उसे स्वच्छ जल से स्नान करके तब तैरने उतरना चाहिए।

C) सिर पर स्विमिंग कैप का प्रयोग आवश्यक है। 

D) स्विमिंग गोगल्स यानी तैराकी के समय चश्मा लगाना जरूरी है क्योंकि तरणताल के पानी में को साफ रखने के लिए क्लोरीन का प्रयोग किया जाता है जो कि आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

E) बच्चे के पास अपनी स्विमिंग रिंग्स होनी चाहिए। आरंभ में उसके सहारे तैराकी सीखने और बाद में जरूरत पड़ने पर उसका प्रयोग लाइफ सेविंग के लिए किया जा सकता है।

G) लाइफ जैकेट भी बच्चों और अभिभावकों दोनों के पास होनी चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर माता या पिता उसे पहनकर बच्चे की जीवन की रक्षा कर सकें।

H) माता-पिता इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चा जिस भी तरणताल में तैराकी सीखने जाता है वहां पर एक लाइफगार्ड की नियुक्ति अवश्य हो। बिना लाइफगार्ड वाले पूल में बच्चे को न भेजें।

I) पूल में अंदर जाने और पूल से बाहर आने की प्रक्रिया को ठीक प्रकार से किया जाना चाहिए अन्यथा किसी स्थिति में चोट लगने पर गिरने का डर बना रहता है।

J) बाहर आने के बाद जल से स्नान करना अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि एक पूल में कई लोग तैरने आते हैं और उनके शरीर में स्थित जीवाणु पानी में समाहित हो जाते हैं और दूसरों के शरीर तक पहुंचते हैं। तो बाद में शॉवर लेने और बदन को साबुन और शैंपू से साफ कर लेने पर यह खतरा नहीं रहता है।


खतरों के चक्कर में कहीं तैराकी के महत्व और उसकी आवश्यकता को भूल न जाएं इसलिए हमें बचपन से ही बच्चों का तैराकी के प्रति रुझान उत्पन्न करना चाहिए। उनका यह रुझान बाथरूम से शुरू होकर घर के अन्य टब में बुलबुले उड़ाने से, मछलियां पानी में डालकर उनको पकड़ने और गिनने से तरणताल तक ले जा सकते हैं और इन प्रक्रियाओं से हम उनको सावधानियों को आसानी से समझा सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें जो भी बचपन में आप बच्चों को सिखाते हैं उन्हें उम्र भर याद रहती है। 

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