How to take care of babies during fever? बुखार में बच्चों की देखभाल कैसे करें?

 हमारे घर में छोटे बच्चों से काफी रौनक रहती हैं। उन्हें हंसता खेलता देख सभी खुश रहते हैं। उनके खाने-पीने के साथ सभी चीजों का ध्यान रखा जाता है। बच्चे के आते ही घर में बहुत से बदलाव आ जाते हैं। घर में ज्यादा साफ सफाई रखी जाती है, बच्चों की जरूरत का सारा सामान, अगर सर्दियां हैं तो बच्चों के कमरे को गर्म रखने के लिए रूम हीटर, उसके गर्म कपड़े और भी बहुत सारी चीजों को ध्यान रखा जाता है। ताकि बच्चे को कोई भी दिक्कत न हो। लेकिन बच्चे काफी संवेदनशील होते हैं और उनका रोग प्रतिरोधक तंत्र भी कमजोर होता है तो वे कभी कभी बीमार भी हो जाते हैं। किसी भी तरह का वायरल इंफेक्शन हो या बैक्टीरियल इनफेक्शन, बच्चों को बहुत जल्दी पकड़ता है इसलिए हमें बच्चों की ज्यादा देखभाल करनी पड़ती है। आपने देखा होगा कि ज्यादातर बच्चे एक साल तक के बच्चों को ही बुखार या infection होते हैं क्योंकि उनका रोग प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है और जैसे जैसे वह बड़े होते हैं तो यह दिक्कतें कम हो जाती हैं। बच्चे की कोई भी छोटी बड़ी बीमारी बुखार से ही शुरू होती है क्योंकि शरीर में कोई भी समस्या हो, सबसे पहले शरीर के तापमान बढ़ता है। बहुत लोग सोचते हैं कि थोड़ा बुखार ही है सही हो जाएगा, वह बच्चों को खुद ही दवाई दे देते हैं और डॉक्टर की सलाह नहीं लेते। तो हम आपको बता दें कि चाहे सामान बुखार ही हो लेकिन कभी-कभी इसके पीछे की वजह साधारण नहीं होती इसलिए छोटे बच्चों के साथ किसी भी तरह का कोई भी जोखिम न लें। अगर आप बच्चों को दवा दे रहे हैं तो डॉक्टर से उसकी मात्रा जरूर पूछें क्योंकि दवा की खुराक बच्चे की उम्र और वजन के हिसाब से ही दी जाती है।

 आज के इस लेख में हम जानेंगे कि बच्चों को बुखार क्यों आता है? इसके क्या कारण होते हैं? और शरीर के तापमान के अनुसार कब बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना ठीक रहता है? और इस दौरान बच्चे की देखभाल कैसे करें?


 बुखार में बच्चों की देखभाल कैसे करें?

How to take care of kids during fever?

बुखार आजकल बहुत ही सामान्य हो गया है और हर बच्चे को होता है। सभी पेरेंट्स के लिए इसके पीछे के कारण को जानना और इस दौरान बच्चे की देखभाल कैसे करें यह जानना बहुत आवश्यक है।


* What is the normal temperature in babies?


 छोटे बच्चों के शरीर का सामान्य तापमान 97.5°F तक होता है और अगर यह 99.5 °F तक भी जाता है तो इसमें कोई समस्या की बात नहीं होती। क्योंकि बच्चा जब कोई भी शारीरिक क्रिया करता है तो शरीर गर्म हो जाता है और शरीर का तापमान भी बढ़ने लगता है। आपने भी देखा होगा कि कभी-कभी बच्चे का माथा गर्म होता है, हाथ पैर भी गर्म लगते हैं, तो यह सब बच्चे के खेलने कूदने की वजह से होता है। लेकिन अगर शरीर का तापमान 99°F पास हमेशा बना रहे तो आपको डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।


* Reasons of fever or types of fever -


बुखार आने का अर्थ है शरीर के तापमान का बढ़ना। यह तभी होता है जब बच्चे को कोई दर्द, जुखाम, खासी या कोई भी इंफेक्शन हो जाता है। हर प्रकार का बुखार अलग-अलग वजह से आता है जैसे-


1- Viral infection

यह तब होता है जब मौसम में बदलाव आने लगते हैं। जैसे कभी मौसम ठंडा है और अचानक से गर्मी होने लगे या बहुत ज्यादा गर्मी है और बारिश हो जाए तो ऐसे में बच्चों को बुखार आ ही जाता है। बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है वायरल बुखार 3 दिन से 6 दिन तक रहता है और अगर इससे ज्यादा दिन हो गए हैं तो हो सकता है कि कोई समस्या की बात हो

