How to take care of babies during pneumonia/ निमोनिया के दौरान शिशुओं की देखभाल कैसे करें

निमोनिया बीमारी के बारे में आप ने सुना ही होगा। इस बीमारी का खतरा 5 साल तक के बच्चों को  ज्यादा होता है, खासकर नवजात शिशुओं को। इसलिए आज इस लेख में हम आप को बच्चों में निमोनिया के बारे में बताएंगे कि यह बीमारी बच्चों को क्यों होती है और अगर बच्चे को निमोनिया है तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों के साथ-साथ घर पर ही बच्चे का ख्याल कैसे रखें? क्योंकि केवल दवाओं से किसी भी बीमारी से ठीक से नहीं सामना किया जा सकता, जब तक आप कुछ परहेज न करें और फिर यह तो हमारे छोटे बच्चे हैं और इनकी देखभाल करना बहुत ही जरूरी है ताकि यह जल्दी से जल्दी ठीक हो जाए।

 आजकल प्रदूषण बहुत ही ज्यादा है और उसी की वजह से हमें और हमारे बच्चों को भी काफी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। कभी-कभी यह समस्याएं बीमारी का रूप ले लेती हैं। कहने को तो खांसी, जुखाम, बुखार यह सब बहुत छोटे से शब्द लगते हैं लेकिन यह छोटी-छोटी बीमारी कब बढ़ जाए पता ही नहीं चलता। अगर बच्चे को सामान्य खांसी या बुखार है तो बच्चे को क्या-क्या उपचार देना है? कैसे उसकी देखभाल करनी है? इस पर दो अलग-अलग प्रकार के वीडियो में हमने आपसे कुछ टिप्स साझा करी है जिनका लिंक नीचे दिया गया है। लेकिन अगर बच्चों को निमोनिया हुआ है तो इस लेख को पूरा पढ़ें इसमें आपको निमोनिया से जुड़ी सारी जानकारी और कुछ देखभाल के तरीके भी हम देंगे जिससे आपको काफी मदद मिलेगी।

तो शुरू करते हैं आज का लेख-




निमोनिया बुखार में बच्चे का ध्यान कैसे रखें?

निमोनिया में बच्चों की देखभाल कैसे करें यह बताने से पहले आपको यह बताना जरूरी है कि निमोनिया क्या होता है। यह बच्चों को क्यों होता है ताकि आप बच्चे को उससे बचा सके।

What is pneumonia?
   निमोनिया क्या है?

निमोनिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें किसी भी बैक्टीरिया वायरस या केमिकल प्रदूषण की वजह से बच्चों के फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है जिस से फेफड़ों में सूजन आ जाती है। इस कारण कभी-कभी फेफड़ों में पानी भी भर जाता है और इसी वजह से बच्चे को बुखार, खांसी, जुखाम, सांस लेने में भी काफी तकलीफ होती है। ऐसा जरूरी नहीं है कि हर बच्चे को ज्यादा समस्या आए, कुछ बच्चों में हल्का बुखार, सूखी खांसी, सिर दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं, इसे वाकिंग निमोनिया(Walking Pneumonia) भी कहते हैं। इसमें बच्चों को एंटीबायोटिक देकर उनकी उनका इलाज किया जाता है और थोड़ी बहुत देखभाल से ही बच्चे ठीक हो जाते हैं। कुछ बच्चों को काफी दिक्कतें होती हैं, जैसे तेज बुखार, पसीना आना या ठंड लगना, होंठो और नाखूनों का नीला पड़ना, बलगम आना और सांस लेने में तकलीफ होना, तो ऐसे में यदि आपके बच्चे में ऐसे लक्षण हैं तो आपको उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि समय से बच्चे को इलाज मिल सके। अक्सर लोग यह सोच कर कि साधारण बुखार, खांसी जुखाम ही तो है ठीक हो जाएगा और बच्चों को डॉक्टर के पास नहीं ले जाते हैं। आप ऐसा बिल्कुल भी न करें और सबसे महत्वपूर्ण चीज है कि कोई भी दवा या इलाज बिना डॉक्टर से पूछे बच्चे को न दें।

