8 Substitutes of sugar for babies to adult/चीनी के 8 प्राकृतिक विकल्प

बच्चे हों या बड़े सभी को मीठी चीजें काफी पसंद आती हैं। जैसे - चॉकलेट,आइसक्रीम, मिठाई, हलवा, रसगुल्ला या फिर कोई भी ऐसी dish जिसमे चीनी पड़ी हो। यहां तक कि जब हमारे यहां कोई मेहमान आता है तब भी हम उन्हें मीठा ही खिलाते हैं। काफी लोग खाना खाने के बाद मीठा जरूर खाते हैं और उनके लिए खाना बिना मिठाई के पूरा नहीं होता। यह सारी चीजें सामान्यता रिफाइंड शुगर से बनी होती है। चीनी का निर्माण कच्चे गन्ने के रस को निकालकर उसमें सल्फर डाइऑक्साइड मिलाकर किया जाता है और सफेद चीनी बनकर तैयार होती है। क्योंकि चीनी में सल्फर डाइऑक्साइड होता है तो यह हमारे श्वसन तंत्र पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है। जो लोग ज़्यादा मात्रा में चीनी का सेवन करते हैं उनके पेट में वसा की परतें जमने लगती हैं जिसके कारण वजन बढ़ना, कोलेस्ट्रोल बढ़ना, डायबिटीज, दातों में कीड़ा लगना जैसी समस्याएं हो जाती हैं और साथ में ही प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए अगर आप इन सब परेशानियों से बचना चाहते हैं और आप अपने बच्चों को भी इन से बचाना चाहते हैं तो ऐसी चीजें खाएं जिसमें प्राकृतिक मिठास हो ताकि आप का स्वाद भी बना रहे और स्वास्थ्य भी ठीक रहे।


 आज के इस लेख में हम बात करेंगे चीनी के स्थान पर हम किन-किन चीजों का प्रयोग कर सकते हैं।


 हम और हमारे बच्चों के लिए चीनी के स्वस्थ विकल्प -


आजकल डॉक्टर भी चीनी का सेवन कम करने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे काफी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं इसलिए इस लेख को अंत तक पढ़ें, इससे आपको काफी मदद मिलेगी।


 बच्चों के लिए चीनी के विकल्प-


0 से 6 महीने के बच्चों की बात करें तो उन्हें हमें किसी भी तरह मीठा पदार्थ नहीं देना चाहिए। उनके लिए केवल मां का दूध ही सर्वोत्तम आहार है।

 6 से 12 महीने तक के बच्चों को जब हम ठोस आहार देना शुरू करते हैं तो बच्चे को मीठा खिलाने का सबसे अच्छा तरीका है फलों की प्युरी।


कुछ फलों में मिठास अच्छी होती है, जैसे- सेब, आडू, और केला। आप बच्चों को यह फल दे सकती हैं।

 जब बच्चे 9 से 10 महीने के हो जाएं तो आप उसके खाने में थोड़ा सा गुड़ भी डाल सकते हैं। गुड़ पेट से जुड़ी समस्याओं को खत्म करता है और जब बच्चा ठोस आहार लेना शुरू करता है तो गुड़ खाने से उसको भोजन पचाने में भी सहायता मिलेगी।

 इसके अलावा बच्चों को गुड़ खिलाने के क्या-क्या फायदे हैं? और यह बच्चों को कितने और कब देने चाहिए? इसके लिए एक वीडियो का लिंक नीचे दिया गया है। आप उसे देखकर बच्चों के खाने में गुड़ का प्रयोग कर सकते हैं।

गुड़ के अलावा इतने छोटे बच्चों को आप Raisin Syrup यानी किशमिश से बना सिरप भी दे सकते हैं।किशमिश को रात भर भिगोकर रखें और अगले दिन उसे पीस के उसका जूस निकाल लें और उसे तब तक पकाएं जब तक कि वह आधा न रह जाए। इस सिरप को 8 महीने से बड़े बच्चों को दिया जा सकता है। किशमिश प्राकृतिक रूप से मीठी होती है, साथ ही यह आयरन का भी एक अच्छा स्रोत है। यदि बच्चे के शरीर में आयरन की कमी है तो उसके लिए भी यह काफी फायदेमंद है।