 ज्यादा बुखार आने से शरीर बहुत कमजोर हो जाता है इसलिए हमें जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाना चाहिए और खुद कोई दवा बच्चे को नहीं देनी चाहिए। अगर आपके घर पर किसी को वायरल है तो बच्चे को वहां से दूर रखें।


2- Bacterial infection

बच्चे खेलते-कूदते हैं, पसीना आता है जिसे कभी-कभी कीटाणु की वजह से भी शरीर में बच्चों को इंफेक्शन हो जाता है। जैसे- जुखाम होना, छींक आना, खासी, गले में दर्द आदि समस्याएं हो जाती हैं और इन सब से बच्चों को बुखार आ ही जाता है। वैसे तो यह बहुत ही सामान्य बुखार होता है लेकिन छोटे बच्चे बहुत ही संवेदनशील होते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है तो कभी-कभी हमें जोखिम ज्यादा होता है। अगर शरीर का तापमान 102°F से ऊपर हो तो आपको बच्चे को डॉक्टर को जल्द से जल्द दिखाना चाहिए।


3- टीकाकरण (Vaccination)

छोटे बच्चों का हर महीने टीकाकरण होता है और उसकी वजह से भी कुछ बच्चों को बुखार आ जाता है क्योंकि उस टीकाकरण में दर्द बहुत होता है जिससे बच्चों के शरीर का तापमान बढ़ जाता है।


4- दांत निकलना (Teething)

 अक्सर जब बच्चों के दांत निकलना शुरू होते हैं तो बच्चे काफी चिड़चिड़े हो जाते हैं और उन्हें बुखार भी आ जाता है क्योंकि बच्चे के मसूड़ों में दर्द होता है इसकी वजह से वह खाते पीते भी नहीं है और उससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है।

 अब बात आती है कि जब बच्चों को बुखार है या बुखार ठीक होने में समय ले रहा है तो घर पर ही बच्चों का ध्यान कैसे रखें?


* साफ सफाई (hygiene)-

जब भी बच्चों को बैक्टीरियल इनफेक्शन या फिर वायरल बुखार होता है तो आप को सबसे ज्यादा साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए। ताकि किसी भी तरह की गंदगी कमरे में न हो और जहां बच्चा लेटा हो या बैठा हो वह बेड भी साफ हो। बच्चे के खाने पीने के बर्तन, बोतल, कप, प्लेट समय-समय पर गर्म पानी में साफ करते रहें। अगर आप या कोई भी बच्चे को छुए तो पहले अपने हाथों को जरूर धोएं और साथ-साथ बच्चे के कपड़े भी साफ-सुथरे रखें ताकि वह इंफेक्शन से जल्दी ठीक हो जाए।


* तरल आहार (Liquid diet)


बुखार में शरीर का तापमान बढ़ जाता है। बच्चा काफी कमजोर हो जाता है और उसका न कुछ खाने का मन होता है और न ही वह खाई हुई चीजों को आसानी से पचा पाता है। तो ऐसे में जितना हो सके बच्चों को पानी देते रहें ताकि शरीर में भी नमी पहुंचती रहे। कभी-कभी तेज बुखार की वजह से भी बच्चे के शरीर और चेहरे पर छोटे छोटे दाने निकल आते हैं और खुजली हो जाती है और उसके लिए त्वचा में नमी बहुत ही जरूरी है। साथ ही तरल आहार बच्चा आसानी से पचा भी आएगा और कमजोरी भी नहीं आएगी।


* तला भुना खाना न दें (No junk food or spicy food)-

बाहर का तला भुना खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता। उसमें साधारण कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिसमें किन पोषक तत्व न के बराबर होते हैं और क्योंकि बुखार में बच्चे को ढेर सारे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है तो तला भुना खाना बच्चों के लिए ठीक नहीं है। मिर्च मसाले वाला खाना भी बच्चों को पचाने में परेशानी होती है इसलिए से भी न दें।


 * स्तनपान (Breastfeed)-

 स्तनपान बच्चों के लिए बहुत ही जरूरी है। यदि 1 साल से कम है और उसे बुखार या किसी भी तरह का इंफेक्शन है तो उसके लिए स्तनपान किसी दवा से कम नहीं है। अगर कमजोरी की वजह से बच्चा खुद दूध नहीं पी पा रहा है तो आप breast milk, express करके उसे कटोरी चम्मच या फिर बोतल से बच्चे को पिला सकती हैं।

 स्तनपान करने वाले बच्चों का रोग प्रतिरोधक तंत्र बहुत अच्छा होता है और उसमें काफी पोषक तत्व होते हैं जो बच्चों को बीमारी से लड़ने की शक्ति देते हैं।