अब बात करते हैं कि अगर बच्चे को निमोनिया है तो घर पर ही कैसे उसका ख्याल रखें और ऐसे कौन से घरेलू नुस्खे अपनाएं जिससे वह जल्दी ठीक हो जाए।

1- Maintain hygiene
    सफाई का ध्यान दें-

यदि आप घर में साफ सफाई रखती हैं और बच्चों को भी साफ सुथरा रखती हैं तो बच्चों को किसी भी तरह का कोई भी इंक्शन नहीं होगा।

बच्चों को किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाने के लिए सबसे पहला चरण यही होता है कि आपको अपने आसपास साफ-सफाई जरूर रखनी चाहिए क्योंकि छोटे बच्चों का रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है इसलिए उन्हें इंफेक्शन जल्दी पकड़ते हैं और अगर इंफेक्शन हो गया है तो जल्दी ठीक नहीं होता है। इसलिए बच्चे के आसपास साफ सफाई रखें बच्चे को खाना खिलाने या छूने से पहले हाथ जरूर धोएं और इतना ही नहीं बच्चे की बोतल हो या खाने का बर्तन उन्हें भी अच्छे से साफ रखें।

2- Maintain room temperature warm
    कमरे का तापमान गर्म बनाए रखें-

निमोनिया में फेफड़ों में पानी भर जाता है इसलिए डॉक्टर भी बोलते हैं कि बच्चे को ठंड से बचाएं ताकि उसे सांस लेने में तकलीफ न हो। ऐसे में जिस भी कमरे में बच्चा रहता है उस कमरे को गर्म रखें। अगर कमरे में धूप आ सकती है तो बहुत ही अच्छा है। अगर धूप नहीं आती तो आप कमरे में थोड़ी देर के लिए हीटर लगा सकते हैं उससे भी कमरे का तापमान बढ़ जाएगा और कमरा गर्म हो जाएगा। अगर गर्मियां है तो आपको कोई भी परेशानी नहीं है क्योंकि होगी क्योंकि गर्मियों में कमरे का तापमान गर्म ही बना रहता है। जिस कमरे में बच्चा सो रहा है हो वहां पर AC या कूलर न चलाएं।

3- Use ajwain and garlic oil to keep the baby's body warm 
    बच्चे के शरीर को गर्म रखने के लिए अजवाइन व लहसुन के तेल का प्रयोग -

निमोनिया में बच्चों के शरीर को गर्म रखना बहुत ही जरूरी होता है इसलिए अजवाइन और लहसुन का तेल घर पर ही बना कर आप उसे बच्चे की छाती, पीठ,पेट, हाथों की हथेली और नाखून और पैरों के तलवे और नाखूनों में हल्के हाथ से लगाएं। नाखूनों में यह तेल लगाने से शरीर में अच्छे से गर्माहट मिलेगी लेकिन एक बात का ख्याल रखिए कि आपको यह तेल केवल हल्के हाथ से लगाना है बच्चे को मालिश नहीं देनी है। यह तेल कैसे बनाना है उसका लिंक नीचे दिया गया है।


4- Healthy diet
     स्वस्थ आहार - 

बच्चे जब बीमार होते हैं तो उन्हें स्वस्थ व पोषक तत्वों से भरपूर खाना खिलाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है क्योंकि तबीयत ठीक न होने की वजह से वे वैसे भी कुछ नहीं खाते। लेकिन किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए भोजन भी एक बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसा क्या दें जो बच्चे को फायदा भी करें और वह खा भी ले? यह बात हमें अक्सर परेशान करती है। अगर हम 6 महीने तक के बच्चों की बात करें तो उन्हें अगर निमोनिया हुआ है तो उनके लिए मां का दूध ही जरूरी है लेकिन तब मां को भी अपने भोजन को स्वस्थ व पोषक तत्वों से भरपूर रखना पड़ेगा ताकि बच्चे को अच्छा पोषण मिल सके। आप अपने आहार में गर्म चीजें शामिल करें और यह निश्चित करें कि आपको खांसी, जुखाम न हो क्योंकि उससे बच्चे की समस्या बढ़ सकती है।