अब बात करेंगे 1 साल से ऊपर के बच्चों के लिए बड़ों के साथ ही हमारी प्रेगनेंट महिलाओं की। गर्भावस्था में रक्त में चीनी की मात्रा बढ़ जाती है इसलिए चीनी का सेवन कब करना चाहिए लेकिन अगर आपको मीठा खाना पसंद है तो आप प्राकृतिक रूप से मीठे पदार्थों का इस्तेमाल करें।


(1) Dates puree or date syrup-

खजूर बढ़ते बच्चों के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं और साथ ही यह मीठे भी होते हैं तो आप इसे बच्चों को दूध में या फिर हलवा में भी डाल कर दे सकती हैं। बस आपको इस बात का ध्यान रखना है की खजूर की तासीर गर्म होती है इसलिए जब भी इसकी प्यूरी या सिरप बनाएं तो रात भर पानी में भीगा हुआ खजूर ही प्रयोग करें। खजूर से आप बच्चों के लिए कई प्रकार की डिश बना सकती हैं, जैसे- खजूर की चटनी, दलिया, खीर आदि। नीचे इन रेसिपी के लिंक दिए गए हैं जिनको जिनसे आपको मदद मिलेगी।


(2) जैविक शहद (Organic Honey) का प्रयोग-

1 साल से छोटे बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। यह मधुमक्खी के छत्ते से निकलता है और इसमें कुछ बैक्टीरिया होते हैं जो इतने छोटे बच्चे के निकलने वाले दांत और उनकी प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर करते हैं। इसलिए आप 1 साल से बड़े बच्चे को शहद दे। लेकिन यह ध्यान रखें कि आप शहद कम मात्रा में ही दें। दूध, दलिया, हलवा खीर किसी में भी आप शहद मिलाकर बच्चे को दे सकते हैं। लेकिन यह ध्यान रहे कि आप जैविक शहद का प्रयोग करें। ग्रामीण इलाकों में आज भी ताजा निकला हुआ शहद मिल जाता है या लोग उसे बेचने भी आते हैं तो आपका भी अगर कोई जानने वाला गांव में रहता है तो आप वहां से शहद मंगा सकते हैं। बाजार में बोतल में मिलने वाला शहर शुद्ध नहीं होता है और बच्चों को नुकसान कर सकता है।


(3) Apricot powder-

एप्रीकॉट यानी खूबानी भी चीनी का एक विकल्प है। यह फल काफी मीठा होता है इसलिए इसे आप बच्चों को दे सकते हैं और साथ ही खुद भी इसका सेवन कर सकती हैं। आप बाजार से इसका पाउडर खरीद सकती हैं या फिर घर में ही इसे सुखाकर उसका पाउडर बनाकर प्रयोग में ला सकती हैं। सूखा हुआ खूबानी आपको किसी भी बाजार पर आसानी से मिल जाएगा।


(4) Greek yoghurt-



Greek yoghurt में कैलोरी काफी कम होती है और यह फलों के स्वाद में भी आता है और थोड़ा कम मीठा होता है तो आप इसे 1 साल से बड़े बच्चे को दे सकती हैं। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी ग्रीक योगर्ट काफी फायदेमंद होता है। लेकिन जब भी आप ग्रीक योगर्ट खरीदें तो यह ध्यान रखें कि उसमें पहले से चीनी न मिली हुई हो।