* जायफल (Nutmeg)

 जुखाम, खासी, बुखार या किसी भी इन्फेक्शन से बचने के लिए जायफल एक बहुत ही अच्छा उपचार है। जायफल की तासीर गर्म होती है इसलिए यह आप इसे बच्चे को केवल सर्दियों में ही दें। नीचे एक वीडियो का लिंक दिया गया है जिसमें हमने बताया है कि बच्चों को जायफल कब और कैसे देना चाहिए। कभी-कभी जब बच्चे को सर्दियों में जुखाम, खासी या बुखार आता है तो आप यह उपचार अपना कर देख सकते हैं।


* Bath or Sponge Bath

बुखार में बच्चों को पसीना आता है इसलिए यदि बुखार बहुत हल्का है तो आप बच्चे को गुनगुने पानी से नहलाएं सकती हैं और यदि बुखार ज्यादा है तो उस का बदन गीले कपड़े से पोछ दीजिए। इससे बच्चे तरोताजा महसूस करेगा और पसीने से उसे किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन भी नहीं होगा। बच्चा अगर खुद से साफ सुथरा और तरोताजा महसूस करेगा तो जल्दी ठीक हो जाएगा।


* Hydration is must-

जैसे कि अभी हमने जाना कि बुखार में बच्चे के शरीर का तापमान बढ़ जाने से बच्चे को पसीना आता है और अगर बच्चे को पानी नहीं पिलाया तो उससे Dehydration या निर्जलीकरण की समस्या हो सकती है इसलिए बच्चे को बुखार में थोड़ी थोड़ी देर में पानी पिलाते रहे। पानी न ही गर्म दें और न ही ठंडा, आप पानी उबाल कर के रख दें और जब वह सामान्य तापमान पर आ जाए तो उसे ही बच्चे को पीने को दें। पानी ज्यादा पीने से बच्चे को पेशाब भी सही से होगी जिससे शरीर के अंदर की गंदगी साफ हो जाएगी और शरीर में नमी बनी रहेगी जिससे बुखार धीरे-धीरे कम होने लगेगा।


* बच्चे को आराम करने दें (Give rest to baby)-


जब भी हम बीमार होते हैं और थोड़ी देर अगर हम सो जाएं तो थोड़ा अच्छा महसूस करते हैं। ठीक उसी तरह अगर बच्चे को बुखार है तो आप उसे आराम करने दें क्योंकि सोना बच्चे के लिए बहुत जरूरी है इससे बच्चा जल्दी ठीक हो जाएगा। अगर दवाई देने के बाद भी बच्चे को आराम नहीं मिलेगा तो दवा असर नहीं करेगी जितना ज़्यादा बच्चा अच्छे से नींद पूरी करेगा उतना ही अच्छा है।


* पानी की पट्टी रखना (Sponge)-


जब भी बच्चे को 102°F या उससे ज्यादा बुखार हो तो आप बच्चे को साधारण पानी से पट्टी कर सकती हैं। बच्चे को ठंडे पानी की पट्टी नहीं देनी चाहिए क्योंकि उसे सर्दी लग सकती है। किसी साफ कपड़े या अपने हाथों को ही पानी में डालकर बच्चे के चेहरे, हथेली और पैरों के तलवे पर अच्छे से घूमाए जिससे कि बच्चे के शरीर का तापमान कम हो जाए। तेज़ बुखार में शरीर को नमी की आवश्यकता होती है और थोड़ा तापमान में सामान रखने की जरूरत होती है ताकि बुखार बुखार कम हो सके।


बुखार शब्द बोलने में काफी छोटा लगता है लेकिन जब हम बड़े लोग बुखार में कमजोर हो जाते हैं तो सोचिए बच्चे कितना परेशान होते होंगे। कई बार माता-पिता सोचते हैं कि बुखार ही है एक दो दिन में चला जाएगा तो वह डॉक्टर के पास नहीं जाते। आप ऐसा बिल्कुल भी ना करें। बुखार संकेत है कि आपके शरीर में अंदरूनी रूप से कोई दिक्कत या इंफेक्शन है तो आप यदि समय से डॉक्टर को दिखा लेंगे तो समस्या बढ़ नहीं पाएगी। एक छोटा सा बुखार भी बड़ी बीमारी का रूप ले सकता है। आप खुद से कोई भी दवा बच्चे को न दें क्योंकि छोटे बच्चों के साथ लापरवाही होने से दिक्कतें बढ़ सकती हैं इसलिए डॉक्टर को जरूर दिखाएं और उनकी बताई गई सभी सलाह को मानें।

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