6 महीने से बड़े बच्चों के लिए मां के दूध के साथ ही सब्जियों से बना सूप या चिकन सूप से अच्छा कुछ भी नहीं है। बच्चों के लिए सूप की कुछ रेसिपी का लिंक नीचे दिया गया है। बच्चों के लिए सूप बनाते समय उसमें जीरा, हींग, लहसुन और हल्दी भी जरूर डालें क्योंकि इन की तासीर गर्म होती है और यह शरीर को गर्म रखने के साथ इंफेक्शन से भी बचाते हैं। इसके अलावा आप बच्चे को बादाम का चौका भी दे सकते हैं और बेसन का हलवा भी खिला सकते हैं। इनकी रेसिपी के लिंक भी नीचे दिए गए हैं। बच्चे को हमेशा गुनगुना बेसन का हलवा खिलाएं। अगर बच्चा चबाकर खा सकता है तो आप उसे अंडा भी खिला सकती हैं।

5- Add some turmeric in baby's food
    बच्चों के खाने में हल्दी का प्रयोग करें -

आप जानते ही होंगे कि हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं इसलिए यह बच्चों के लिए निमोनिया में भी काफी फायदेमंद है। हल्दी इन्फ्लेमेशन यानी सूजन को कम करती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है, इंफेक्शन को खत्म करती है इसलिए बच्चे को आप जो भी खिलाएं उसमें हल्दी जरूर डालें या फिर आप बच्चे को हल्दी वाला दूध भी पिला सकते हैं।

6- Proper vaccination is important
    उचित टीकाकरण है जरूरी -

दो साल तक के बच्चे का हर महीने टीकाकरण होता है ताकि बच्चों को गंभीर बीमारियों और infection से बचाया जा सके और वह उस बीमारी से जल्दी उभर पाए। इसलिए बच्चे के टीकाकरण की प्रक्रिया जरूर पूरी करें ताकि कोई भी बड़ी बीमारी बच्चे के लिए खतरनाक साबित न हो।


7- Give rest to baby
    बच्चे को के लिए आराम जरूरी है -

जैसे कि हमने पहले भी बताया कि अगर बच्चा बीमार है तो हो जितना अच्छे से आराम करेगा, सोएगा उतनी जल्दी उसे दवा भी असर करेगी और वह जल्दी से ठीक होगा। इसलिए जिस कमरे में भी बच्चा सोए वहां किसी भी तरह का शोर बिल्कुल भी न करें और कमरे का तापमान भी गर्म रखें ताकि बच्चा आराम से सो सकें।

छोटे बच्चे हर चीज बोलकर नहीं बता सकते इसलिए उनकी तकलीफ को समझिए और उनकी देखभाल करें ताकि वह जल्दी स्वस्थ हो सके। निमोनिया वैसे 1 से 2 हफ्ते तक तो रहता ही है लेकिन अगर आप बच्चे की देखभाल अच्छे से करेंगे तो हो सकता है बच्चा जल्दी ठीक हो जाए। प्रत्येक बच्चे के लक्षण अलग होते हैं और हर बच्चे का रोग प्रतिरोधक तंत्र भी अलग तरीके से काम करता है जिससे कुछ बच्चे जल्दी ठीक हो जाते हैं तो कुछ को समय लगता है इसलिए बच्चे को भी कोई भी दवा या नुस्खा देने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें क्योंकि वह आपके बच्चे को सामने से देख कर अच्छे से बता पाएंगे। इसके अलावा हम जो भी उपाय बताते हैं उसमें यह जरूर देख लें कि कहीं उसमें से आपके बच्चे को किसी चीज से एलर्जी तो नहीं है या फिर माता पिता या परिवार में भी किसी को उस से एलर्जी रही हो तो वह उपचार आप न करें और कोई दूसरा नुस्खा अपनाएं। घर पर दिए गए घरेलू उपचार तुरंत असर नहीं करते हैं इसलिए आपको धैर्य बनाए रखते हुए बच्चे का ख्याल रखना है।

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