(5) Raw sugar-

अगला विकल्प है Raw sugar यानी खांड या इसे खांडसारी भी कहते हैं। जब गन्ने के रस को उबालकर उसे गाढ़ा किया जाता है और फिर उसे लगातार हिलाते हैं तो वह क्रिस्टल के रूप में आ जाती है और फिर इसे पीसने वाली मशीनों में डालकर और पानी से साफ किया जाता है और जब यह सूख जाती है तो सूजी की तरह बन जाती है। इसे भुरा चीनी भी कहते हैं और यह भी पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल जाता है। यह बच्चों के लिए फायदेमंद तो है ही साथ ही आप भी इसका सेवन कर सकते हैं।


(6) धागे वाली मिश्री- 

यह मिश्री खांड को उबालकर और 7 से 8 दिन हवा और धूप से इसे सुखा कर बनाई जाती है। यह मिश्री चीनी के मुकाबले थोड़ी सुरक्षित होती है इसलिए यह चीनी का एक अच्छा विकल्प है।


(7) नारियल चीनी- 


Coconut Sugar नारियल के पेड़ की छाल से बनाई जाती है। अगर हम इसकी तुलना चीनी से करें तो इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है इसलिए यह साधारण चीनी के मुकाबले ज्यादा स्वास्थ्य के लिए अच्छी है। यह चीनी 12 साल से ऊपर के बच्चे और बड़े दोनों ही खा सकते हैं। यह चीनी आपको दुकानों पर आसानी से मिल जाएगी।


(8) Stevia leaves-

बच्चों और बड़ों दोनों के लिए ही स्टीविया, चीनी का सबसे अच्छा विकल्प है। स्टीविया मीठी तुलसी को कहते हैं। यह एक पौधा है जो गर्म वातावरण में उगता है। इसकी पत्तियों को सुखाकर यह चीनी बनाई जाती है। सबसे अच्छी बात है स्टीविया में 0% कैलोरी होती है और वजन घटाने के लिए चीनी का यह बहुत अच्छा उपाय विकल्प है। यह बिल्कुल प्राकृतिक होती है इसलिए हम इसे बच्चों को भी दे सकते हैं। अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको भी स्टीविया का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से न तो दातों में कोई परेशानी आती है, साथ ही ब्लड शुगर भी सामान्य रहती है और आपका वजन भी नहीं बढ़ता। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह चीनी फायदेमंद है। स्टीविया आपको किसी भी सुपरमार्केट मेंं मिल जाएगी या फिर इसे ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। स्टीविया पाउडर, क्रिस्टल, टेबलेट या सूखी पत्तियों के रूप में मिलती है जो कि आप अपने मुताबिक खरीद सकते हैं।


दोस्तों, आज हमने जाना कि चीनी की जगह पर कौन से ऐसे स्वस्थ विकल्प हैं जिनको अपनाकर आप अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य का ख्याल रख सकते हैं। खासकर बच्चों को रिफाइंड चीनी पर निर्भर नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी में सल्फर होने की वजह से बच्चों को एग्जिमा, अस्थमा, पेट की समस्याएं और डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती है। इसलिए उन्हें प्राकृतिक रूप में ही मीठा दें। हर खाने की चीज का G.I. यानी ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है। उसमें यह बताया जाता है कि यह चीज शरीर में जाने के बाद कितनी मात्रा में ग्लूकोस में बदलेगी। तो जब भी आप कोई भी मीठा खरीदें तो उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स जरूर देखें और अगर यह 55 से नीचे है तो ही खरीदें। यदि ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55 से ऊपर है तो वह स्वीटनर आपको और आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है और अगर आप गुड़ या शहद भी खरीदे तो वह भी कोशिश करें कि जैविक (ऑर्गेनिक) ही हो। किसी भी चीज को ज्यादा मात्रा में लेना आपके लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है चाहे वह प्राकृतिक हो या कृत्रिम। हर चीज एक सीमा में ही खानी चाहिए ताकि हमें कोई परेशानी न हो। यदि आप साधारण चीनी खा रहे हैं तो उससे कोशिश करें कि उसे कम मात्रा में ही खाएं जिससे कि आप बिना किसी समस्या के शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकें।


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